
चाईबासा: पश्चिमी Singhbhum जिले में अवैध चुलाई शराब के निर्माण और कारोबार के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान चलाया है। इसी क्रम में उत्पाद विभाग ने विशेष छापेमारी अभियान के दौरान बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, चार अवैध शराब भट्ठियों को ध्वस्त किया और भारी मात्रा में अवैध चुलाई शराब के साथ शराब निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल बरामद किया। विभागीय कार्रवाई के दौरान कुल 85 लीटर अवैध चुलाई शराब और करीब 2000 किलोग्राम किण्वित जावा-महुआ बरामद हुआ, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया।

यह कार्रवाई जिले में लगातार बढ़ रही अवैध शराब की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उत्पाद विभाग ने साफ किया है कि अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ आने वाले दिनों में भी सघन छापेमारी जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
जिला प्रशासन के निर्देश पर चला विशेष अभियान
पश्चिमी Singhbhum जिला प्रशासन की ओर से अवैध चुलाई शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। प्रशासन का मानना है कि अवैध शराब न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। कई बार अवैध तरीके से तैयार की गई चुलाई शराब जहरीली साबित होती है, जिससे लोगों की जान तक चली जाती है। इसके अलावा ऐसे कारोबार से अपराध, तस्करी और असामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।

इन्हीं चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उत्पाद विभाग ने पुलिस के सहयोग से जिले के विभिन्न संवेदनशील इलाकों में अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध शराब निर्माण स्थलों की पहचान करना, वहां चल रही गतिविधियों को बंद कराना, तैयार शराब और कच्चे माल को जब्त करना तथा इसमें शामिल लोगों को कानून के दायरे में लाना था।
नोवामुंडी थाना क्षेत्र में दो आरोपी रंगे हाथ गिरफ्तार
अभियान के दौरान उत्पाद विभाग की टीम ने नोवामुंडी थाना क्षेत्र के गुड़ीजोरा इलाके में छापेमारी की। यहां टीम को अवैध चुलाई शराब की बिक्री किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन के बाद जब टीम मौके पर पहुंची, तो दो व्यक्तियों को अवैध शराब बेचते हुए पकड़ा गया। दोनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।
छापेमारी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 25 लीटर अवैध चुलाई शराब बरामद की गई। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह शराब अवैध रूप से तैयार की गई थी और स्थानीय स्तर पर बिक्री के लिए रखी गई थी। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे कब से इस धंधे में शामिल थे, शराब कहां तैयार की जा रही थी और किन लोगों तक इसकी आपूर्ति की जाती थी।
नोवामुंडी क्षेत्र में हुई यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह दर्शाती है कि अवैध शराब का कारोबार केवल छिपे हुए निर्माण स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुले तौर पर इसकी बिक्री भी की जा रही थी। ऐसे में विभाग अब सप्लाई चेन के अन्य हिस्सों तक भी पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के लतरशिखा गांव में संयुक्त छापेमारी
उत्पाद विभाग की कार्रवाई का दूसरा बड़ा चरण मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में देखने को मिला। यहां पुलिस के सहयोग से लतरशिखा गांव में संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया गया। विभाग को सूचना मिली थी कि गांव के आसपास अवैध रूप से चुलाई शराब का निर्माण किया जा रहा है और इसके लिए कई अस्थायी भट्ठियां संचालित की जा रही हैं।
जब टीम मौके पर पहुंची, तो वहां अवैध शराब निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही चार भट्ठियां मिलीं। अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन सभी भट्ठियों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही मौके पर रखी तैयार शराब और कच्चे माल की भी जांच की गई। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब केवल छोटे विक्रेताओं पर ही नहीं, बल्कि शराब निर्माण के स्रोतों पर भी सीधा प्रहार कर रहा है।
60 लीटर तैयार शराब और 2000 किलो जावा-महुआ बरामद
लतरशिखा गांव में की गई छापेमारी के दौरान टीम को करीब 60 लीटर तैयार चुलाई शराब बरामद हुई। इसके अलावा शराब निर्माण के लिए संग्रहित लगभग 2000 किलोग्राम किण्वित जावा-महुआ भी मौके से मिला। अधिकारियों के अनुसार, यह जावा-महुआ शराब तैयार करने की प्रक्रिया में उपयोग किया जाता है और बड़ी मात्रा में इसका मिलना इस बात का संकेत है कि यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाई जा रही थी।
उत्पाद विभाग ने बरामद जावा-महुआ और तैयार चुलाई शराब को मौके पर ही नष्ट कर दिया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में बरामद सामग्री को सुरक्षित रखना हमेशा संभव नहीं होता, खासकर तब जब वह अवैध, अस्वास्थ्यकर और खतरनाक स्थिति में हो। इसलिए कानूनन प्रक्रिया के तहत मौके पर ही उसे नष्ट करने की कार्रवाई की गई।
कुल 85 लीटर अवैध चुलाई शराब की बरामदगी
पूरे अभियान के दौरान नोवामुंडी और मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में हुई कार्रवाई को मिलाकर कुल 85 लीटर अवैध चुलाई शराब बरामद की गई। इनमें से 25 लीटर शराब गुड़ीजोरा क्षेत्र से गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मिली, जबकि 60 लीटर शराब लतरशिखा गांव में संचालित अवैध भट्ठियों से बरामद की गई।

इसके अलावा 2000 किलोग्राम जावा-महुआ की बरामदगी इस अभियान को और महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि इससे स्पष्ट है कि यह कोई छोटी-मोटी गतिविधि नहीं थी, बल्कि संगठित तरीके से शराब निर्माण की तैयारी चल रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती, तो यह शराब आसपास के गांवों और बाजारों तक पहुंच सकती थी।
छह अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज
उत्पाद विभाग ने इस पूरे मामले में केवल मौके से मिले सामान को जब्त या नष्ट करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि इसमें संलिप्त लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। विभाग की ओर से बताया गया है कि कुल छह अभियुक्तों के विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इनमें वे आरोपी भी शामिल हैं जिन्हें मौके से गिरफ्तार किया गया, और वे अन्य लोग भी जिनकी संलिप्तता जांच के दौरान सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, जिन व्यक्तियों की पहचान हुई है, उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आगे की कार्रवाई की जा रही है। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उन्हें भी इस मामले में आरोपी बनाया जा सकता है।

अवैध चुलाई शराब क्यों बन रही है प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में अवैध चुलाई शराब का कारोबार लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। कम लागत में तैयार होने और स्थानीय स्तर पर आसानी से बिक जाने के कारण कई लोग इस अवैध धंधे में शामिल हो जाते हैं। लेकिन इसका सबसे गंभीर पहलू यह है कि ऐसी शराब स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होती है। इसमें इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल, रसायन और निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह अनियंत्रित और असुरक्षित होती है।
अवैध शराब के सेवन से फूड पॉइजनिंग, अंधापन, लीवर की गंभीर बीमारी और मौत तक के मामले सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि जिला प्रशासन और उत्पाद विभाग इस कारोबार को सिर्फ कानून उल्लंघन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं।


पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त कार्रवाई का असर
इस अभियान की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें उत्पाद विभाग और स्थानीय पुलिस ने मिलकर कार्रवाई की। नोवामुंडी और मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में की गई संयुक्त छापेमारी से यह साफ संकेत गया है कि प्रशासन अब समन्वित रणनीति के साथ अवैध शराब के खिलाफ काम कर रहा है। इससे न केवल कार्रवाई की गति बढ़ती है, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में दबिश देना भी आसान होता है।
संयुक्त अभियान का फायदा यह भी है कि इसमें एक ओर उत्पाद विभाग तकनीकी और कानूनी पहलुओं को संभालता है, तो दूसरी ओर स्थानीय पुलिस क्षेत्रीय जानकारी, सुरक्षा और अपराधियों की धरपकड़ में मदद करती है। इस तरह की साझी कार्रवाई से अवैध कारोबारियों पर दबाव बढ़ता है और उन्हें बच निकलने के अवसर कम मिलते हैं।
आगे भी जारी रहेगा सघन अभियान
उत्पाद विभाग ने साफ कहा है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध शराब के निर्माण और कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए आगे भी सघन छापेमारी अभियान जारी रहेगा। विभाग के अनुसार, जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार सूचना जुटाई जा रही है और जहां भी अवैध शराब निर्माण, भंडारण या बिक्री की जानकारी मिलेगी, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ऐसे इलाकों को विशेष निगरानी में रखा जाएगा, जहां पहले से अवैध शराब की गतिविधियों की शिकायतें मिलती रही हैं। प्रशासन की कोशिश है कि केवल एक-दो छापेमारी तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि लगातार निगरानी और सख्त कानूनी कार्रवाई के जरिए इस अवैध नेटवर्क को कमजोर किया जाए।
ग्रामीण इलाकों में जनजागरूकता भी जरूरी
अवैध शराब के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई जितनी जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण जनजागरूकता भी है। कई बार ग्रामीण इलाकों में लोग सस्ती शराब के लालच में ऐसी चुलाई शराब खरीद लेते हैं, जबकि उन्हें उसके दुष्परिणामों की पूरी जानकारी नहीं होती। ऐसे में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पंचायतों की भूमिका भी अहम हो जाती है कि लोगों को समझाया जाए कि अवैध शराब सिर्फ गैरकानूनी नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकती है।
यदि ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं, तो अवैध शराब की मांग कम करने में मदद मिल सकती है। जब मांग घटेगी, तो स्वाभाविक रूप से इसके निर्माण और बिक्री पर भी असर पड़ेगा। इसलिए कानून के साथ-साथ सामाजिक भागीदारी भी इस लड़ाई में महत्वपूर्ण होगी।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश अवैध कारोबार बर्दाश्त नहीं
पश्चिमी सिंहभूम में हुई इस ताजा कार्रवाई से जिला प्रशासन और उत्पाद विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध चुलाई शराब का निर्माण, भंडारण और कारोबार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दो आरोपियों की गिरफ्तारी, चार भट्ठियों का ध्वस्तीकरण, 85 लीटर शराब और 2000 किलोग्राम जावा-महुआ की बरामदगी इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब इस मुद्दे पर आक्रामक रुख में है।
यह कार्रवाई केवल एक छापेमारी नहीं, बल्कि जिले में चल रहे अवैध शराब नेटवर्क पर एक संगठित प्रहार के रूप में देखी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहती है, तो अवैध शराब कारोबारियों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा और आम जनता को भी इससे राहत मिलेगी।
बड़ी बरामदगी सख्त कार्रवाई और आगे भी अभियान जारी
पश्चिमी Singhbhum जिले में अवैध चुलाई शराब के खिलाफ चलाया गया यह विशेष अभियान कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हुआ है। एक ओर जहां दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, वहीं दूसरी ओर चार अवैध भट्ठियों को ध्वस्त कर भारी मात्रा में तैयार शराब और कच्चा माल नष्ट किया गया। यह कार्रवाई दर्शाती है कि प्रशासन केवल सतही स्तर पर नहीं, बल्कि अवैध शराब के पूरे तंत्र को निशाने पर लेकर काम कर रहा है।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि दर्ज किए गए मामलों में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है और फरार या अन्य संलिप्त लोगों तक जांच एजेंसियां कब तक पहुंचती हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पश्चिमी सिंहभूम में अवैध शराब के खिलाफ अभियान अभी थमने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में यह और तेज हो सकता है।




















