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Martyr बेटे को मिला कीर्ति चक्र राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं मां भावुक पल में टूटा प्रोटोकॉल

On: June 11, 2026 11:07 AM
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नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह उस समय भावुक क्षणों का साक्षी बन गया, जब देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले Martyr लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी मां ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्राप्त किया। सम्मान ग्रहण करते समय मां अपने आंसुओं को रोक नहीं सकीं और भावुक होकर राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं। इस मार्मिक दृश्य ने पूरे समारोह को भावुक कर दिया और कुछ क्षणों के लिए प्रोटोकॉल भी पीछे छूट गया।

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देश के वीर सपूत को मिला मरणोपरांत कीर्ति चक्र

लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को उनकी अदम्य वीरता, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने साथी सैनिक की जान बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनके इस सर्वोच्च बलिदान को देश ने सलाम किया और राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सम्मान ग्रहण करते समय छलक पड़े मां के आंसू

जब Martyr अधिकारी की मां मंच पर सम्मान ग्रहण करने पहुंचीं, तो उनके चेहरे पर बेटे की वीरता का गर्व और उसकी कमी का दर्द दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। जैसे ही राष्ट्रपति ने उन्हें कीर्ति चक्र सौंपा, मां की भावनाएं उमड़ पड़ीं और वे खुद को संभाल नहीं सकीं।

वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा सभागार कुछ क्षणों के लिए भावनाओं में डूब गया।

राष्ट्रपति ने दिखाई संवेदनशीलता, टूट गया प्रोटोकॉल

राष्ट्रपति भवन के औपचारिक समारोहों में सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है, लेकिन इस मार्मिक पल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता दी। उन्होंने शहीद की मां को गले लगाकर सांत्वना दी और उन्हें ढांढस बंधाया।

इस दृश्य ने यह संदेश दिया कि देश अपने वीर जवानों और उनके परिवारों के प्रति केवल सम्मान ही नहीं, बल्कि गहरी संवेदना भी रखता है। राष्ट्रपति का यह मानवीय व्यवहार पूरे समारोह का सबसे भावुक क्षण बन गया।

कौन थे लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी?

उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी भारतीय सेना के एक युवा और साहसी अधिकारी थे। सिक्किम में एक सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने अपने साथी सैनिक की जान बचाने के लिए उफनती नदी में छलांग लगा दी। साथी सैनिक की जान तो बच गई, लेकिन शशांक तेज बहाव में बह गए और बाद में उनका शव बरामद हुआ।

उनकी इस वीरता और निस्वार्थ सेवा को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

समारोह में मौजूद गणमान्य लोग भी हुए भावुक

राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। शहीद की मां का दर्द देखकर पूरा सभागार भावुक हो गया और सभी ने खड़े होकर वीर सपूत के बलिदान को नमन किया।

देशभर में हो रही वीर सपूत को श्रद्धांजलि

कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने के बाद देशभर में लोग लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की वीरता को याद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लाखों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहस और बलिदान को सलाम किया। लोगों ने कहा कि ऐसे वीर सैनिकों की वजह से देश सुरक्षित है और उनका बलिदान सदैव याद रखा जाएगा।

बलिदान और मातृत्व का अविस्मरणीय दृश्य

राष्ट्रपति भवन में घटित यह भावुक पल केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि यह एक मां के दर्द, एक बेटे की शहादत और पूरे राष्ट्र के सम्मान का प्रतीक बन गया। शहीद बेटे के लिए मां के आंसू और राष्ट्रपति का मानवीय व्यवहार हर भारतीय के दिल को छू गया।

लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मिला मरणोपरांत कीर्ति चक्र केवल एक वीरता पुरस्कार नहीं, बल्कि देश के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान का सम्मान है। राष्ट्रपति भवन में उनकी मां और राष्ट्रपति के बीच घटित भावुक दृश्य ने यह साबित कर दिया कि देश अपने वीर सपूतों और उनके परिवारों के त्याग को कभी नहीं भूल सकता। यह क्षण भारतीय इतिहास के उन अविस्मरणीय पलों में शामिल हो गया, जिसने पूरे देश को गर्व और भावनाओं से भर दिया।

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