
हिंदी साहित्य के शलाका पुरुष Narendra कोहली को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन। ‘आधुनिक तुलसी’ के नाम से विख्यात ये साहित्यकार पौराणिक कथाओं को आधुनिक गद्य में जीवंत कर गए। उनकी कृतियाँ आज भी लाखों पाठकों को प्रेरित कर रही हैं।

उनकी रचनाओं ने भारतीय संस्कृति को नई दृष्टि दी। चलिए, उनके जीवन और योगदान को विस्तार से जानते हैं।
जीवन परिचय संघर्ष से साहित्य सृजन तक
Narendra कोहली का जन्म 6 जनवरी 1940 को सियालकोट में हुआ, जो अब पाकिस्तान में है। विभाजन की त्रासदी ने उनके बचपन को प्रभावित किया। दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर उन्होंने अध्यापन को अपनाया।
लंबे समय तक हिंदी साहित्य के अध्ययन-अध्यापन से जुड़े रहे। व्यंग्य लेखन से साहित्यिक यात्रा शुरू की, जो सामाजिक-राजनीतिक विसंगतियों पर तीखा प्रहार करता। 17 अप्रैल 2021 को दिल्ली में उनका निधन हुआ।
उनकी पत्नी डॉ. चित्रलेखा कोहली भी साहित्यिक क्षेत्र से जुड़ीं। कोहली जी ने सभी विधाओं – उपन्यास, कहानी, नाटक, व्यंग्य, निबंध में योगदान दिया।
रामकथा श्रृंखला आधुनिक तुलसी का चिह्न
Narendra कोहली को ‘आधुनिक तुलसी‘ कहने का कारण उनकी रामकथा श्रृंखला है। ‘दीक्षा’, ‘अवसर’, ‘संघर्ष की ओर’, ‘युद्ध’, ‘अभ्युदय’, ‘आत्मदान’ – इन छह उपन्यासों ने राम को चमत्कारी देवता नहीं, बल्कि मर्यादापुरुषोत्तम मनुष्य बनाया।
यह श्रृंखला महाकाव्यात्मक उपन्यास की नई विधा स्थापित करती। राम के अंतर्द्वंद्व, पारिवारिक संघर्ष, राज्यनीति को आधुनिक संदर्भों से जोड़ा। पाठक राम को समकालीन मानकर जुड़ते हैं।
लाखों प्रतियाँ बिकीं। टीवी धारावाहिकों के दौर में किताबों को पुनर्जनन मिला।
प्रमुख विशेषताएँ
- राम को संघर्षशील मानव के रूप में चित्रण
- मर्यादा, धर्म, कर्तव्य के आधुनिक प्रश्न
- सरल भाषा में गहन दर्शन
महासमर महाभारत का नया पाठ
महाभारत पर ‘महासमर’ श्रृंखला हिंदी उपन्यास का स्वर्णिम अध्याय। कर्ण, द्रौपदी, कृष्ण को मनोवैज्ञानिक गहराई दी। युद्ध से अधिक – धर्म, सत्ता, नैतिकता का विश्लेषण।
कर्ण के द्वंद्व को इतनी महीनता से बुना कि पाठक सहानुभूति रखते। द्रौपदी की मजबूरी, कृष्ण की नीतियाँ समकालीन बन गईं।
यह श्रृंखला सिद्ध करती – पुराण आधुनिक समस्याओं का समाधान दे सकते।
अन्य विधाएँ बहुआयामी प्रतिभा
व्यंग्य संग्रह – ‘जहाँ है धर्म, वहाँ है जय’, ‘एक और लाल तिकोना’। सामाजिक विसंगतियों पर करारा प्रहार।
स्वामी विवेकानंद पर ‘तोड़ो, कारा तोड़ो’। नाटक – ‘शंबूक की हत्या’, ‘निर्णय रुका हुआ’, ‘गारे की दीवार’। समाज की कठोर सच्चाइयों को उजागर।
भाषा सरल, विचारप्रधान। संस्कृतनिष्ठ और बोलचाल का संतुलन। पात्र जीवंत, अंतर्द्वंद्वपूर्ण।
अन्य रचनाएँ
- नेपथ्य, बाबा नागार्जुन
- माज़रा क्या है?
- बाल साहित्य, आलोचना
सम्मान और विरासत
2017 में पद्मश्री से सम्मानित। साहित्य अकादमी, अन्य पुरस्कार। हिंदी को लोकप्रिय बनाया।
उनकी रचनाएँ परंपरा-आधुनिकता का सेतु। सनातन को समकालीन बनाया। 100+ पुस्तकें।
जन्मदिन को साहित्यकार_दिवस मनाया जाता।

वरुण कुमार
लेखन एवं कवि









