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देश को कमजोर करने वालों से सख्ती से निपटे सरकार मूल संविधान की भावना से चले देश

On: January 27, 2026 10:09 PM
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जमशेदपुर :-पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर बिष्टुपुर और बारीडीह में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रमों के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा, संविधान की मूल भावना और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर बेबाक विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत ने आर्थिक और सैन्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन आज भी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाया है। सरकार द्वारा इस वर्ग को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

बारीडीह में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के बाद विधायक सरयू राय ने कहा कि भारतीय संविधान की सबसे बड़ी ताकत “विविधता में एकता” की अवधारणा है। संविधान ने सभी नागरिकों, विशेषकर अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों को अपने-अपने धर्म के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता दी है, लेकिन कई मामलों में इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के कारण कई बार देश की एकता और अखंडता को खतरा उत्पन्न हुआ है, जिसका सीधा असर आंतरिक सुरक्षा पर पड़ा है। सरकारें इन समस्याओं से निपटने का प्रयास कर रही हैं, फिर भी यह एक गंभीर और निरंतर बनी रहने वाली चुनौती है।

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सरयू राय ने कुछ राज्यों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश के कुछ हिस्सों में आज भी पूरी भावना के साथ भारत के साथ जुड़ने की इच्छा दिखाई नहीं देती। उन्होंने तमिलनाडु में हिंदी को प्रतिबंधित किए जाने को गंभीर विषय बताया। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में अगर केंद्र सरकार सीधे सख्त कार्रवाई करती है तो अलगाववादी भावनाओं को और बल मिल सकता है। हालांकि संविधान केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि यदि कोई राज्य राष्ट्रीय एकता के खिलाफ काम करता है तो आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान में लचीलापन भी है और आवश्यकता पड़ने पर कठोरता भी, और सरकार को परिस्थितियों के अनुसार इसका उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आज देश के सामने सीमा पर मौजूद खतरे से अधिक गंभीर संकट आंतरिक स्तर पर है। 1970 के दशक में नक्सलवाद एक बड़ी चुनौती था, जिसका आज काफी हद तक अंत हो चुका है। उसी तरह देश को कमजोर करने वाले तत्वों के खिलाफ भी सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।

बिष्टुपुर स्थित अपने कार्यालय एवं आवास पर ध्वजारोहण के बाद विधायक सरयू राय ने संविधान में संशोधन और उसकी मूल भावना पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यदि कोई कानून संविधान के अनुरूप नहीं होता है तो अदालतें उसे निरस्त कर देती हैं। संविधान के भीतर ही समय और परिस्थितियों के अनुसार संशोधन का प्रावधान है और अब तक 100 से अधिक बार संविधान में संशोधन किए जा चुके हैं। हालांकि उन्होंने संविधान की प्रस्तावना (प्रीएंबूल) में परिवर्तन को अनुचित बताया। उनका कहना था कि आपातकाल के दौरान प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे शब्द जोड़े गए, जबकि देश को मूल संविधान की भावना के अनुरूप चलना चाहिए, जिसमें ये शब्द शामिल नहीं थे।

अंत में सरयू राय ने कहा कि पिछले 76 वर्षों में भारत ने विकास के कई आयाम छुए हैं, लेकिन आज भी देश के सामने अनेक चुनौतियां खड़ी हैं। इन सभी चुनौतियों का समाधान संविधान के माध्यम से ही संभव है। संविधान का मूल स्वरूप “अनेकता में एकता” की स्थापना है और जो राज्य या तत्व इस भावना को स्वीकार नहीं करते, उनके खिलाफ सख्ती बरतना आवश्यक है।

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