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“स्टीकर वाला अपनापन”: व्हाट्सएप पर रिश्तों की नई भाषा

On: January 18, 2026 2:49 PM
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जमशेदपुर/पोटका। आज के तेज़-तर्रार और व्यस्त जीवन में रिश्तों के लिए समय निकालना हर किसी के लिए आसान नहीं रह गया है। लेकिन तकनीक ने एक ऐसा रास्ता जरूर बना दिया है, जिससे दूरियाँ भी रिश्तों की गर्माहट को कम नहीं कर पातीं। व्हाट्सएप पर “सुप्रभात”, “शुभ संध्या”, “शुभ रात्रि” वाले स्टीकर अब सिर्फ औपचारिक संदेश नहीं रहे—बल्कि यह रिश्तों की एक नई भाषा बन चुकी है।

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इसी भाव को बेहद सरल, संवेदनशील और सच्ची शैली में पिरोया है करुणामय मंडल (पूर्व जिला पार्षद, पोटका, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड) द्वारा प्रस्तुत कविता ने, जिसकी प्रस्तुति 17/01/2026, रात्रि 3:31 बजे की गई।

कविता

“हरदिन याद करते हैं
आंखें खोलने के साथ।
दूसरों के स्टीकर देकर
करते हैं “सुप्रभात”।।

व्हाट्स एप्प के जरिए
हर सुबह हर रात।
अच्छे अच्छे स्टीकरों से
शुभ संध्या सुप्रभात।।

सोने से पहले शुभ रात्रि
करते नहीं भूलते।
सारी व्यस्तता के बावजूद
ऐसे कैसे कर लेते।।

वाकई सोचने को विवश हूं
जब सोचता हूं यार।
सायद यही है अपनापन
शायद यही है प्यार।।

कितनी ललक है समझो
हर दिन इस प्यार की।
समय दे ना पाए तो मानो
स्थिति बीमार की।।

वाह,अमिरी गरीबी से परे
अनोखे क्या रिश्ते है।
कठिन जटिल ये जीवन में
मानो यही फ़रिश्ते है।।

दोनों ही तरफ से होती है
दुयाओं की बौछार।
एक दूसरे के लिए सदैव
उमड़ती है प्यार।।

सुंदर हो जीवन सबका
सुंदर हो ये संसार।
अटूट रहे ये सुंदर रिश्ते
अटूट रहे ये प्यार।।”

कविता का भावार्थ

1) सुबह आंख खुलते ही याद…

कवि कहते हैं कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दिन की शुरुआत आंख खुलते ही अपनों को याद करके करते हैं। वे दूसरों के बनाए सुंदर-सुंदर स्टीकर भेजकर “सुप्रभात” कहते हैं। यानी सुबह की पहली सोच रिश्तों के लिए होती है।

2) स्टीकर के जरिए रिश्तों की डोर

व्हाट्सएप के माध्यम से हर सुबह और हर रात वे लोग संदेश भेजते रहते हैं—“सुप्रभात”, “शुभ संध्या”, “शुभ रात्रि” जैसे शुभकामना संदेश। कवि बताना चाहते हैं कि यह छोटी-सी क्रिया भी दिलों को जोड़ती है, और सामने वाले को यह एहसास कराती है कि “तुम याद हो”

3) व्यस्तता के बावजूद याद रखना

कवि आश्चर्य में हैं कि इतनी व्यस्तता के बावजूद भी लोग इतना नियमित कैसे कर लेते हैं? सोने से पहले शुभ रात्रि कहना वे कभी नहीं भूलते। यह आदत बताती है कि रिश्ते उनके लिए प्राथमिकता हैं।

4) शायद यही अपनापन… शायद यही प्यार

कवि निष्कर्ष निकालते हैं कि शायद यही अपनापन है, यही प्यार है। जिसमें रोज़ हालचाल पूछे बिना भी सिर्फ एक छोटे संदेश से रिश्ते की गर्मी बनी रहती है।

5) समय ना मिले तो बेचैनी—प्यार की ललक

कवि कहते हैं— अगर किसी दिन संदेश न जाए, या समय न मिल पाए, तो भीतर से ऐसा लगता है जैसे कुछ गलत हो गया हो। यह दर्शाता है कि यह संवाद अब ज़रूरत नहीं—भावनात्मक आदत बन चुका है।

6) अमीरी-गरीबी से परे रिश्ते

यह रिश्ता धन-दौलत, ऊंच-नीच से परे है। यह एक ऐसा अपनत्व है जिसमें एक छोटा स्टीकर भी फरिश्ते जैसी भूमिका निभा देता है— मन को राहत देता है, अकेलेपन को तोड़ देता है।

7) दुआओं की बौछार, दोनों तरफ से प्यार

कवि बताते हैं कि दोनों तरफ से दुआएँ निकलती हैं— एक दूसरे के लिए शुभकामनाएँ, मंगल प्रार्थनाएँ और प्रेम। यानी यह रिश्ता सिर्फ मैसेज का नहीं, दिलों का है।

8) सुंदर जीवन, सुंदर संसार

कविता का संदेश बहुत सकारात्मक है— कि सबका जीवन सुंदर हो, संसार सुंदर हो, और यह प्यारा रिश्ता हमेशा अटूट बना रहे।

कविता का संदेश (Key Message)

  • छोटी-छोटी शुभकामनाएँ भी बड़ी भावनाएँ होती हैं।
  • व्हाट्सएप के “सुप्रभात” स्टीकर आज की दुनिया में रिश्तों की डोर बन चुके हैं।
  • व्यस्त जीवन में जब समय कम हो, तब भी अपनापन जताने का सबसे सरल तरीका यही बन गया है।
  • यह परंपरा “औपचारिकता” नहीं, बल्कि दुआ, प्रेम और संवेदना का पुल है।

करुणामय मंडल की यह रचना हमें यह सिखाती है कि रिश्तों को निभाने के लिए बड़े काम नहीं, बल्कि छोटी-छोटी यादें काफी होती हैं। एक “सुप्रभात” स्टीकर भी किसी के दिन को बेहतर बना सकता है, और “शुभ रात्रि” किसी के मन का बोझ हल्का कर सकता है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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