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मनरेगा कानून व नाम बदलने के खिलाफ कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम चाईबासा से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का किया ऐलान

On: January 10, 2026 7:23 PM
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चाईबासा ( जय कुमार ): मनरेगा कानून और नाम में बदलाव के विरोध में प०सिंहभूम जिला में कांग्रेस चलाएगी मनरेगा बचाओ संग्राम इसके निमित्त शनिवार को कांग्रेस भवन, चाईबासा में संवाददाता सम्मेलन आयोजित की गई । संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए जिला पर्यवेक्षक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व राज्य सभा सांसद डॉ.प्रदीप कुमार बलमुचू ने कहा कि काम के अधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस एक राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत 11 जनवरी को एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध गांधी मैदान ,चाईबासा स्थित राष्ट्रपति महात्मा गांधी के आदमकद प्रतिमा के नीचे किया जाएगा।

द्वितीय चरण में 12 जनवरी से 30 जनवरी तक पंचायत स्तर पर चौपाल, सभी ग्राम प्रधान, पूर्व ग्राम प्रधान रोजगार सेवक एवं मनरेगा कार्यकर्ताओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता विपक्ष के पत्र का वितरण,विधानसभा स्तरीय नुक्कड़ सभा। 30 जनवरी शहीद दिवस पर वार्ड और प्रखंड स्तर पर शांतिपूर्ण घरने आयोजित किए जाएंगे , जिनमें अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर जोर दिया जाएगा।

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तृतीय चरण में 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय मनरेगा बचाओ धरना। इसके उपरांत राज्य स्तरीय विधान सभा घेराव और अभियान के समापन के रुप में एआईसीसी द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर चार मनरेगा बचाओ रैली का आयोजन किया जाएगा। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए डॉ.प्रदीप कुमार बलमुचू ने आगे कहा कि मनरेगा का नाम बदलना ग्रामीण भारत पर हमला है,मनरेगा के तहत योजनाओं का चयन पहले गांव में होता था अब केंद्र योजना पंचायत और गांव का चुनाव करेगा।वर्तमान भीबी-जीरामजी योजना से क्षेत्रीय असंतुलन पैदा होगा जो देश के लिए हितकर नहीं होगा।

मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का रीढ़ था जिसे केंद्र सरकार ने तोड़ दिया, कोरोना काल में मनरेगा ने गांव में संजीवनी का काम किया था जो आपात स्थिति में किसी योजना के महत्व को दर्शाता है,नरेंद्र मोदी इसे मिटाना चाहते है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 10 वर्षों पूर्व मनरेगा की आलोचना करते हुए मनरेगा को यूपीए सरकार का स्मारक कहा था, मनरेगा में हर पंचायत को राशि मिलता था लेकिन अब सिर्फ चुनिंदा पंचायतों को राशि मिलेगी इससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर घटेंगे।


कांग्रेस जिलाध्यक्ष रंजन बोयपाई ने कहा कि भाजपा की विचारधारा गांधी जी के विपरीत है यही वजह है कि महात्मा गांधी के नाम को हटाकर नई योजना लाई गई।बीजेपी नहीं चाहती कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले,आर्थिक संपन्नता हो,क्रय शक्ति बढ़े इससे भाजपा की पूंजीवादी सोच झलकती है।नाम में बदलाव भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है,हिंदू धर्म को योजना में भावनात्मक रूप से जोड़कर राजनीतिक मंसूबा साधने की कोशिश की गई है।सरकार 125 दिन रोजगार देने की बात करती है लेकिन सभी निबंधित मजदूरों को रोजगार दिया गया तो बड़ी राशि की आवश्यकता पड़ेगी जिसका प्रावधान बजट में नहीं,सरकार मजदूरों के साथ छलावा कर रही है।

कांग्रेस जिला प्रवक्ता त्रिशानु राय ने कहा कि जिस समय मनरेगा लागू हुआ था उस समय विपक्ष ने भी इसकी सराहना की थी इससे ग्रामीण भारत का नक्शा बदलेगा जो सही साबित भी हुआ। हमारे मौलिक अधिकार में रोजगार का अधिकार नहीं है लेकिन मनरेगा में रोजगार की कानून गारंटी थी। भाजपा ने वर्तमान कानून में बरसात के दिनों में 60 दिनों के लिए रोजगार बंद कर दिया जबकि मनरेगा के तहत बरसात में भी अनेक कार्य हुए और कई कार्य किए जा सकते है।रोजगार के मामले में केंद्र ने राज्यों की उपेक्षा की,केंद्र ने नई योजना में केंद्र और राज्य का अंशदान 60- 40 का रखा है जिससे झारखंड जैसे राज्यों को अपना अंशदान देने में कठिनाई होगी

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