मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया

भारतीय सेना के साहस, शौर्य और बेजोड़ नेतृत्व का प्रतीक नाम — मेजर होशियार सिंह।

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: December 6, 2025 9:50 PM
Follow Us:
The News Frame 27
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1
  • मेज़र होशियार सिंह : लोंगेवाला के शेर, परमवीर चक्र से अलंकृत वीर सपूत
  • राष्ट्रभक्ति ले हृदय में, हो खड़ा यदि देश सारा, संकटों पर मातकर यह, राष्ट्र विजयी हो हमारा।

मेजर होशियार सिंह का जन्म 5 मई 1936 को सोनीपत, हरियाणा के एक गांव सिसाना में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय में प्राप्त की तत्पश्चात् जाट हायर सैकेण्ड्री स्कूल गए। वह एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने मेट्रीक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। वह एक अच्छे खिलाड़ी भी थे। उन्होंनेव्रबॉलीबाल की संयुक्त पंजाब की टीम में भाग लिया।

A 2

बाद में उन्हें पंजाब की टीम का कप्तान भी बनाया गया और राष्ट्रीय टीम में भी उनका चयन हुआ। ऐसे ही एक मैच के दौरान जाट रेजीमेन्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी की नजर उन पर पड़ी, उन्होंने उन्हें जाट रेजीमेन्ट में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 1957 में 2 जाट में प्रवेश लिया तत्पश्चात् 3 ग्रेनेडियर्स में कमीशन लेकर अफसर बन गए।

1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने गजब की हिम्मत व दृढ़ता दिखाई। बीकानेर क्षेत्र में सीमा पर साहसिक गश्त लगाते हुए अनेक बहुमूल्य सूचनाएं एकत्र करके अपनी बटालियन को दी। नेतृत्व का जन्मजात गुण रखने वाले मेजर होशियारसिंह इंडियन मिलिट्री अकादमी में जब कम्पनी कमांडर थे तो उनकी कम्पनी लगातार छः सत्र तक चैम्पियन रही।

1971 के युद्ध में भारत ने कई मोर्चों पर लड़ाई की, जिसमें एक मोर्चे पर मेजर होशियारसिंह ने भी कमान संभाली। शकरगढ़ पठार भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना था। भारत अगर इस पर कब्जा जमा लेता तो एक ओर जम्मू-कश्मीर तथा उत्तरी पंजाब को सुरक्षित रख सकता था, दूसरी ओर पाकिस्तान के मर्मस्थल पर प्रहार भी कर सकता था। इसी तरह पाकिस्तान इस पर कब्जा रखता तो वह भारत के भीतर घुसता आ सकता था। सचमुच यह बेहद महत्वपूर्ण ठिकाना था जिस पर दोनों ओर के सैनिकों की नजर थी। शकरगढ़ का यह क्षेत्र पूरी तरह से प्राकृतिक बाधाओं से भरा हुआ था जिस पर दुश्मन ने बहुत सी टैंकभेदी बारूदी सुरंगे बिछाई हुई थी।

14 दिसम्बर 1971 को 3 ग्रेनेडियर्स के कमान अधिकारी को सुपवाल पर एक ब्रिगेड आक्रमण की अगुवाई करने का आदेश दिया गया। 3 ग्रेनेडियर्स को लोहाल और जरपाल गाँवों पर भी कब्जा करना था। योजना के मुताबिक जरपाल पर कब्जा करके सुपवाल को अलग-थलग करना था। इस इलाकें में पाकिस्तान ने 1200 गज की दूरी तक जमीन में बारूदी सुरंगें बिछा रखी थी। 15 दिसम्बर 1971 की शाम को दो कम्पनियों जिनमें से एक का नेतृत्व मेजर होशियार सिंह कर रहे थे, ने आक्रमण के पहले चरण की शुरूआत की। दोनों ही कम्पनियों ने भारी गोलाबारी और मशीनगनों की बौछार के बीच अपने लक्ष्यों पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 16 दिसम्बर को प्रातः 17हॉर्स की टुकड़ियां भी 3 ग्रेनेडियर्स के साथ मिल गई।

THE NEWS FRAME

16 दिसम्बर को इस क्षेत्र में भीषण युद्ध हुआ। 3 ग्रेनेडियर्स और इसके साथ चल रहा बख्तरबंद दस्ता आगे बढ़ता रहा। उधर दुश्मन की इन्फेन्ट्री तथा बख्तरबंद दस्ते बार-बार जवाबी हमले करते रहे। सैकण्ड लेफ्टिनेन्ट अरूण खेत्रपाल (17हॉर्स) बहुत बहादुरी से लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए। उन्हें मरणोपरान्त ‘परमवीरचक्र’
से सम्मानित किया गया।

इस बीच 3 ग्रेनेडियर्स सटीक गोलाबारी करके दुश्मन के जवाबी हमलों को विफल करती रही। भारतीय सैनिकों का हौसला बुलन्द था और खंदकों से जवान व उपकमाण्डर जोर शोर से जयघोष करते हुए एक दूसरे को बधाई दे रहे थे। 17 दिसम्बर को प्रातः दुश्मन की बटालियन का कमाण्डर अपनी बटालियन और बख्तरबंद दस्ते लेकर आगे बढ़ा और मेजर होशियार सिंह की कम्पनी पर हमला कर दिया। मेजर होशियार सिंह बिना हड़बड़ाए पूरी दृढ़ता से दुश्मन का मुकाबला करते रहे, साथ ही अपने जवानों को भी पेरित करते रहे।

घायल होने के बावजूद वे एक खंदक से दूसरी खंदक में जाते रहे और पाकिस्तानियों के बार-बार होने वाले हमलों को रोकने के लिए जवानों को प्रेरित करते रहे। जब एक मध्यम मशीनगन चलाने वाला मारा गया तो उन्होनें खुद उसे संभाल लिया और गोलाबारी करने लगे। उनकी उत्साहित कम्पनी ने दुश्मन के 89 सैनिकों के शव युद्ध भूमि से प्राप्त किये, जिनमें उनके कमान अधिकारी लेफ्टिनेन्ट कर्नल मोहम्मद अकरम राजा 35 सीमान्त बल रायफल्स भी थे। उनके साथ 3 वरिष्ठ अधिकारी भी मारे गए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मेजर होशियार सिंह ने पीछे हटने से इंकार कर दिया।

सारा दिन दुश्मन की बटालियन की फौज के सैनिकों का मेजर होशियार सिंह की फौज वीरतापूर्वक प्रतिरोध करती रही। शाम 6 बजे आदेश मिले की 2 घंटे बाद युद्धविराम लागू हो जाएगा। अब दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर भीषण गोलाबारी शुरू कर दी। जब तक युद्ध विराम लागू हुआ तब तक 3 ग्रेनेडियर्स के एक अधिकारी व 32 जवान मारे जा चुके थे, 3 अधिकारी व 4 जूनियर कमीशंड अधिकारियों सहित 86 जवान घायल हो चुके थे तभी मेजर होशियारसिंह की बटालियन को युद्ध विराम के बाद जीत का सेहरा पहनाया गया। इस युद्ध विराम के बाद बांग्लादेश उदय की वार्ता प्रारम्भ हुई। मेजर होशियारसिंह को भारतीय सैन्य परम्परा के अनुकूल अद्धितीय शौर्य, युद्धकौशल व नेतृत्व का परिचय देने के लिए परमवीर चक्र प्रदान किया गया।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM
Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

और पढ़ें

Untitled Design 40 1

जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त ने केंद्रीय कारा Ghaghidih साकची कारा एवं संप्रेक्षण गृह का किया निरीक्षण सुरक्षा एवं पुनर्वास व्यवस्था को लेकर दिए महत्वपूर्ण निर्देश

Untitled Design 38 1

उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला Plan समिति की कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन 139 जनहितकारी योजनाओं पर हुआ विस्तृत मंथन

Untitled Design 36 2

DM की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक सम्पन्न जनहित योजनाओं में तेजी लाने और विभागीय समन्वय मजबूत करने के निर्देश

Untitled Design 33 3

अन्ना Amrita फाउंडेशन के सेंट्रल किचन का डीसी ने किया निरीक्षण गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

Untitled Design 24 4

यह संघ कार्यालय पर नहीं राष्ट्रवादी विचार पर हमला है अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद Jharkhand

Untitled Design 23 4

परम पूज्य Balasaheb देवरस सामाजिक समरसता राष्ट्र निर्माण और दूरदर्शी नेतृत्व के प्रेरणास्रोत

Leave a Comment

धार्मिक

See All

लाइफस्टाइल

See All

मौसम

See All

खेल

See All

क्राइम

See All

Entertainment

See All

ज्योतिष

See All
Link copied