
चाईबासा (जय कुमार): आदिवासी उरांव समाज के महान त्योहार करमा पर्व को लेकर शुक्रवार की रात चाईबासा के सातों अखाड़ों में परंपरागत जावा जागरण किया गया। पूरी रात जग्गा कर शनिवार की सुबह सूर्योदय से पहले कुंवारी कन्याएं उपवास रखते हुए रोरो नदी श्मशान काली मंदिर से टोकरी में बालू उठाकर नृत्य-गान करते हुए पाहन पुजारी के घर पहुंचीं।

इसके बाद उस बालू में जावा मिलाया गया, जिसकी सेवा अगले पांच दिनों तक हर सुबह-शाम धुप-धूमन, नृत्य और संगीत के साथ की जाएगी।

समुदाय के लोग आगामी 3 सितंबर को भादो एकादशी पर करम पूजा बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक नृत्य-संगीत के साथ करेंगे। वहीं, 4 सितंबर (गुरुवार) को करम डाल का विसर्जन किया जाएगा।
इस मौके पर बान टोला के मुखिया लालू कुजूर, पाहन पुजारी फागु खलखो, मंगरू टोप्पो, चमरू लकड़ा, शंभू टोप्पो, सीताराम मुंडा, राजेंद्र कच्छप, जगर्नाथ लकड़ा, खुदिया कुजूर, बंधन खलखो सहित बड़ी संख्या में युवा-युवतियां और ग्रामीण उपस्थित थे।
करमा पर्व को लेकर पूरा क्षेत्र भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर है।










































