
रांची: झारखंड में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत NIT (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) जमशेदपुर और झारखंड राज्य संकाय विकास अकादमी (JSFDA) के बीच सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर आज रांची में हस्ताक्षर किए गए।

यह रणनीतिक साझेदारी राज्य के शिक्षकों के लिए संकाय विकास कार्यक्रमों, शैक्षणिक प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण पहलों को मजबूती प्रदान करेगी। दोनों संस्थानों का यह गठजोड़ झारखंड में शिक्षा क्षेत्र को आधुनिक, सुदृढ़ और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में एक उत्प्रेरक (catalyst) की भूमिका निभाएगा।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
इस समझौते पर NIT जमशेदपुर की ओर से प्रो. सतीश कुमार (डीन – अनुसंधान एवं परामर्श) और JSFDA की ओर से \[JSFDA निदेशक श्री रामनिवास यादव, IAS], निदेशक, JSFDA ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कर्नल (डॉ.) एन. के. राय, कुलसचिव, एनआईटी जमशेदपुर; डॉ. कौशलेंद्र कुमार, एनआईटी जमशेदपुर; और JSFDA के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
वक्ताओं के विचार
प्रो. सतीश कुमार ने इस मौके पर कहा:
“हमारा उद्देश्य है कि संकाय विकास के सुव्यवस्थित कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार लाया जाए। यह सहयोग राज्य के शिक्षकों को नए दृष्टिकोण, तकनीकों और समृद्धि की ओर मार्गदर्शन देगा।”
श्री रामनिवास यादव, IAS, निदेशक, JSFDA ने कहा:
“एनआईटी जमशेदपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ भागीदारी हमें ऐसे प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने में सक्षम बनाएगी जो व्यावहारिक, विस्तार योग्य और परिणाम-उन्मुख हों। यह झारखंड के शैक्षणिक परिदृश्य को सशक्त करेगा।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल
यह समझौता राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो शिक्षण विधियों में नवाचार, अकादमिक उत्कृष्टता और संकाय सशक्तिकरण पर बल देती है। यह MoU दोनों संस्थानों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वे झारखंड को एक समावेशी, नवाचारी और भविष्योन्मुख शैक्षणिक राज्य के रूप में विकसित करना चाहते हैं।
यह साझेदारी न केवल शिक्षकों के पेशेवर विकास में सहायक होगी, बल्कि झारखंड के शिक्षा तंत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस MoU के ज़रिए सैकड़ों शिक्षकों को लाभ पहुंचेगा और इससे राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और अनुसंधान का माहौल विकसित होगा।













































