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Sharp attack by चम्पाई सोरेन: “आदिवासियों से जुड़े मुद्दों पर गूंगी-बहरी हो जाती है झारखंड सरकार”

On: May 18, 2025 8:21 PM
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Sharp attack by Champai Soren: “Jharkhand government becomes deaf and dumb on issues related to tribals”

🔴 “आदिवासियों से जुड़े मुद्दों पर गूंगी-बहरी हो जाती है झारखंड सरकार” : चम्पाई सोरेन का तीखा हमला

महिला सुरक्षा, घुसपैठ और धर्मांतरण पर बोले पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस से माँगी माफी

रांची, 18 मई — झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता चम्पाई सोरेन ने आज राजधानी रांची में आयोजित एक प्रेस वार्ता में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार न केवल आदिवासियों के मुद्दों पर “गूंगी और बहरी” बन गई है, बल्कि महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भी असंवेदनशील रवैया अपना रही है।

🧭 घुसपैठियों पर केंद्र की सख्ती का स्वागत, राज्य सरकार पर सवाल

चम्पाई सोरेन ने बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या की बढ़ती उपस्थिति को लेकर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार का आभार प्रकट किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद देते हुए कहा—

“आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन एक साहसिक कदम है। हर जिले में अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें होल्डिंग सेंटर भेजा जाएगा, यह स्वागत योग्य है।”

लेकिन उन्होंने झारखंड सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पिछली बार हाईकोर्ट ने घुसपैठियों की पहचान को लेकर कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था, तब सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी।

“अब कोई बहाना नहीं चलेगा। लाखों की संख्या में राज्य में रह रहे अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालना होगा, क्योंकि ये आदिवासियों-मूलवासियों के अधिकारों पर सीधा हमला है।”

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⚠️ महिला सुरक्षा पर सरकार को घेरा, रेपिस्ट को इनाम देने की आलोचना

बोकारो की एक बहुचर्चित घटना का हवाला देते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि एक मंत्री द्वारा बलात्कारी को “विक्टिम” साबित कर इनाम देने की घोषणा बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।

“रेपिस्ट को राहुल गांधी और मुख्यमंत्री की ओर से 1-1 लाख की सहायता, सरकारी नौकरी और इलाज की व्यवस्था देना क्या महिलाओं के खिलाफ नहीं है? इससे अपराधियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा क्या?”

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही रवैया रहा, तो राज्य में बेटियाँ और अधिक असुरक्षित हो जाएँगी।

🕊️ धर्मांतरण पर हाई कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

चम्पाई सोरेन ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए कहा—

“जो व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है, वह दलित या आदिवासी नहीं रह जाता। क्योंकि ईसाई धर्म जाति व्यवस्था को मान्यता नहीं देता है। सुप्रीम कोर्ट भी पहले ऐसा ही कह चुका है।”

उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के बाद यदि कोई चर्च में धार्मिक क्रियाएँ कर रहा है, तो वह पारंपरिक आदिवासी जीवनशैली से बाहर हो चुका है।

“हम पाहन, मांझी, पड़हा की व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। कोई भी अपने धर्म में रहें, लेकिन संविधान में आदिवासियों को मिले आरक्षण में अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा।”

🧾 कांग्रेस से माफी की माँग, सरना धर्म कोड पर दोहरा चरित्र

चम्पाई सोरेन ने कांग्रेस पार्टी पर आदिवासी समाज के साथ छल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 1961 की जनगणना से सरना धर्म कोड हटाने की जिम्मेदार कांग्रेस थी।

“आज कांग्रेस आदिवासी धर्म के लिए प्रदर्शन कर रही है, लेकिन इतिहास में इन्हीं के शासन में आदिवासी पहचान को मिटाया गया। आदिवासी समाज को धोखा देने के लिए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को सार्वजनिक रूप से माफी माँगनी चाहिए।”

उन्होंने दावा किया कि यदि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा सरकार नहीं होती, तो झारखंड राज्य का गठन कभी नहीं हो पाता।

📌 विशेष बिंदु:

  • चम्पाई सोरेन ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए स्पेशल टास्क फोर्स का स्वागत किया।
  • झारखंड सरकार पर महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
  • धर्मांतरण के बाद आरक्षण लाभ लेने को ‘अवैध अतिक्रमण’ करार दिया।
  • कांग्रेस को आदिवासी धर्म कोड के मुद्दे पर माफी माँगने की सलाह दी।

🔍 निष्कर्ष:

पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन की यह प्रेस वार्ता आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों की झलक देती है। आदिवासी अस्मिता, महिला सुरक्षा और घुसपैठ जैसे मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। चम्पाई सोरेन ने जिस आक्रामक लहजे में राज्य सरकार को घेरा है, वह झारखंड की राजनीति में आगामी संघर्षों की भूमिका तय करता है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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