
यह हेडलाइन आजकल सोशल मीडिया और अख़बारों में खूब सुर्खियां बटोर रही है और पुरानी गाड़ी रखने वालों की धड़कनें बढ़ा रही है। लेकिन क्या वाकई आपकी पुरानी गाड़ी रातों-रात कबाड़ (Scrap) बन जाएगी? जवाब है: नहीं, लेकिन… इसके पीछे का पूरा गणित और चालाकी समझना ज़रूरी है।

आइए इस डर की पूरी सच्चाई को डिकोड करते हैं: इन दिनों सोशल मीडिया और कुछ खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि E20 और E85 पेट्रोल आने के बाद पुरानी गाड़ियां चलना बंद कर देंगी और कबाड़ बन जाएंगी। इस तरह की खबरों से लाखों वाहन मालिकों के मन में चिंता पैदा हो गई है।
लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार, E20 या E85 पेट्रोल डालते ही कोई भी पुरानी गाड़ी अचानक खराब नहीं होती। हालांकि लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर कुछ तकनीकी समस्याएं जरूर आ सकती हैं।
क्या है E20 और E85 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। वहीं E85 में 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है ताकि पेट्रोल के आयात पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण भी घटे।
क्या पुरानी गाड़ी तुरंत खराब हो जाएगी?
इसका जवाब है – नहीं।
तुरंत कुछ नहीं होगा: ऐसा नहीं है कि आपने पेट्रोल पंप से E20 पेट्रोल डलवाया और गाड़ी वहीं खड़ी-खड़ी कबाड़ हो गई। गाड़ी चलेगी, और शुरुआत में आपको कोई अंतर भी महसूस नहीं होगा। यदि आप अपनी पुरानी कार या बाइक में E20 पेट्रोल भरवाते हैं तो गाड़ी सामान्य रूप से चलेगी। इंजन तुरंत खराब नहीं होगा और न ही वाहन अचानक बंद हो जाएगा।
लेकिन लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल करने पर कुछ दिक्कतें आ सकती हैं।
समस्या कहां है?
इथेनॉल की एक खासियत यह है कि वह हवा से नमी यानी पानी को अपनी ओर खींचता है। पुरानी गाड़ियों में अक्सर लोहे के फ्यूल टैंक और रबर की पाइपें लगी होती हैं। समय के साथ इथेनॉल मिश्रित ईंधन इनमें जंग और घिसावट पैदा कर सकता है।
इससे:
- फ्यूल टैंक में जंग लग सकती है।
- रबर पाइप कमजोर हो सकते हैं।
- फ्यूल फिल्टर जल्दी गंदा हो सकता है।
- इंजन की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है।
हालांकि यह नुकसान धीरे-धीरे होता है, तुरंत नहीं।
आपकी गाड़ी कबाड़ होने से बचाने के लिए तीन रास्ते हैं:
- मार्केट में अभी भी ‘नॉर्मल’ पेट्रोल मिलेगा: सरकार भले ही E20 और E85 को बढ़ावा दे रही है, लेकिन देश में करोड़ों पुरानी गाड़ियों को देखते हुए बहुत से पेट्रोल पंपों पर E10 (10% इथेनॉल) या शुद्ध पेट्रोल (Premium/Speed/Power) का विकल्प लंबे समय तक उपलब्ध रहेगा।
- इथेनॉल कनवर्टर किट (Retrofitting Kits): जैसे लोग पहले पेट्रोल गाड़ी में सीएनजी (CNG) किट लगवाते थे, वैसे ही अब मार्केट में Flex-Fuel Conversion Kits आने लगी हैं। इसे गाड़ी में लगवाने के बाद आपकी पुरानी गाड़ी के पाइप और सेंसर इथेनॉल को झेलने के लायक हो जाते हैं।
- नियमित सर्विसिंग: अगर आप पुरानी गाड़ी में यह पेट्रोल इस्तेमाल कर भी रहे हैं, तो फ्यूल फिल्टर को जल्दी-जल्दी साफ करवाना और गाड़ी को कई दिनों तक बिना चलाए न छोड़ना एक बढ़िया देसी जुगाड़ है।
पुरानी गाड़ियों के लिए क्या विकल्प हैं?
वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। कई उपाय मौजूद हैं।
1. सामान्य पेट्रोल का उपयोग
देश में अभी भी बड़ी संख्या में पुरानी गाड़ियां चल रही हैं। इसलिए कई जगहों पर कम इथेनॉल मिश्रण वाला पेट्रोल उपलब्ध रहने की संभावना है।
2. कन्वर्जन किट
बाजार में ऐसी किट उपलब्ध हो रही हैं जो वाहन को इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए बेहतर बनाती हैं। इन्हें लगवाने से वाहन के कुछ हिस्से अधिक सुरक्षित हो सकते हैं।
3. नियमित सर्विसिंग
फ्यूल फिल्टर की समय-समय पर सफाई, पाइपों की जांच और नियमित सर्विसिंग से संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
असली खेल: स्क्रैपेज पॉलिसी (Scrappage Policy)
बहुत से लोग E20 पेट्रोल और स्क्रैपेज पॉलिसी को एक ही बात मान लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं। सरकार के नियमों के अनुसार 15 साल से पुरानी कारों और निर्धारित आयु पूरी कर चुकी कुछ अन्य गाड़ियों को फिटनेस टेस्ट देना पड़ता है।
यदि वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल हो जाता है, तभी उसे कबाड़ घोषित किया जा सकता है। केवल E20 पेट्रोल के कारण किसी गाड़ी को कबाड़ नहीं माना जाता।
E20 और E85 पेट्रोल आने से आपकी पुरानी गाड़ी रातों-रात कबाड़ नहीं होने वाली है। हां, पुरानी गाड़ियों में लंबे समय तक ऐसे ईंधन के इस्तेमाल से कुछ तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं, इसलिए वाहन मालिकों को थोड़ी सावधानी और नियमित देखभाल की जरूरत होगी।
कुल मिलाकर डरने की नहीं, बल्कि सही जानकारी रखने और समय पर गाड़ी की सर्विस कराने की जरूरत है।










