आदित्यपुर : श्रीनाथ विश्वविद्यालय में दिनांक 17 दिसंबर 2025 को नौवें अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव की मुख्य अतिथि ईचागढ़ की विधायक श्रीमती सविता महतो रहीं।
महोत्सव का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके उपरांत श्रीनाथ विश्वविद्यालय का कुलगीत गाया गया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती सविता महतो ने कहा कि हिंदी जन-जन की भाषा होने के साथ-साथ देश को जोड़ने वाली भाषा भी है। आज भारत के सभी वर्गों और समुदायों के लोग, चाहे वे देश के किसी भी राज्य से हों, हिंदी अवश्य बोलते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुखदेव महतो के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा वर्षों से इस क्षेत्र में जिस प्रकार हिंदी विषय को समर्पित महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, वह अत्यंत प्रशंसनीय है।
श्रीनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सुखदेव महतो ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने महोत्सव में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षाविदों, प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय श्रीनाथ हिंदी महोत्सव की सफलता आप सभी की सहभागिता से ही सुनिश्चित होती है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप मे उपस्थित जियाडा के उपनिदेशक श्री दिनेश रंजन ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय चेतना का वाहक है और श्रीनाथ विश्वविद्यालय में आयोजित यह हिंदी महोत्सव नई पीढ़ी को हिंदी भाषा से जोड़ने की प्रेरणा देता है। हिंदी देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों को जोड़ने वाली भाषा है
महोत्सव में सहायक प्राध्यापक श्रीमती रचना रश्मि ने विषय-प्रवेश प्रस्तुत करते हुए महोत्सव की महत्ता पर प्रकाश डाला।
महोत्सव के प्रथम दिन चिंतन-मनन सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दिल्ली से डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. रेनू यादव तथा शिकागो से अंतर्राष्ट्रीय वक्ता डॉ. श्वेता सिन्हा ने सहभागिता की। सत्र की समन्वयक सहायक प्राध्यापक श्रीमती रचना रश्मि एवं श्रीमती शिवांगी रहीं।
सत्र का विषय था – “आधुनिक हिंदी साहित्य : युवा एवं नई दृष्टि”।
चिंतन-मनन सत्र में डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र से पूछा गया कि हिंदी साहित्य में युवा दृष्टि से वे क्या समझते हैं? उत्तर में उन्होंने कहा कि पहले सोशल मीडिया का अभाव था, जिससे रचनाओं का प्रकाशन कठिन होता था, किंतु आज सोशल मीडिया के माध्यम से युवा अपनी रचनाएँ सहजता से पाठकों तक पहुँचा पा रहे हैं।
डॉ. रेनू यादव से प्रश्न पूछा गया कि भविष्य के हिंदी साहित्य को दिशा देने में युवाओं की क्या भूमिका हो सकती है? उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी कॉस्मोपॉलिटन संस्कृति की देन है और हिंदी के साथ अंग्रेजी के मिश्रित प्रयोग को अपनाती है, जिसे स्वीकार करना आवश्यक है।
डॉ. श्वेता सिन्हा से हिंदी कविता में युवाओं की आकांक्षाओं और संघर्षों को लेकर प्रश्न किया गया। उन्होंने कहा कि युवा लेखक अब प्रयोगधर्मी हो रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है, किंतु उन्हें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। आज का युवा लेखक गाँव, जमीन, जंगल, गलियाँ, दलित विमर्श जैसे विविध विषयों पर लेखन कर रहा है।
युवा रचना प्रक्रिया पर बात करते हुए डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि युवाओं को आम के पेड़ की तरह विकसित होना चाहिए, गेहूं के पौधे की तरह नहीं, क्योंकि आम का पेड़ देर से फल देता है लेकिन वर्षों तक फल देता है।
डॉ. रेनू यादव से जब आधुनिक हिंदी साहित्य में नारी दृष्टि और युवा चेतना के संबंध पर प्रश्न किया गया, तो उन्होंने कहा कि नारी दृष्टि आज कई बार कट्टरवादी सोच से जुड़ती जा रही है। गाँव और छोटे शहरों की महिला लेखिकाएँ जहाँ ज़मीनी और हाशिए से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं, वहीं शहरी लेखिकाओं के लेखन में कट्टरता की झलक देखने को मिल रही है।
महोत्सव के प्रथम दिन जिन विद्यालयों एवं महाविद्यालयों ने सहभागिता की, उनमें प्रमुख रूप से डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय, श्रीराम इंटर कॉलेज, स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ एजुकेशन, द ग्रेजुएट स्कूल कॉलेज फॉर वूमेन जमशेदपुर, मधुसूदन महतो टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, एमबीएस इंटर इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, अब्दुल बारी मेमोरियल कॉलेज गोलमुरी, आर्का जैन विश्वविद्यालय, अल हफीज कॉलेज, आरा नर्सिंग महाविद्यालय, टाटा मुख्य अस्पताल, जीसी जैन कॉमर्स कॉलेज चाईबासा, कोल्हान विश्वविद्यालय महिला कॉलेज चाईबासा, पांडेश्वर कॉलेज, रंभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन, गीतीलता एसपीएम कॉलेज, बिहार शरीफ (नालंदा), राजकीय पॉलिटेक्निक भागा धनबाद, करीम सिटी कॉलेज, साक्षी करीम सिटी बी.एड कॉलेज मांगो, संदीप विश्वविद्यालय मधुबनी (बिहार) आदि सम्मिलित रहे।
महोत्सव के प्रथम दिवस के अंतर्गत हास्य कवि सम्मेलन, मुखड़े पर मुखड़ा, दीवार सज्जा, व्यक्तित्व झांकी, नुक्कड़ नाटक, मुद्दे हमारे विचार आपके, साहित्यिक कृति, शब्द संग्राम आदि प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। साथ ही प्रश्नोत्तरी एवं रेडियो श्रीनाथ का प्रथम चरण भी संचालित हुआ।
प्रथम दिवस में निर्णायक के रूप में शशि भूषण सिंह, बृजेश सिंह, जयकांत सिंह, श्रीमती रचना महतो, श्री अशोक मैती, श्री शैलेन्द्र अस्थाना, श्री दीपक कुमार दीप, श्रीमती क्षमता त्रिपाठी, श्री गुरुचरण महतो, मोहम्मद सरताज आलम, श्री संदीप सावरन, श्री आर.के. मिश्रा, श्रीमती छवि दास, श्री संजय भारती, श्री अनुप सिन्हा, सुश्री सुमन प्रसाद सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
महोत्सव मे प्रथम दिवस कोल्हान विश्वविद्यालय के एन एस एस समन्वयक श्री दारा सिंह तथा विभिन्न महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि उपस्थित हुए। सभी अतिथियों का स्वागत स्मृति चिन्ह देकर किया गया।
इस प्रकार श्रीनाथ विश्वविद्यालय में नौवें अंतर्राष्ट्रीय हिंदी महोत्सव के प्रथम दिवस का आयोजन अत्यंत सफल एवं साहित्यिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।












