मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

जमशेदपुर के श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में पाली जाएंगी मिनियेचर Nano गायें, गोसेवा क्षेत्र बनाने की तैयारी

810c92dedce0cbe5e9d700a4ea327a2e
On: March 16, 2026 12:17 AM
Follow Us:
Nano
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

जमशेदपुर। शहर के केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में जल्द ही गोसेवा की एक अनोखी पहल शुरू होने जा रही है। मंदिर परिसर में एक विशेष गोसेवा क्षेत्र बनाया जाएगा, जहां मिनिएचर काउ यानी Nano काउ का पालन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य गोसेवा को बढ़ावा देना और लोगों को दुर्लभ नस्ल की गायों के बारे में जानकारी देना है। यह जानकारी जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy ने दी।

A 2

विधायक सरयू राय ने बताया कि यह Nano काउ आंध्र प्रदेश से लाई गई हैं। मंदिर के समीप रहने वाले एक सज्जन ने इन गायों को मंगवाया है और प्रेमवश उन्हें मंदिर परिसर में लोगों को दिखाने के लिए लेकर आए थे। जब मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने इन गायों को देखा तो सभी को यह पहल काफी अच्छी लगी। इसके बाद मंदिर परिसर में ही Nano काउ पालन करने का निर्णय लिया गया।

सरयू राय ने कहा कि आमतौर पर इन Nano काउ की ऊंचाई लगभग डेढ़ फुट होती है। आकार में छोटी होने के बावजूद ये Nano गायें नियमित रूप से करीब एक लीटर दूध देती हैं। इनका स्वभाव शांत और पालन-पोषण भी अपेक्षाकृत आसान होता है। यही कारण है कि कई स्थानों पर इन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ पाला जाता है।

उन्होंने बताया कि देश में इस नस्ल की Nano गायें मुख्य रूप से Punganur क्षेत्र और Vechoor में पायी जाती हैं। यह भारत की दुर्लभ और पारंपरिक नस्लों में से एक मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन गायों का दूध भी पोषण से भरपूर होता है और कई लोग इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।

मंदिर परिसर में बनने वाले गोसेवा क्षेत्र में इन Nano काउ के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। यहां उनके रहने, खाने और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए उचित प्रबंध किए जाएंगे। साथ ही मंदिर आने वाले श्रद्धालु भी इन गायों को देख सकेंगे और गोसेवा में भाग ले सकेंगे। इससे मंदिर परिसर का धार्मिक वातावरण और भी समृद्ध होगा।

THE NEWS FRAME

मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि यह पहल सिर्फ गोपालन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि लोगों में पारंपरिक भारतीय पशुपालन और गोसंरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी। मंदिर में आने वाले बच्चे और युवा भी इन Nano गायों को देखकर भारतीय नस्लों के महत्व को समझ सकेंगे।

स्थानीय लोगों में भी इस पहल को लेकर काफी उत्साह है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में Nano काउ का पालन शुरू होने से यह स्थान एक आकर्षण का केंद्र बन सकता है। कई श्रद्धालु और पर्यटक भी इन छोटी Nano गायों को देखने के लिए यहां आ सकते हैं।

धार्मिक दृष्टि से भी Nano गाय को भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान दिया गया है। ऐसे में मंदिर परिसर में गोसेवा का यह प्रयास श्रद्धालुओं के लिए आस्था और सेवा दोनों का अवसर प्रदान करेगा। इससे समाज में गोसंरक्षण के प्रति सकारात्मक संदेश भी जाएगा।

विधायक सरयू राय ने कहा कि भविष्य में इस गोसेवा क्षेत्र को और विकसित करने की योजना है। यहां Nano गायों की संख्या बढ़ाने और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इसके साथ ही मंदिर समिति और स्थानीय लोगों की मदद से इस पहल को सफल बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

कुल मिलाकर, केबुल टाउन स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में Nano काउ पालन की यह पहल धार्मिक आस्था, गोसेवा और पारंपरिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक अनोखा और प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह स्थान श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

और पढ़ें

Golu Bhai

आदित्यपुर बस्ती की रहस्यमयी मौत,आखिर कब मिलेगा गरीब परिवार की बेटी को न्याय

Untitled Design 62

रक्षा मंत्री ने सीतापुर में 250 मेगावाट सौर Energy परियोजना को दी मंजूरी रक्षा भूमि पर बनेगी देश की पहली सोलर-बीईएसएस परियोजना

Untitled Design 61

प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना से मातृ स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल को मिली नई मजबूती लाखों महिलाओं को मिला लाभ

Untitled Design 60

सैपलिंग संवाद-2026 का अहमदाबाद में शुभारंभ Food प्रसंस्करण के जरिए रोजगार और सतत विकास पर जोर

Untitled Design 58

धरती आबा भगवान Birsa मुंडा जनजातीय अस्मिता स्वाभिमान और स्वतंत्रता चेतना के अमर प्रतीक

Untitled Design 57

World Ocean Day पर पुनीत सागर अभियान 2026 के तहत एनसीसी कैडेट्स ने चलाया नदी सफाई अभियान दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

Leave a Comment

Link copied