मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

Telegram Ban in India टेलीग्राम पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अवैध कंटेंट फैलाने के आरोप क्यों लगे? जानिए पूरा मामला

On: June 18, 2026 7:09 PM
Follow Us:

भारत: लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम Telegram एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। NEET-UG 2026 री-एग्जामिनेशन से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। सरकार का आरोप है कि टेलीग्राम अब केवल एक मैसेजिंग प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि यह साइबर अपराधियों, हैकरों और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल गिरोहों के लिए सुरक्षित मंच बन चुका है। वहीं टेलीग्राम कंपनी का कहना है कि सरकार का फैसला मनमाना है और इससे करोड़ों आम यूजर्स प्रभावित हो रहे हैं।

Telegram पर अस्थायी बैन क्यों लगाया गया?

---Advertisement---
Netaji Advertisement

केंद्र सरकार ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया। सरकार का कहना है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि मई 2026 से लगातार कंपनी के साथ बातचीत चल रही थी।

सरकार के मुताबिक उसे लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं जिनमें टेलीग्राम का इस्तेमाल पेपर लीक, साइबर फ्रॉड, डेटा चोरी और आपत्तिजनक सामग्री फैलाने के लिए किया जा रहा था। इन शिकायतों के बाद सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया।

सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?

दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार के पास टेलीग्राम के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यह कार्रवाई किसी जल्दबाजी में नहीं की गई, बल्कि कई महीनों तक कंपनी के साथ बातचीत और जांच के बाद फैसला लिया गया।

सरकार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम जरूरी था।

टेलीग्राम पर सरकार के बड़े आरोप

1. चाइल्ड पोर्नोग्राफी का प्रसार

सरकार का सबसे गंभीर आरोप यह है कि टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स के माध्यम से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और अन्य अवैध सामग्री साझा की जा रही है।

सरकार के अनुसार ऐसे कंटेंट को हटाने में प्लेटफॉर्म पर्याप्त तेजी नहीं दिखा रहा है, जिससे अपराधियों का मनोबल बढ़ रहा है।

2. साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी

सरकार ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि टेलीग्राम के माध्यम से ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी आई है।

फर्जी बैंक अधिकारी, निवेश योजनाएं, लोन ऐप और फेक जॉब ऑफर के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही है। इसके लिए नकली पहचान और फर्जी चैनलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

3. डेटा लीक और निजी जानकारी की बिक्री

हलफनामे में दावा किया गया है कि टेलीग्राम बॉट्स के जरिए भारतीय नागरिकों की निजी जानकारी जैसे मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, आधार से जुड़ी जानकारियां और अन्य संवेदनशील डेटा अवैध रूप से साझा किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां देश की साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।

4. पेपर लीक का बड़ा नेटवर्क

सरकार ने आरोप लगाया कि NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र और उत्तर टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से वायरल किए जाते हैं।

इसी कारण NEET-UG 2026 री-एग्जामिनेशन से पहले प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया ताकि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे।

5. आतंकवादी प्रचार और अफवाहें

सरकार ने कोर्ट में यह भी कहा कि कुछ आतंकी संगठन और कट्टरपंथी समूह टेलीग्राम का इस्तेमाल हिंसा भड़काने, अफवाह फैलाने और युवाओं को गुमराह करने के लिए कर रहे हैं।

एन्क्रिप्शन और निजी चैनलों के कारण सुरक्षा एजेंसियों को इन गतिविधियों पर नजर रखने में कठिनाई होती है।

Telegram को ‘नया डार्क वेब’ क्यों कहा जा रहा है?

केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में टेलीग्राम को अपराधियों के लिए “नया डार्क वेब” बताया है।

सरकार का कहना है कि जिस तरह डार्क वेब पर अवैध गतिविधियां गुप्त रूप से संचालित होती हैं, उसी तरह टेलीग्राम के निजी चैनलों और बॉट्स का इस्तेमाल भी गैरकानूनी कार्यों के लिए तेजी से बढ़ रहा है।

साइबर अपराधी, हैकर समूह, डेटा चोर और संगठित अपराधी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए कर रहे हैं।

टेलीग्राम का पक्ष क्या है?

टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती देते हुए कहा है कि कंपनी भारतीय अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है।

कंपनी के वरिष्ठ वकील ध्रुव मेहता ने कोर्ट में कहा कि सरकार द्वारा बताए गए कई चैनलों को पहले ही ब्लॉक किया जा चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

टेलीग्राम का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने जैसा कदम करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित करता है और यह एक प्रकार का “ब्लैंकेट बैन” है।

क्या भारत में टेलीग्राम हमेशा के लिए बैन हो सकता है?

यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार अदालत में यह साबित कर देती है कि प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय सुरक्षा, बच्चों की सुरक्षा और साइबर अपराध रोकने में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रहा है, तो भविष्य में और सख्त कार्रवाई संभव हो सकती है।

हालांकि अंतिम फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।

देश की सुरक्षा बनाम डिजिटल स्वतंत्रता की बहस

टेलीग्राम विवाद ने एक नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध और बच्चों की सुरक्षा का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर डिजिटल अधिकारों के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इंटरनेट एक्सेस से जुड़ा मामला बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपराध रोकना जरूरी है, लेकिन साथ ही आम उपयोगकर्ताओं के हितों और डिजिटल अधिकारों का संतुलन भी बनाए रखना आवश्यक है।

Telegram पर लगे आरोप केवल साइबर अपराध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी, डेटा लीक, पेपर लीक, ऑनलाइन ठगी और आतंकी प्रचार जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि प्लेटफॉर्म अपराधियों के लिए सुरक्षित नेटवर्क बनता जा रहा है, जबकि टेलीग्राम इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को सहयोगी बता रहा है।

अब इस पूरे मामले पर देश की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत का फैसला न केवल टेलीग्राम के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और इंटरनेट गवर्नेंस के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

---Advertisement---
Netaji Advertisement
---Advertisement---
Netaji Advertisement

Leave a Comment