
जमशेदपुर: कालाझोर पंचायत, हेंदैलझुरी, घाटशिला (जमशेदपुर) के मुरली पैरामेडिकल कॉलेज एवं मुरली इंटर कॉलेज में Fire fighting यंत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम ने छात्रों और शिक्षकों को आपात स्थिति से निपटने की कला सिखाई। Fire fightingविभाग के विशेषज्ञों ने आग से बचाव के व्यावहारिक उपाय बताए। यह आयोजन सुरक्षा जागरूकता को मजबूत करने का शानदार प्रयास था।

Fire fighting कार्यक्रम का स्थान और संचालन
मुरली पैरामेडिकल कॉलेज और मुरली इंटर कॉलेज कालाझोर पंचायत में स्थित हैं, जो घाटशिला क्षेत्र के युवाओं को पैरामेडिकल और इंटरमीडिएट शिक्षा प्रदान करते हैं। प्रशिक्षण Fire fighting विभाग के अधिकारी रामआशीष राम और उपनिरीक्षक अजय यादव ने संचालित किया। उन्होंने आग लगने की विभिन्न स्थितियों में बचाव के तरीके सिखाए।
कार्यक्रम में Fire fighting यंत्रों के प्रकार, उनका सही उपयोग और प्रायोगिक डेमो शामिल था। छात्रों को हाथों-हाथ अभ्यास कराया गया, ताकि वे आत्मविश्वास से आपदा का सामना कर सकें। यह ग्रामीण क्षेत्र में दुर्लभ लेकिन अत्यंत उपयोगी पहल थी।
Fire fighting यंत्रों के प्रकार और उपयोग
Fire fighting यंत्र कई प्रकार के होते हैं—जैसे पानी आधारित, फोम, CO2 और ड्राई पाउडर। प्रत्येक का उपयोग आग के प्रकार पर निर्भर करता है: कागज-लकड़ी के लिए पानी, बिजली की आग के लिए CO2। प्रशिक्षण में बताया गया कि PASS तकनीक का पालन करें—पुल पिन, एइम लो, स्क्वीज लिवर, स्वीप नोजल।
प्रायोगिक सत्र में प्रतिभागियों ने वास्तविक आग बुझाई। इससे सैद्धांतिक ज्ञान व्यावहारिक बन गया। घरों, स्कूलों में ऐसी ट्रेनिंग जरूरी है।

आग से बचाव के प्रमुख उपाय
- आग लगने पर पहले अलार्म बजाएं।
- निकास मार्ग साफ रखें।
- छोटी आग पर ही यंत्र इस्तेमाल करें, बड़ी पर भागें।
- धुंए से बचाव के लिए गीला कपड़ा मुंह पर रखें।
ये साधारण टिप्स जानलेवा साबित हो सकते हैं।
प्राचार्या और अतिथिगण
प्राचार्या डॉ. नूतन रानी ने कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण छात्रों को सतर्क बनाते हैं। डॉ. अपूर्वा बिक्रम, सुदीप दत्ता, पितांबर सोरेन, टीना, तनिषा कर, करण मार्डी, संदीप मुंडा, चूड़ामणि मुर्मू, नमिता बेरा, मिताली नमता, निखिल लोहार, दर्शन मगर, प्रशांत कुमार प्रधान, पिंकी, अर्चना कुमारी, आलोक, विशाल, आर्यन, वर्धन, स्नेहा और नैतिक मिश्रा सहित कई शिक्षक-छात्र उपस्थित रहे।
डॉ. नूतन रानी का मानना है कि शिक्षा के साथ सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य। सभी ने इसे ज्ञानवर्धक बताया।
मुरली संस्थानों का योगदान
मुरली पैरामेडिकल कॉलेज स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रशिक्षण पर केंद्रित है। मुरली इंटर कॉलेज 11वीं-12वीं की पढ़ाई कराता है। घाटशिला जैसे क्षेत्र में ये संस्थान ग्रामीण युवाओं का भविष्य संवारते हैं। Fire fighting जैसे कार्यक्रम उनकी प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
ऐसे आयोजन छात्रों को व्यावसायिक कौशल देते हैं। पैरामेडिकल छात्रों के लिए विशेष उपयोगी।

जमशेदपुर-घाटशिला क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियां
घाटशिला औद्योगिक और ग्रामीण इलाका है, जहां आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं। घरों में गैस चूल्हा, स्कूलों में लैब—हर जगह खतरा। प्रशिक्षण से जागरूकता बढ़ेगी। स्थानीय Fire fighting विभाग की भूमिका सराहनीय।
सरकार और एनजीओ ऐसे कार्यक्रम बढ़ाएं। हर पंचायत में सालाना ट्रेनिंग हो।
सुरक्षा जागरूकता के अन्य उपाय
- स्कूलों में फायर ड्रिल नियमित।
- घरों में स्मोक डिटेक्टर लगाएं।
- विद्यार्थियों को प्राथमिक चिकित्सा सिखाएं।
ये कदम जान बचाएंगे।
कार्यक्रम का प्रभाव और भविष्य
प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास हासिल किया। प्राचार्या ने भविष्य में ऐसे और कार्यक्रमों की योजना बनाई। छात्र अब घरवालों को भी सिखाएंगे। यह चेन रिएक्शन सुरक्षा को फैलाएगा।
मुरली कॉलेज जैसी संस्थाओं को बधाई। शिक्षा के साथ सुरक्षा का संदेश दें।
Fire fighting यंत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम ने मुरली कॉलेज को सुरक्षा का मजबूत किला बना दिया। रामआशीष राम और अजय यादव की मेहनत सराहनीय। छात्र अब तैयार हैं किसी भी चुनौती के लिए। सुरक्षा ही जीवन का आधार—इसे अपनाएं।
इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्या डॉ. नूतन रानी, डॉ. अपूर्वा बिक्रम सहित सुदीप दत्ता, पितांबर सोरेन, टीना, तनिषा कर, करण मार्डी, संदीप मुंडा, चूड़ामणि मुर्मू, नमिता बेरा, मिताली नमता, निखिल लोहार, दर्शन मगर, प्रशांत कुमार प्रधान, पिंकी , अर्चना कुमारी, आलोक, विशाल, आर्यन, वर्धन, स्नेहा एवं नैतिक मिश्रा सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्राचार्या डॉ. नूतन रानी ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, जिससे वे किसी भी आपात स्थिति में सतर्क एवं सक्षम बन सकें। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया।











