
चक्रधरपुर: के पद्मावती जैन Saraswati शिशु विद्या मंदिर में नवीन सत्र की पहली अभिभावक गोष्ठी ने अभिभावकों और शिक्षकों को एक मंच पर ला खड़ा किया। 18 अप्रैल 2026 को वंदना सभागार में आयोजित इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना था। यह आयोजन स्कूल की सक्रियता को दर्शाता है।

Saraswati विद्यालय का परिचय और स्थान
पद्मावती जैन Saraswati शिशु विद्या मंदिर इंग्लिश मीडियम पंपरोड, शत्रुघ्न नगर, चक्रधरपुर में स्थित है। 1992 में स्थापित यह को-एडुकेशनल स्कूल कक्षा 1 से 10 तक शिक्षा प्रदान करता है। पश्चिमी सिंहभूम जिले में यह Saraswati शिशु मंदिर परंपरा का हिस्सा है, जो भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का संगम है।
स्कूल नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करता है, जैसे हिंदू नव वर्ष पर भव्य प्रभात फेरी। प्रधानाचार्य आनंद चंद्र प्रधान के नेतृत्व में यह संस्था बच्चों के चरित्र निर्माण पर जोर देती है।

गोष्ठी का शुभारंभ और अतिथिगण
गोष्ठी वंदना सभागार में शुरू हुई, जहां दीप प्रज्ज्वलन और पुष्प अर्पण से शुभारंभ हुआ। अभिभावक प्रतिनिधि रामाय बानरा, अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष दमयंती नाग, सहप्रांत कार्यवाह मोहन कच्छप, वार्ड पार्षद रवि कुमार बाँकिरा और प्रधानाचार्य आनंद चंद्र प्रधान ने संयुक्त रूप से यह कार्य किया।
प्रधानाचार्य ने अतिथियों का परिचय कराया और नवीन सत्र की प्रस्तावना रखी। सभी आचार्य दीदियों का परिचय भी कराया गया। 100 से अधिक अभिभावक उपस्थित रहे।
शैक्षिक व्यवस्था और अभिभावकों को निर्देश
प्रधानाचार्य ने शैक्षिक व्यवस्था की जानकारी दी। अभिभावकों से विशेष आग्रह किया कि बच्चों को घर का बना भोजन दें और भोजन पर ध्यान रखें। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन पर जोर दिया गया।
स्कूल का मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास है—शारीरिक, मानसिक और नैतिक। अभिभावकों को दिशा-निर्देशों का पालन करने का आह्वान किया।

भोजन और स्वास्थ्य पर फोकस
घर का बना भोजन देने से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। Saraswati स्कूल ऐसी गोष्ठियों से अभिभावक-शिक्षक सहयोग बढ़ाता है। यह छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है।
अभिभावक प्रतिनिधियों के संदेश
अभिभावक प्रतिनिधि रामाय बानरा ने कहा कि विद्यालय के दिशा-निर्देशों का पालन सभी का कर्तव्य है। मोहन कच्छप ने अभिभावकों की उपस्थिति की सराहना की और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्कूल के साथ सहयोग का आग्रह किया।
ये संदेश अभिभावकों को प्रेरित करने वाले थे। स्कूल-घर का साझा प्रयास सफलता की कुंजी है।
कार्यक्रम का सफल संचालन
कार्यक्रम को सफल बनाने में जयश्री दास, शांति देवी, मीना कुमारी, सौभिक घटक, भारती कुमारी, स्वास्तिक सोय, सुलेखा टुडू का योगदान सराहनीय रहा। सरस्वती शिशु मंदिर की परंपरा में ऐसी गोष्ठियां नियमित होती हैं।
Saraswati शिशु मंदिर शिक्षा पद्धति
Saraswati शिशु विद्या मंदिर भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा देते हैं। इंग्लिश मीडियम होने से आधुनिकता का पुट। अभिभावक गोष्ठियां परीक्षा परिणाम और प्रगति पर चर्चा का माध्यम।
चक्रधरपुर क्षेत्र में यह स्कूल गुणवत्ता के लिए जाना जाता। नवीन सत्र में लक्ष्य ऊंचा रखा गया।

सर्वांगीण विकास के उपाय
ये तत्व बच्चों को मजबूत बनाते हैं।
अभिभावक गोष्ठी का महत्व
ऐसी गोष्ठियां अभिभावक-शिक्षक संवाद बढ़ाती हैं। समस्याओं का त्वरित समाधान। बच्चों के भविष्य के लिए आवश्यक। झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल है।
चक्रधरपुर शिक्षा परिदृश्य
चक्रधरपुर पश्चिमी सिंहभूम का महत्वपूर्ण शहर। कई स्कूल संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देते। पी जे Saraswati शिशु मंदिर इसमें अग्रणी। स्थानीय समुदाय का सहयोग मिलता।















