
जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu राय ने एक कथित वीडियो पत्रकार द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोपों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस मामले में बिष्टुपुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि बिना किसी प्रमाण के किसी व्यक्ति की छवि खराब करने का प्रयास लोकतंत्र और पत्रकारिता दोनों के लिए घातक है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि यदि आरोप लगाने वाला व्यक्ति अपने दावों के समर्थन में सबूत प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

एक माह से लगाए जा रहे हैं आधारहीन आरोप
Saryu राय ने जारी बयान में कहा कि पिछले लगभग एक महीने से एक छद्म वीडियो पत्रकार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए लगातार उन पर अनर्गल, तथ्यहीन और भ्रामक आरोप लगा रहा है। इतना ही नहीं, उनकी तस्वीरों का उपयोग कर उन्हें ऐसे विषयों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है जिनका उनसे कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह व्यक्ति परोक्ष रूप से उन्हें निशाना बना रहा था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसने सीधे तौर पर उन पर हमला करना शुरू कर दिया। अधूरी जानकारी और बिना किसी तथ्यात्मक आधार के लगातार किए जा रहे इस प्रचार ने अब सारी सीमाएं पार कर दी हैं, जिसके बाद उन्होंने कानूनी कदम उठाने का निर्णय लिया।
बिष्टुपुर थाना में दर्ज कराई गई शिकायत
विधायक Saryu राय ने बताया कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत बिष्टुपुर थाना में दर्ज करा दी है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि शिकायत के आधार पर संबंधित व्यक्ति से उसके आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण मांगे जाएं। यदि वह प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो उसके विरुद्ध चरित्र हनन, झूठी जानकारी फैलाने और साजिश के तहत दुष्प्रचार करने के आरोप में आपराधिक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की छूट नहीं दी जा सकती।
पहले भी कई बार लगाए गए हैं झूठे आरोप
Saryu राय ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन पर निराधार आरोप लगाए गए हों। उन्होंने कहा कि जब-जब उन्होंने भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनहित से जुड़े गंभीर मामलों को उठाया है, तब-तब कुछ स्वार्थी तत्वों ने उन्हें बदनाम करने की कोशिश की है।
उनके अनुसार कई बार राजनीतिक कारणों और निजी हितों के चलते कुछ लोग दूसरों को आगे कर उनके खिलाफ झूठे बयान दिलवाते रहे हैं। लेकिन जब उनसे प्रमाण मांगा जाता है तो वे चुप्पी साध लेते हैं या फिर बहाने बनाकर बचने की कोशिश करते हैं।
न्यायालय में भी मिल चुका है सच का साथ
सरयू राय ने अपने बयान में कहा कि अतीत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां अदालत में सच्चाई सामने आई और झूठे आरोप लगाने वालों को जवाब देना पड़ा। कुछ मामलों में संबंधित लोगों ने अपनी वेबसाइट हैक होने जैसी दलीलें देकर बचने की कोशिश की, लेकिन अंततः सच्चाई सामने आई।
उन्होंने कहा कि झूठे प्रचार के माध्यम से किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
सुबूत है तो सामने रखें नहीं तो माफी मांगें
विधायक सरयू राय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति को सवाल पूछने और आरोप लगाने का अधिकार है, लेकिन हर आरोप के पीछे प्रमाण होना आवश्यक है।
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। यदि प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं तो झूठे आरोप लगाने वालों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। अन्यथा उन्हें अदालत और कानून का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
ब्लैकमेल की राजनीति से नहीं डरता Saryu राय
Saryu राय ने कहा कि जिन लोगों ने अपने जीवन में गलत कार्य किए हों, जिन्होंने भ्रष्टाचार किया हो या जिनके दामन पर दाग हों, वही ब्लैकमेलिंग और झूठे प्रचार से डर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी का पालन किया है, इसलिए इस प्रकार की धमकियों या दुष्प्रचार से वे विचलित नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रच रहे हैं, उन्हें कानून के दायरे में लाकर उचित सबक सिखाया जाएगा।
प्रियांशु झा को दी खुली चुनौती
अपने बयान में Saryu राय ने विशेष रूप से प्रियांशु झा नामक व्यक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है तो वह पूरे प्रमाण के साथ सामने आएं। यदि वे ऐसा नहीं कर सकते तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक रील बनाना, झूठी बातें प्रसारित करना और किसी व्यक्ति की छवि खराब करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि कानून का उल्लंघन है।
सोशल मीडिया पर बढ़ते दुष्प्रचार पर चिंता
सरयू राय ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना सत्यापन के किसी भी प्रकार की सामग्री वायरल हो जाती है, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि फर्जी खबरों और चरित्र हनन करने वाले वीडियो पर नियंत्रण के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था लागू होनी चाहिए ताकि निर्दोष लोगों की प्रतिष्ठा सुरक्षित रह सके।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में स्वतंत्र पत्रकारिता का सम्मान होना चाहिए, लेकिन पत्रकारिता के नाम पर किसी की छवि धूमिल करने का अधिकार किसी को नहीं दिया जा सकता।
Saryu राय द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद यह मामला अब कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ चुका है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और झूठे प्रचार करने वालों के विरुद्ध कानून के तहत कठोर कार्रवाई की मांग की जाएगी। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।










































