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3 जुलाई को बंद का आह्वान इसलिए ताकि फरार आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार करे Saryu Roy

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On: July 2, 2026 5:54 PM
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जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Roy ने स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा है कि हत्या जैसे संवेदनशील और गंभीर मुद्दे पर किसी भी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल को निजी अथवा सियासी लाभ लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि 3 जुलाई को प्रस्तावित जमशेदपुर बंद का उद्देश्य सरकार को घेरना या उसकी विफलता का राजनीतिक प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि इस बंद के जरिए प्रशासन पर यह दबाव बनाना है कि डीडी बार हत्याकांड में अब तक फरार आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही, भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए भी प्रशासन को ठोस बंदोबस्त करना होगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस बंद को अपने खिलाफ न माने, क्योंकि यह किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा और न्याय की भावना को मजबूत करने के लिए बुलाया गया है।

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सर्वसमाज और सर्वदलीय बैठक में Saryu Roy का स्पष्ट संदेश

बिष्टुपुर स्थित अपने आवास पर आयोजित सर्वसमाज और सर्वदलीय बैठक को संबोधित करते हुए विधायक सरयू राय ने कहा कि शहर में जो घटना घटी है, उसने पूरे समाज को झकझोर दिया है। ऐसे समय में राजनीति से ऊपर उठकर सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बंदी केवल विरोध का प्रतीक नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह प्रशासन और समाज—दोनों के लिए एक मजबूत संदेश बननी चाहिए कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ जनमत अब चुप नहीं रहेगा।

सरयू राय ने कहा कि “बंदी तो होगी ही। सरकार को चाहिए कि वह इस बंदी में राह का रोड़ा न बने। यह बंद किसी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग को लेकर है।” उन्होंने कहा कि यदि समाज एकजुट होकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत है और सरकार को इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।

बंद का मकसद: फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और भविष्य की रोकथाम

सरयू राय ने साफ किया कि बंद का मुख्य उद्देश्य डीडी बार हत्याकांड में शामिल फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि किसी भी जघन्य अपराध के बाद यदि आरोपी खुले घूमते रहें, तो इससे समाज में भय, आक्रोश और अविश्वास का माहौल पैदा होता है। इसलिए प्रशासन को यह दिखाना होगा कि वह अपराधियों के खिलाफ गंभीर है और कानून का शासन कायम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी। प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। इसके लिए शहर के संवेदनशील इलाकों में निगरानी, अपराधियों की पहचान, असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण और पुलिस-जन सहयोग की नई व्यवस्था विकसित करनी होगी। उनके अनुसार, बंद का एक बड़ा उद्देश्य यही है कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन अधिक जवाबदेह बने।

व्यवसायियों से अपील स्वेच्छा से दुकानें बंद रखें

बैठक में सरयू राय ने शहर के व्यवसायी वर्ग से विशेष अपील की कि वे 3 जुलाई के बंद को सफल बनाने में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि यह बंद किसी आर्थिक गतिविधि को बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दे पर सामूहिक प्रतिवाद के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसलिए शहर के हर छोटे-बड़े दुकानदार, प्रतिष्ठान संचालक और बड़े कारोबारी समूहों तक यह संदेश पहुंचाया जाना चाहिए कि वे शुक्रवार को अपने प्रतिष्ठान बंद रखें।

उन्होंने कहा कि “हमें व्यवसायियों को यह समझाना चाहिए कि यह बंद किसी साधारण राजनीतिक कार्यक्रम की तरह नहीं है। यह एक ऐसी घटना के विरोध में है, जिसने पूरे शहर की संवेदनशीलता को झकझोर दिया है। जितनी चिंता हमें है, उतनी ही चिंता आपको भी होनी चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयास यह होना चाहिए कि बिना किसी दबाव, जोर-जबरदस्ती या टकराव के जमशेदपुर स्वतःस्फूर्त रूप से बंद हो और ऐसा संदेश जाए कि शहर न्याय, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के मुद्दे पर एकमत है।

सरकारी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी बंद रखने की अपील

सरयू राय ने यह भी कहा कि सरकारी कार्यालयों को भी बंद रखने की अपील की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि शहर के सभी दुकानदारों, कारोबारी संगठनों, सामाजिक समूहों और आम नागरिकों तक संदेश पहुंचाया जाए कि वे अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर इस विरोध को समर्थन दें। उनके मुताबिक, यदि समाज के हर वर्ग की भागीदारी होगी, तभी यह बंद केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर सामाजिक प्रतिरोध का व्यापक स्वरूप ले सकेगा।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसी बड़ी सामाजिक त्रासदी या जन-हित के मुद्दे पर समाज एकजुट होकर अपनी आवाज उठाता है, उसी तरह इस घटना के विरोध में भी एकजुटता दिखाना जरूरी है। बंद के जरिए यह संदेश जाना चाहिए कि जमशेदपुर अपराध, भय और असुरक्षा के माहौल को सामान्य मानकर स्वीकार नहीं करेगा।

घटना निंदनीय और शर्मनाक किसी एक समाज या दल को जिम्मेदार न ठहराएं”

बैठक के दौरान सरयू राय ने कहा कि जो घटना हुई है, वह बेहद निंदनीय, शर्मनाक और चिंताजनक है। लेकिन इस तरह की घटनाओं को किसी एक समाज, समुदाय या राजनीतिक दल के माथे मढ़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अपराध को अपराध की तरह देखा जाना चाहिए और उसके खिलाफ समाज का सामूहिक प्रतिरोध होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अक्सर किसी विशेष समुदाय या समूह से जुड़ी घटना होने पर वही समाज सबसे अधिक मुखर दिखाई देता है, जबकि अन्य समाज अपेक्षाकृत पीछे रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बदलनी चाहिए। किसी भी जघन्य अपराध के खिलाफ सर्वसमाज को एक साथ खड़ा होना चाहिए, ताकि अपराधियों को यह संदेश जाए कि समाज किसी भी तरह की हिंसा, हत्या या गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं करेगा।

सर्वसमाज की एकजुटता ही बनेगी असली जवाब

सरयू राय ने कहा कि शहर में शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई काफी नहीं है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों—व्यवसायी, शिक्षक, युवा, सामाजिक संगठन, धार्मिक संस्थाएं और बुद्धिजीवी—को एक साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि एकजुट होकर व्यवस्था सुधारने का है।

उनके अनुसार, यदि किसी भी घटना के विरोध में सर्वसमाज एकजुट होकर खड़ा होता है, तो उसका प्रभाव प्रशासन पर भी पड़ता है और अपराधियों पर भी। उन्होंने यह संदेश दिया कि हत्या जैसी घटना को केवल पीड़ित परिवार या किसी एक समाज का मामला मानकर सीमित नहीं किया जा सकता; यह पूरे शहर की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक नैतिकता से जुड़ा प्रश्न है।

शहर में बढ़ती अड्डाबाजी, जुआबाजी और नशाखोरी पर पुलिस की भूमिका पर सवाल

अपने संबोधन में Saryu Roy ने शहर की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शहर में अड्डाबाजी, जुआबाजी, शराबखोरी और अन्य प्रकार की नशाखोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसके पीछे पुलिस की ढिलाई या संरक्षण जैसी बातें सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ईमानदारी और सख्ती से कार्रवाई करे, तो इन गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि समाज को भी यह तय करना होगा कि पुलिस को कैसे जवाबदेह बनाया जाए। यदि शहर में खुलेआम अवैध गतिविधियां चलती रहें और उन पर रोक न लगे, तो इससे अपराधियों का मनोबल बढ़ता है। यही कारण है कि आज आवश्यकता केवल घटना पर प्रतिक्रिया देने की नहीं, बल्कि अपराध की जड़ों पर प्रहार करने की है।

शांति समितियों में अयोग्य लोगों को हटाने की मांग

Saryu Roy ने थानों में गठित शांति समितियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर शांति समितियों में ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया है, जिनका शांति, सामाजिक संवाद या जनहित से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है। ऐसे लोगों की उपस्थिति समितियों की उपयोगिता को कमजोर करती है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि अयोग्य लोगों को शांति समितियों से बाहर किया जाना चाहिए और उनकी जगह ऐसे लोगों को शामिल किया जाना चाहिए, जिनकी समाज में साख हो, जो जिम्मेदार हों और जिनका उद्देश्य सचमुच शांति व सद्भाव कायम करना हो। उनके मुताबिक, शांति समिति केवल नाम की संस्था नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह स्थानीय स्तर पर तनाव कम करने, विवाद सुलझाने और पुलिस-जन संवाद मजबूत करने का प्रभावी मंच बननी चाहिए।

वरिष्ठ समाजसेवी शिवशंकर सिंह ने कहा—मजबूत आंदोलन की जरूरत

बैठक में वरिष्ठ समाजसेवी शिवशंकर सिंह ने कहा कि 3 जुलाई की बंदी को सफल बनाना जरूरी है, क्योंकि पिछले डेढ़ साल में जितने भी प्रशासनिक अधिकारी आए, उनकी कार्यशैली और मॉनीटरिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि शहर में आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना है, तो इसके लिए एक मजबूत सामाजिक आंदोलन की शुरुआत करनी होगी।

उन्होंने कहा कि जैसे पहले रेलवे की समस्याओं को लेकर आंदोलन चलाया गया था और उसका असर भी दिखा था, उसी तरह अब शहर में अपराध, अव्यवस्था और असामाजिक गतिविधियों के खिलाफ संगठित और निरंतर आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, यदि समाज लगातार दबाव बनाए रखेगा, तभी प्रशासन अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनेगा।

झारखंड क्षत्रिय संघ ने भी दिया बंद को पूरा समर्थन

बैठक में झारखंड क्षत्रिय संघ के अध्यक्ष शंभूनाथ सिंह ने शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 5-6 महीनों में शहर में चापड़बाजी की करीब 1300 घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि यह पुलिस की विफलता को स्पष्ट रूप से सामने लाता है। उनके अनुसार, यदि इतने बड़े पैमाने पर हिंसक घटनाएं हो रही हैं, तो यह संकेत है कि अपराधियों के मन में कानून का डर कम हुआ है।

उन्होंने कहा कि झारखंड क्षत्रिय संघ 3 जुलाई के बंद को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि शहर के विभिन्न समाजों से दो-तीन प्रतिनिधियों को लेकर एक संयोजन समिति बनाई जाए। यह समिति भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने, तनावपूर्ण हालात में समन्वय बनाने और प्रशासन के साथ संवाद स्थापित करने का काम कर सकती है।

अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार, हिमांशु सिंह की स्मृति में रखा गया मौन

बैठक में उषा यादव, अजय कुमार, संजय मिश्रा, रमेश कुमार, मुश्ताक अहमद, भास्कर मुखी और अंजलि सिंह सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में कहा कि शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाएं चिंता का विषय हैं और इसके खिलाफ संगठित सामाजिक प्रतिरोध की जरूरत है। वक्ताओं ने बंद को शांतिपूर्ण, व्यापक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

बैठक की शुरुआत डीडी बार हत्याकांड में मृत हिमांशु सिंह की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई। यह मौन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि न्याय की मांग और शहर में शांति-सुरक्षा की आवश्यकता के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक भी था। कार्यक्रम का मंच संचालन सुबोध श्रीवास्तव ने किया।

अत्यावश्यक सेवाएं बंद से रहेंगी बाहर

सरयू राय ने स्पष्ट किया कि 3 जुलाई के बंद के दौरान अत्यावश्यक सेवाओं को किसी भी प्रकार से बाधित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्लीनिक, नर्सिंग होम, एम्बुलेंस, दवा दुकानें, चिकित्सा उपकरण निर्माण इकाइयां, बैंक, एटीएम, बिजली, पानी, सीवरेज, साफ-सफाई व्यवस्था, पुलिस बल, फायर ब्रिगेड, यात्रियों के परिवहन वाहन, रेल सेवा, हवाई परिवहन, पेट्रोल पंप, सीएनजी, पीएनजी और एलपीजी गैस की आपूर्ति जैसी सेवाएं बंद के दायरे से बाहर रहेंगी।

उन्होंने कहा कि बंद का उद्देश्य आम जनजीवन को अनावश्यक रूप से प्रभावित करना नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक घटना के विरोध में न्याय और जवाबदेही की मांग को मजबूती देना है। इसलिए आवश्यक सेवाओं को चालू रखते हुए बाकी शहर से सहयोग की अपील की गई है।

बंद के बहाने नहीं, बदलाव के इरादे से आगे आए समाज

पूरी बैठक का संदेश यही रहा कि 3 जुलाई का बंद केवल एक दिन का विरोध कार्यक्रम न बनकर शहर में सुरक्षा, जवाबदेही और सामाजिक एकजुटता की नई शुरुआत बने। सरयू राय और अन्य वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हत्या जैसे मुद्दे पर राजनीति नहीं, बल्कि न्याय और व्यवस्था सुधार की जरूरत है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, पुलिस की जवाबदेही, शांति समितियों का पुनर्गठन, सामाजिक एकजुटता और अपराध के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध—इन सभी मुद्दों को इस बंद के केंद्र में रखा गया है।

अब देखना यह होगा कि 3 जुलाई का यह बंद शहर में किस हद तक व्यापक समर्थन हासिल करता है और क्या प्रशासन इस जनभावना को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है। फिलहाल इतना साफ है कि जमशेदपुर में अपराध और असुरक्षा के खिलाफ एक बड़ा सामाजिक स्वर आकार ले रहा है।

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