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119वीं AGM में चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का बड़ा संदेश टाटा स्टील बनेगी और बड़ी हरित स्मार्ट व मजबूत

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On: July 2, 2026 6:51 PM
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जमशेदपुर: टाटा स्टील की 119वीं वार्षिक आम बैठक AGM में कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने भविष्य को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील एक बड़े बदलाव और रूपांतरण के दौर से गुजर रही है तथा आने वाले वर्षों में कंपनी को “बड़ी, हरित, स्मार्ट और अधिक मजबूत” संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। चेयरमैन ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और इस्पात उद्योग में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में बेहद मजबूत प्रदर्शन किया है।

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उन्होंने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि टाटा स्टील की रणनीतिक सोच, परिचालन क्षमता, लागत नियंत्रण, तकनीकी नवाचार और दीर्घकालिक दृष्टि का परिणाम है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने उत्पादन, बिक्री, लाभ, डिजिटल कारोबार और हरित इस्पात की दिशा में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं। चेयरमैन ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाला समय टाटा स्टील के लिए सिर्फ विस्तार का नहीं, बल्कि एक नए युग में प्रवेश का समय है, जहां कंपनी आकार, तकनीक, स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा—चारों मोर्चों पर अपनी स्थिति और मजबूत करेगी।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था बनी मजबूती का आधार

एन. चंद्रशेखरन ने अपने संबोधन की शुरुआत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक बाजारों के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई थी, लेकिन मार्च में पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा लागत, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मांग में अनिश्चितता जैसी चुनौतियों ने वैश्विक उद्योग जगत को प्रभावित किया।

इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। चेयरमैन ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में भारत ने 7.6 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक मजबूत उपलब्धि मानी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस मजबूती के पीछे घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में निवेश, विनिर्माण क्षेत्र की प्रगति और उपभोग आधारित आर्थिक गतिविधियों की बड़ी भूमिका रही। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में इस्पात और औद्योगिक गतिविधियों की मांग बनी रही, जिसका लाभ टाटा स्टील जैसी कंपनियों को भी मिला।

वैश्विक इस्पात उद्योग में मंदी, लेकिन भारत ने दिखाई रफ्तार

चेयरमैन ने बताया कि कैलेंडर वर्ष 2025 में वैश्विक इस्पात उत्पादन लगभग 2 प्रतिशत घटकर 1.85 अरब टन रह गया। इस गिरावट के पीछे चीन की धीमी आर्थिक रफ्तार, पश्चिमी देशों में कमजोर मांग, उत्पादन लागत में उतार-चढ़ाव और कड़े नियामकीय दबाव जैसे कारण रहे। दुनिया के कई हिस्सों में इस्पात क्षेत्र को मांग और मार्जिन दोनों मोर्चों पर दबाव झेलना पड़ा।

हालांकि भारत की तस्वीर इससे अलग रही। भारत में इस्पात क्षेत्र ने उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की और यह वैश्विक परिदृश्य के बीच एक मजबूत अपवाद के रूप में सामने आया। चेयरमैन के अनुसार, देश में इस्पात उत्पादन 10.7 प्रतिशत बढ़कर 168.4 मिलियन टन पहुंच गया, जबकि इस्पात की मांग 7.6 प्रतिशत बढ़कर 163.7 मिलियन टन तक जा पहुंची। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा, निर्माण, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने इस वृद्धि को गति दी। भारत की यही संरचनात्मक मजबूती टाटा स्टील के लिए भी एक बड़ा अवसर बनकर उभरी।

वित्त वर्ष 2026 में टाटा स्टील का दमदार वित्तीय प्रदर्शन

एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026 में एक बार फिर यह साबित किया कि वह चुनौतीपूर्ण समय में भी मजबूत परिणाम देने में सक्षम है। कंपनी का समेकित राजस्व 6 प्रतिशत बढ़कर ₹2,32,140 करोड़ पहुंच गया, जो इस्पात उद्योग की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

चेयरमैन ने कहा कि कंपनी ने इस वर्ष न केवल राजस्व के मोर्चे पर मजबूती दिखाई, बल्कि लाभप्रदता, उत्पादन और नकदी प्रबंधन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। वित्तीय अनुशासन, परिचालन दक्षता, लागत नियंत्रण और उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर फोकस के कारण कंपनी का प्रदर्शन और मजबूत हुआ। उन्होंने कहा कि यह नतीजे इस बात के प्रमाण हैं कि टाटा स्टील सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि टिकाऊ और गुणवत्ता-आधारित वृद्धि पर काम कर रही है।

रिकॉर्ड उत्पादन, रिकॉर्ड डिलीवरी और मुनाफे में 243 प्रतिशत की छलांग

कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों का जिक्र करते हुए चेयरमैन ने बताया कि वित्त वर्ष 2026 में कच्चे इस्पात का रिकॉर्ड उत्पादन लगभग 23.4 मिलियन टन रहा। वहीं भारत में कंपनी ने रिकॉर्ड 22.5 मिलियन टन इस्पात की डिलीवरी की, जो घरेलू बाजार में उसकी मजबूत पकड़ और मांग की स्थिति को दर्शाता है।

वित्तीय मोर्चे पर टाटा स्टील ने सबसे बड़ी उपलब्धि शुद्ध लाभ (PAT) में हासिल की। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का शुद्ध लाभ 243 प्रतिशत बढ़कर ₹10,886 करोड़ पहुंच गया। इसी तरह कंपनी का समेकित EBITDA 35 प्रतिशत बढ़कर ₹34,848 करोड़ हो गया। इसके साथ ही कंपनी ने अपने कर्ज प्रबंधन में भी सुधार किया और समेकित शुद्ध ऋण घटकर ₹80,144 करोड़ रह गया।

चेयरमैन ने कहा कि यह प्रदर्शन कई मोर्चों पर एक साथ किए गए सुधारों का परिणाम है—बेहतर उत्पाद मिश्रण, मजबूत घरेलू मांग, परिचालन क्षमता में सुधार, कच्चे माल और लागत पर नियंत्रण तथा रणनीतिक निवेशों का लाभ कंपनी को मिला है।

भारत कारोबार ने दिखाई असली ताकत, EBITDA मार्जिन पहुंचा 24 प्रतिशत

एन. चंद्रशेखरन ने विशेष रूप से भारत में कंपनी के प्रदर्शन को टाटा स्टील की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में भारत में कंपनी का राजस्व ₹1,40,302 करोड़ रहा, जबकि EBITDA ₹34,272 करोड़ दर्ज किया गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कंपनी का EBITDA मार्जिन बढ़कर 24 प्रतिशत पहुंच गया, जो परिचालन मजबूती और लाभप्रदता दोनों का संकेत है।

उन्होंने कहा कि इस बेहतर मार्जिन के पीछे कई कारण रहे—लागत नियंत्रण, उत्पादों का बेहतर मिश्रण, उच्च मूल्य वाले इस्पात उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी, अधिक बिक्री और सप्लाई चेन की दक्षता। भारत में टाटा स्टील की मजबूत स्थिति इस बात का संकेत है कि कंपनी घरेलू बाजार में केवल एक बड़े उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि एक तकनीकी और मूल्य-वर्धित इस्पात समाधान प्रदाता के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही है।

शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर ₹4 लाभांश की सिफारिश

चेयरमैन ने बताया कि मजबूत वित्तीय प्रदर्शन को देखते हुए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने वित्त वर्ष 2026 के लिए ₹4 प्रति इक्विटी शेयर लाभांश देने की सिफारिश की है। यह कदम शेयरधारकों के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता और उनके विश्वास का सम्मान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि टाटा स्टील का उद्देश्य केवल विकास करना नहीं, बल्कि अपने शेयरधारकों, कर्मचारियों, ग्राहकों और समाज—सभी हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य निर्माण करना है। लाभांश की यह सिफारिश कंपनी की वित्तीय मजबूती और नकदी सृजन क्षमता को भी दर्शाती है।

कलिंगानगर विस्तार से बढ़ी क्षमता, 40 मिलियन टन का लक्ष्य बरकरार

भारत में विस्तार योजनाओं पर चर्चा करते हुए चेयरमैन ने कहा कि कलिंगानगर स्टील प्लांट का दूसरा चरण पूरा होना कंपनी के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके बाद टाटा स्टील की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 26.1 मिलियन टन प्रति वर्ष हो गई है। उन्होंने बताया कि कलिंगानगर संयंत्र की क्षमता 3 एमटीपीए से बढ़ाकर 8 एमटीपीए कर दी गई है।

यह केवल क्षमता विस्तार नहीं, बल्कि गुणवत्ता और तकनीक की दृष्टि से भी बड़ा कदम है। यहां देश की सबसे बड़ी ब्लास्ट फर्नेस और अत्याधुनिक कोल्ड रोलिंग मिल स्थापित की गई है। इससे टाटा स्टील को ऑटोमोबाइल, रक्षा, इंजीनियरिंग और उच्च तकनीक वाले फ्लैट स्टील उत्पादों के क्षेत्र में और मजबूती मिलेगी।

चेयरमैन ने दोहराया कि कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य 40 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन क्षमता हासिल करना है। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए यह लक्ष्य केवल महत्वाकांक्षी नहीं, बल्कि व्यावहारिक और रणनीतिक रूप से आवश्यक भी है।

वैल्यू-एडेड उत्पादों और नए व्यवसायों पर तेज फोकस

टाटा स्टील केवल पारंपरिक इस्पात उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहती। चेयरमैन ने कहा कि कंपनी रक्षा, शिपबिल्डिंग, ट्यूब, टिनप्लेट और वायर व्यवसाय जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रही है। इस रणनीति का उद्देश्य उत्पाद पोर्टफोलियो को विविध बनाना, मार्जिन बेहतर करना और नए औद्योगिक अवसरों का लाभ उठाना है।

वर्ष के दौरान कंपनी ने कई रणनीतिक फैसले भी लिए। इनमें Tata Steel Colors में स्वामित्व का एकीकरण और Thriveni Pellets में बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण शामिल है। इसके अलावा Neelachal Ispat Nigam Limited के विस्तार और उसके टाटा स्टील में विलय को भी मंजूरी दी गई है। चेयरमैन ने कहा कि इन कदमों से कंपनी की परिचालन क्षमता, कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पाद विविधता और कॉरपोरेट संरचना—चारों मोर्चों पर मजबूती मिलेगी।

यूरोप में हरित इस्पात की दिशा में टाटा स्टील का बड़ा दांव

एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा स्टील भविष्य को लेकर केवल उत्पादन या लाभ की भाषा में नहीं सोच रही, बल्कि हरित इस्पात (Green Steel) को अपनी रणनीति के केंद्र में रख रही है। ब्रिटेन में कंपनी ने Port Talbot Steelworks में 1.25 अरब पाउंड की लागत वाली इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इसे ब्रिटेन के इतिहास की सबसे बड़ी लो-कार्बन स्टील परियोजनाओं में से एक बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी और उद्योग के भविष्य को लेकर कंपनी की गंभीरता का प्रतीक है। वहीं नीदरलैंड में पर्यावरणीय नियम पहले की तुलना में अधिक कड़े हो गए हैं। टाटा स्टील वहां की सरकार के साथ मिलकर दीर्घकालिक समाधान पर काम कर रही है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए Vattenfall के सह-उत्पादन बिजली संयंत्रों का अधिग्रहण भी किया गया है।

इन पहलों से साफ है कि टाटा स्टील भविष्य की इस्पात कंपनी को सिर्फ बड़ी नहीं, बल्कि कम कार्बन उत्सर्जन वाली, अधिक जिम्मेदार और पर्यावरण-संतुलित कंपनी के रूप में देख रही है।

AI और डिजिटल तकनीक से बढ़ी दक्षता, 860 से अधिक मॉडल कर रहे काम

चेयरमैन ने कहा कि टाटा स्टील तकनीकी बदलाव को सिर्फ सपोर्ट सिस्टम नहीं, बल्कि अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त का मुख्य आधार मानती है। वर्तमान में कंपनी की विभिन्न इकाइयों में 860 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल काम कर रहे हैं, जिनकी मदद से उत्पादन, गुणवत्ता, ऊर्जा दक्षता, सुरक्षा और निर्णय-प्रक्रिया में बड़ा सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के मोर्चे पर भी कंपनी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। Aashiyana और DigECA जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ने मिलकर ₹9,360 करोड़ का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) हासिल किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत अधिक है। यह इस बात का संकेत है कि टाटा स्टील केवल स्टील निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल कारोबारी पारिस्थितिकी तंत्र भी तेजी से विकसित कर रही है।

सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, “जीरो हार्म” लक्ष्य पर फोकस

एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि कंपनी के लिए कर्मचारियों, ठेका कर्मियों और सहयोगियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाटा स्टील का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा कार्यस्थल तैयार करना है जहां “जीरो हार्म” की संस्कृति स्थापित हो। इसके लिए आधुनिक तकनीक, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, प्रशिक्षण, मजबूत प्रक्रियाएं और जागरूकता अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार औद्योगिक कंपनी के रूप में टाटा स्टील यह मानती है कि विकास तभी सार्थक है, जब वह सुरक्षित और मानवीय कार्य-संस्कृति के साथ हो।

CSR पर ₹473 करोड़ खर्च, 69 लाख लोगों के जीवन पर असर

सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के क्षेत्र में भी टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026 में बड़ा निवेश किया। चेयरमैन ने बताया कि कंपनी ने इस अवधि में ₹473 करोड़ खर्च किए, जिससे देशभर में 69 लाख से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।

ये पहलें शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, कौशल विकास, खेल, पेयजल, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में केंद्रित रहीं। चेयरमैन ने कहा कि टाटा स्टील का दर्शन केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के साथ मिलकर प्रगति करने का है। यही कारण है कि कंपनी अपने कारोबारी विस्तार के साथ सामाजिक दायित्वों को भी समान महत्व देती है।

टाटा स्टील नए युग में प्रवेश कर रही है — चेयरमैन का भरोसा

अपने संबोधन के अंत में एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा स्टील अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहां कंपनी आकार, तकनीक, पर्यावरणीय जिम्मेदारी, वित्तीय मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा हर स्तर पर नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल कारोबारी विस्तार का नहीं, बल्कि मानसिकता, तकनीक, परिचालन मॉडल और भविष्य की औद्योगिक दिशा का भी है।

उन्होंने शेयरधारकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका विश्वास, सहयोग और दीर्घकालिक समर्थन ही टाटा स्टील की सबसे बड़ी पूंजी है। इसी भरोसे के साथ कंपनी आने वाले वर्षों में सतत विकास, नवाचार, हरित इस्पात, डिजिटल उत्कृष्टता और वैश्विक नेतृत्व के नए मानक स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

119वीं AGM में दिया गया यह संदेश केवल वार्षिक प्रदर्शन का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि टाटा स्टील के भविष्य का रोडमैप भी है एक ऐसी कंपनी का रोडमैप, जो आने वाले समय में और बड़ी, और हरित, और स्मार्ट, और मजबूत बनने की दिशा में पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

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