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Women (महिला) आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा: मेयर सुधा गुप्ता का तीखा प्रहार

On: April 20, 2026 7:51 PM
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जमशेदपुर: Women आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा – ये शब्द भोपाल की मेयर सुधा गुप्ता ने हाल ही में तिलक पुस्तकालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहे। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि Women आरक्षण को सशक्तिकरण का नाम देकर धोखा दिया जा रहा है। अगर भाजपा सचमुच महिला हितैषी है, तो महिला प्रधानमंत्री की घोषणा करे। ये बातें सुनकर हर जागरूक नागरिक सोचने पर मजबूर हो जाता है। आइए, इस Women आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा की पूरी सच्चाई को समझते हैं, तथ्यों के साथ।

Women आरक्षण बिल कानून बना, लेकिन लागू क्यों नहीं?

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Women आरक्षण का सपना लंबे समय से देखा जा रहा है। 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटें Women के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। लेकिन ये बिल पास होते ही लागू क्यों नहीं हुआ? मेयर सुधा गुप्ता ने साफ कहा – ये Women आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा है। कानून बन गया, लेकिन उसे ऐसी शर्तों में जकड़ दिया गया कि लागू होना वर्षों दूर हो गया।

दरअसल, बिल में लिखा है कि आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना हो जाए और उसके बाद परिसीमन (सीटों की सीमांकन) पूरा हो। 2021 की जनगणना तो कोरोना के कारण टल चुकी है, नई जनगणना कब होगी, कोई पक्का समय नहीं। ऐसे में Women आरक्षण का इंतजार 2029 या उसके बाद तक खिंच सकता है। ये Women को वोट बैंक बनाने का तरीका लगता है, न कि सच्चा सशक्तिकरण। सुधा गुप्ता ने कड़े शब्दों में कहा, “यह महिला अधिकार नहीं, बल्कि धोखा है।”

जनगणना और परिसीमन देरी का जाल या रणनीति?

Women आरक्षण बिल की सबसे बड़ी बाधा है जनगणना और परिसीमन। समझिए इसे आसान भाषा में। जनगणना हर दस साल में होती है, जो जनसंख्या का सटीक आंकड़ा देती है। उसके आधार पर परिसीमन होता है, यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय की जाती हैं। बिल कहता है कि Women आरक्षण इन दोनों के बाद ही लागू होगा।

अभी 2026 चल रहा है, नई जनगणना की कोई तारीख तय नहीं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये 2027 या 2028 में हो सकती है। फिर परिसीमन में कम से कम 2-3 साल लगेंगे। नतीजा? Women आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद ही आ सकता है। यानी 5-6 साल की देरी। विपक्ष ने मांग की थी कि मौजूदा सीटों पर तुरंत 33% आरक्षण लागू हो, लेकिन सरकार ने ठुकरा दिया। सुधा गुप्ता बोलीं, “अगर नीयत साफ होती, तो आज से लागू हो जाता। ये जाल बिछाकर लटकाया गया है।”

परिसीमन का राजनीतिक असर कौन फायदे में, कौन नुकसान?

परिसीमन से सीटों की संख्या बढ़ सकती है – वर्तमान 543 से 888 तक। दक्षिणी राज्य जैसे तमिलनाडु, केरल चिंतित हैं क्योंकि उनकी जनसंख्या वृद्धि कम है, जबकि उत्तर भारत में तेज। इससे उत्तर के राज्यों को ज्यादा सीटें मिलेंगी, दक्षिण के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ेगा। Women आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा यहीं छिपा है – ये चुनावी रणनीति का हिस्सा लगता है। मेयर सुधा गुप्ता ने चेतावनी दी कि इससे राजनीतिक संतुलन बिगड़ेगा।

विपक्ष की मांगें तुरंत लागू हो महिला आरक्षण

सुधा गुप्ता ने स्पष्ट मांगें रखीं। पहली, Women आरक्षण को बिना शर्त तुरंत लागू किया जाए। दूसरी, जनगणना और परिसीमन के बहाने टालना बंद हो। तीसरी, जनगणना के साथ 33% ओबीसी आरक्षण भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा, “देश की Women जागरूक हैं। उनके अधिकारों से राजनीति बंद हो। वरना सड़क से सदन तक आंदोलन होगा।”

विपक्ष हमेशा से कहता आया है कि मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू हो। इससे देरी नहीं होगी। लेकिन सरकार का तर्क है कि संविधान के अनुरूप परिसीमन जरूरी। सवाल ये है – क्या ये Women का हित है या वोट की राजनीति?

भाजपा पर सुधा गुप्ता का तीखा हमला: महिला पीएम घोषित करें

मेयर ने भाजपा को चुनौती दी – अगर Women हितैषी हैं, तो Women प्रधानमंत्री की घोषणा करें। ये बात सोचने लायक है। भाजपा ने Women आरक्षण को अपनी उपलब्धि बताया, लेकिन देरी से उसकी सच्चाई उजागर हो रही है। सुधा गुप्ता ने कहा, “ये इंतजार का कानून है, अधिकार का नहीं।”

Women सशक्तिकरण का सच आंकड़े क्या कहते हैं?

भारत में महिलाओं की स्थिति देखें। संसद में सिर्फ 14% महिला सांसद हैं, विधानसभाओं में 9%। पंचायतों में 50% आरक्षण से लाखों Women नेता बनीं, लेकिन संसद स्तर पर कुछ नहीं। Women आरक्षण से ये बदल सकता था, लेकिन देरी से अवसर खो रहा है। सुधा गुप्ता सही कहती हैं – ये राजनीतिक धोखा है।

वैश्विक तुलना करें तो रवांडा में 61%, क्यूबा में 53% Women प्रतिनिधि। भारत पीछे क्यों? क्योंकि वादे पूरे नहीं होते।

THE NEWS FRAME

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि महिला आरक्षण का लंबा संघर्ष

1993 में पंचायती राज में 33% आरक्षण आया। 1996 से संसद में प्रयास शुरू हुए। कई सरकारें गिरीं, लेकिन बिल पास नहीं। 2023 में मोदी सरकार ने पास किया, लेकिन शर्तों ने बिगाड़ दिया। Women आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा इसी इतिहास से जुड़ा है।

Women की जागरूकता आंदोलन की तैयारी

आज Women शिक्षित हैं। सोशल मीडिया पर #WomenReservationNow ट्रेंड कर रहा। सुधा गुप्ता ने कहा, “महिलाएं समझ चुकी हैं। जल्द निर्णय लो, वरना आंदोलन होगा।” भोपाल से ये आवाज पूरे देश में गूंजेगी।

Women आरक्षण के नाम पर राजनीतिक धोखा अब बेनकाब हो चुका। मेयर सुधा गुप्ता की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने सच्चाई सामने ला दी। अगर सरकार Women हितैषी है, तो बिना देरी महिला आरक्षण लागू करे। Women को इंतजार नहीं, अधिकार चाहिए। जनगणना हो, ओबीसी आरक्षण जुड़े, लेकिन टालमटोल बंद। देश की Women जाग चुकी हैं – सड़क से सदन तक आवाज बुलंद करेंगी। आइए, हम सब मिलकर इस Women आरक्षण को सच्चा सशक्तिकरण बनाएं। 

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