
चक्रधरपुर: PM श्री केन्द्रीय विद्यालय, चक्रधरपुर की वरीय शिक्षिका एवं पीजीटी (बायोलॉजी) श्रीमती रानो मरांडी के निधन से विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, अभिभावकों तथा पूरे शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन की खबर मिलते ही विद्यालय परिसर सहित क्षेत्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में दुख और संवेदना का माहौल बन गया। श्रीमती मरांडी लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही थीं और विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय एवं प्रेरणादायी शिक्षिका के रूप में जानी जाती थीं।

बताया गया कि सांस लेने में तकलीफ होने के कारण उनका निधन हो गया। उनके आकस्मिक निधन ने उनके सहकर्मियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सभी ने उन्हें एक समर्पित शिक्षिका और उत्कृष्ट व्यक्तित्व के रूप में याद किया।
शिक्षा के क्षेत्र में दिया अमूल्य योगदान
श्रीमती रानो मरांडी ने अपने लंबे शिक्षण कार्यकाल के दौरान हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की। बायोलॉजी विषय की शिक्षिका होने के नाते उन्होंने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान नहीं दिया, बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने और बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी।
उनकी कक्षाएं विद्यार्थियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थीं। वे जटिल विषयों को सरल भाषा में समझाने की क्षमता रखती थीं, जिससे विद्यार्थियों को विषय को समझने में आसानी होती थी। उनकी शिक्षण शैली विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रेरित करती थी और यही कारण था कि वे छात्रों की प्रिय शिक्षिकाओं में शामिल थीं।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निभाई अहम भूमिका
रानो मरांडी केवल एक विषय शिक्षिका ही नहीं थीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की पक्षधर भी थीं। वे शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान देती थीं। विद्यालय में आयोजित होने वाली विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी।
वे विद्यार्थियों को हमेशा अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच बनाए रखने की प्रेरणा देती थीं। कई विद्यार्थियों ने उनके मार्गदर्शन में शैक्षणिक और प्रतियोगी क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा की थीं मिसाल
श्रीमती मरांडी अपने सरल, विनम्र और सहयोगी स्वभाव के लिए जानी जाती थीं। विद्यालय में उनके सहकर्मी उन्हें एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं जो हमेशा दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहती थीं। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, जिम्मेदारी और समर्पण की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी।
विद्यालय के शिक्षकों ने कहा कि वे अपने कार्यों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभाती थीं। चाहे कक्षा शिक्षण हो, परीक्षा संबंधी दायित्व हों या विद्यालय के अन्य प्रशासनिक कार्य, वे हर जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाती थीं।
सहकर्मियों के बीच थीं अत्यंत सम्मानित
विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच रानो मरांडी का विशेष सम्मान था। उनके व्यवहार में हमेशा सकारात्मकता और सौहार्द का भाव दिखाई देता था। वे टीम भावना के साथ कार्य करने में विश्वास रखती थीं और अपने अनुभवों से अन्य शिक्षकों का मार्गदर्शन भी करती थीं।
सहकर्मियों का कहना है कि उनका व्यक्तित्व बेहद प्रेरणादायक था। वे हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखती थीं और अपने कार्यों से दूसरों को भी प्रेरित करती थीं। उनके निधन से विद्यालय परिवार ने एक अनुभवी और मार्गदर्शक शिक्षिका को खो दिया है।
विद्यार्थियों की प्रिय शिक्षिका थीं रानो मरांडी
विद्यालय के कई विद्यार्थियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। छात्रों का कहना है कि वे केवल पढ़ाने वाली शिक्षिका नहीं थीं, बल्कि एक अभिभावक की तरह उनका मार्गदर्शन करती थीं। पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं के अलावा व्यक्तिगत चुनौतियों में भी वे विद्यार्थियों को सही दिशा दिखाने का प्रयास करती थीं।
उनकी कक्षाओं में अनुशासन और आत्मीयता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता था। विद्यार्थी उनसे खुलकर अपनी समस्याएं साझा करते थे और वे हमेशा उनकी मदद करने का प्रयास करती थीं। यही कारण है कि उनके निधन की खबर से विद्यार्थियों में गहरा शोक व्याप्त है।
विद्यालय परिवार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रानो मरांडी के निधन पर पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय, चक्रधरपुर के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। विद्यालय परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया और कहा कि उनका स्थान कभी नहीं भरा जा सकेगा।
विद्यालय में शोक सभा का आयोजन कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने उनके साथ बिताए गए अनुभवों को साझा किया और उनके व्यक्तित्व तथा कार्यों को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।
शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति
श्रीमती रानो मरांडी का निधन शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण और समाज को शिक्षित करने के लिए समर्पित किया। उनकी सेवाएं और योगदान लंबे समय तक याद किए जाएंगे।
शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका केवल एक अध्यापक तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत और मार्गदर्शक भी थीं। उनके निधन से उत्पन्न हुई रिक्तता को भर पाना आसान नहीं होगा।
प्रेरणादायी जीवन को हमेशा किया जाएगा याद
रानो मरांडी का जीवन समर्पण, सेवा और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उन्होंने अपने ज्ञान, अनुभव और सकारात्मक सोच से अनेक विद्यार्थियों के जीवन को प्रभावित किया। उनका शिक्षण कार्य और मानवीय दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए उनका जाना एक व्यक्तिगत क्षति की तरह है। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं, उनके विचार और उनके द्वारा दिए गए संस्कार हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।
शोकाकुल माहौल में दी जा रही श्रद्धांजलि
श्रीमती रानो मरांडी के निधन के बाद पूरे विद्यालय परिसर में शोक का माहौल है। विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और क्षेत्र के शिक्षाविद उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। सभी ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा उनके परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
उनका जीवन शिक्षा, अनुशासन और मानवता के मूल्यों को समर्पित रहा। यही कारण है कि वे हमेशा अपने विद्यार्थियों, सहकर्मियों और समाज के लोगों की स्मृतियों में जीवित रहेंगी।













