
नई दिल्ली: PM नरेंद्र मोदी अपने बहुप्रतीक्षित यूरोपीय दौरे के तहत फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर रवाना हो गए हैं। यह यात्रा भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। प्रधानमंत्री 14 जून को फ्रांस पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से होगी। दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा करेंगे।

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘भारत इनोवेट्स 2026 का उद्घाटन है, जिसमें भारत की तकनीकी क्षमता, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत और फ्रांस के उद्योग जगत, वैज्ञानिकों, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों की बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है।
PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच होने वाली बैठक में रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अंतरिक्ष अनुसंधान, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर तकनीक, जलवायु परिवर्तन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर भी हो सकते हैं, जिससे आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को और मजबूती मिलेगी।
भारत और फ्रांस के संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। रक्षा क्षेत्र में राफेल विमान, नौसैनिक सहयोग और संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को दर्शाते हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में भी दोनों देश लंबे समय से सहयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा इन संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी फ्रांसीसी उद्योगपतियों और वैश्विक निवेशकों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इस दौरान भारत में निवेश बढ़ाने, विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने और स्टार्टअप कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनाना है।
फ्रांस के बाद PM मोदी स्लोवाकिया की यात्रा करेंगे। स्लोवाकिया मध्य यूरोप का एक महत्वपूर्ण देश है और भारत के साथ उसके आर्थिक एवं औद्योगिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, ऑटोमोबाइल उद्योग, रक्षा निर्माण, डिजिटल तकनीक, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया तेजी से बदलते वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक माहौल से गुजर रही है। ऐसे में भारत यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत बनाकर वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाना चाहता है। यूरोप के साथ बढ़ता सहयोग भारत की अर्थव्यवस्था, व्यापार और तकनीकी विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम के माध्यम से भारत अपनी डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप संस्कृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, फिनटेक, हेल्थ टेक, ग्रीन टेक्नोलॉजी और अनुसंधान आधारित विकास मॉडल को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। इससे विदेशी निवेश आकर्षित होने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में नए अवसर मिलने की संभावना है।
PM मोदी की इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। यह दौरा न केवल भारत-फ्रांस संबंधों को नई मजबूती देगा, बल्कि स्लोवाकिया सहित मध्य यूरोप के देशों के साथ भारत के सहयोग को भी नई दिशा प्रदान करेगा। साथ ही, नवाचार, तकनीक और निवेश के क्षेत्र में भारत की वैश्विक छवि को और मजबूत करने में भी यह यात्रा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस और स्लोवाकिया दौरा रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग, तकनीकी नवाचार और वैश्विक कूटनीति के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के साथ बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में भारत के विकास और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को नई गति देने में सहायक साबित हो सकता है।










































