
Orphan Girl: पोटका प्रखंड के रसूनचोपा गांव की सुनीता सोरेन, जो बचपन से ही मातृ-पितृ विहीन (Orphan) के लिए शिक्षा की नई राह, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित जीवन जी रही है, अब शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने जा रही है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पोटका में उसके छठी कक्षा में नामांकन की प्रक्रिया को लेकर जिला प्रशासन ने सकारात्मक पहल की है।

Orphan Girl: संघर्ष भरा बचपन, लेकिन पढ़ाई का सपना नहीं टूटा
सुनीता के पिता भागित सोरेन का निधन तब हुआ जब वह सिर्फ तीन साल की थी। कुछ समय बाद उसकी मां भी उसे छोड़कर चली गई। इसके बाद वह अपनी बुआ की देखरेख में पली-बढ़ी। जब बुआ काम पर बाहर जाती थीं, तो मामा उसका ख्याल रखते थे। कठिन परिस्थितियों में भी उसने गांव के सरकारी स्कूल से पांचवीं कक्षा पास की।
विद्यालय में नामांकन के लिए किया था आवेदन, महीनों तक नहीं मिली कोई सूचना
जनवरी 2025 में सुनीता ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पोटका में छठी कक्षा में नामांकन के लिए आवेदन किया। लेकिन कई महीने बीतने के बाद भी स्कूल की ओर से कोई सूचना नहीं मिली। इससे बच्ची और उसके परिजन चिंतित थे।
पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल से की मदद की गुहार
परिवार की ओर से पूर्व जिला पार्षद करुणा मय मंडल से संपर्क किया गया। उन्होंने बच्ची की स्थिति को गंभीरता से लिया और 11 जुलाई 2025 को सुनीता को लेकर जिला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के जनता दरबार पहुंचे। वहां उन्होंने आवेदन देकर बच्ची की परिस्थिति को विस्तार से अधिकारियों के सामने रखा।
डीसी ने लिया त्वरित संज्ञान, नामांकन का दिलाया भरोसा
जनता दरबार में जिला उपायुक्त ने बच्ची से बातचीत की और उसकी पारिवारिक स्थिति को समझा। उन्होंने आश्वासन दिया कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पोटका में सुनीता का नामांकन शीघ्र कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग को इस मामले में तुरंत कार्रवाई का निर्देश भी दिया।
समाजसेवियों की उपस्थिति बनी हौसले की वजह
इस दौरान सुनीता के साथ समाजसेवी प्रेम मुर्मू और एक महिला रिश्तेदार भी मौजूद थीं। पूर्व पार्षद करुणा मय मंडल ने कहा कि ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ना समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। डीसी के आश्वासन से सभी के चेहरे पर उम्मीद की रौशनी साफ दिखाई दी।
सुनीता की यह कहानी बताती है कि
यदि समाज, प्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो किसी भी वंचित बच्चे को एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ाया जा सकता है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में उसका नामांकन केवल एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसके जीवन में उजाले की शुरुआत है।










































