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Jamshedpur में न्यूनतम मजदूरी को लेकर फिर उठे सवाल सफाई कर्मियों और कंवाई चालकों के समर्थन में आवाज बुलंद

On: July 18, 2026 6:34 PM
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जमशेदपुर: Jamshedpur में न्यूनतम मजदूरी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। टाटा स्टील से जुड़े जेएनएसी (JNAC) विभाग में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और टाटा मोटर्स के कंवाई चालकों का लंबे समय से चल रहा आंदोलन अब मजदूरों के अधिकारों का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इसी संदर्भ में कंवाई चालक संगठन के अध्यक्ष ज्ञान सागर प्रसाद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मजदूरों को उनका वैधानिक अधिकार दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से वंचित रखना न केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि गरीब और मेहनतकश मजदूरों के साथ अन्याय भी है।

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जेएनएसी के सफाई कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी की मांग पर हड़ताल पर

ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि टाटा स्टील से जुड़े जेएनएसी विभाग में कार्यरत सफाई कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि शहर की सफाई व्यवस्था संभालने वाले इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जमशेदपुर में मजदूरों का अधिकार छीने जाने का यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल मजदूरी का नहीं, बल्कि मजदूरों के सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

टाटा घराने की प्रतिष्ठा पर भी उठाए सवाल

ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि यह पूरा मामला टाटा समूह से जुड़े विभागों से संबंधित है। टाटा समूह की पहचान हमेशा श्रमिक हितैषी संस्थान के रूप में रही है, लेकिन यदि उसके अधीन कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल रही है तो इससे समूह की प्रतिष्ठा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के लिए प्रसिद्ध संस्थानों को अपने श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए भी आगे आना चाहिए।

सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों के वेतन में बड़ा अंतर

प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार और बड़े उद्योगों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख रुपये या उससे अधिक वेतन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की सफाई, परिवहन और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है।

उन्होंने कहा कि जमीन पर कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले गरीब मजदूरों के साथ इस प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है।

श्रम विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने की मांग

ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी दिलाना श्रम विभाग की कानूनी जिम्मेदारी है। यदि विभाग को इस मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि अब जबकि यह मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में भी आ चुका है, ऐसे में प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर मजदूरों की समस्या का समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।

2017 के आंदोलन का किया उल्लेख

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में कंवाई चालक संगठन ने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष लगातार सात महीने तक धरना देकर सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग उठाई थी।

उस आंदोलन के बाद जमशेदपुर के कई क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी लागू हुई और चालकों के लिए भी उपायुक्त तथा जिला श्रम अधीक्षक के स्तर पर सकारात्मक निर्णय लिए गए। हालांकि, आज भी कई क्षेत्रों में यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है।

टाटा मोटर्स के खिलाफ 29 महीने से जारी है आंदोलन

ज्ञान सागर प्रसाद ने बताया कि 1 मार्च 2024 से कंवाई चालक संगठन टाटा मोटर्स के खिलाफ न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग को लेकर लगातार धरना दे रहा है।

उन्होंने कहा कि लगभग 29 महीनों से चालक कठिन परिस्थितियों में आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद न तो टाटा मोटर्स प्रबंधन ने कोई ठोस पहल की है और न ही संबंधित सरकारी विभागों ने समस्या का समाधान किया है।

उन्होंने कहा कि संगठन ने न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी है और मजदूरों के अधिकार मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।

आठ घंटे के कार्य के अनुसार मिले न्यूनतम मजदूरी

उन्होंने कहा कि प्रत्येक श्रमिक को आठ घंटे के कार्य दिवस के अनुसार सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी मिलनी चाहिए।

यदि किसी कर्मचारी से आठ घंटे से अधिक कार्य लिया जाता है तो उसे अतिरिक्त समय का भुगतान भी श्रम कानूनों के अनुसार किया जाना चाहिए।

पीएफ, ईएसआई और बीमा की भी उठाई मांग

ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि केवल न्यूनतम मजदूरी ही नहीं, बल्कि सभी श्रमिकों को भविष्य निधि (PF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) और बीमा सुविधा भी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के हजारों मजदूर आज भी इन बुनियादी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित हैं, जबकि यह उनका कानूनी अधिकार है।

मजदूरों के हित में सभी पक्षों से सहयोग की अपील

उन्होंने उद्योग प्रबंधन, श्रम विभाग, जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अपील की कि मजदूरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान किया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि मजदूरों को समय पर उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी तो औद्योगिक माहौल भी बेहतर होगा और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

न्यूनतम मजदूरी हर श्रमिक का अधिकार

उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी कोई दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रमिक का कानूनी और संवैधानिक अधिकार है। किसी भी संस्था या ठेकेदार को इससे वंचित करने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आज नहीं तो कल मजदूरों को उनका अधिकार अवश्य मिलेगा और सरकार को भी श्रमिक हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।

Jamshedpur में सफाई कर्मचारियों और कंवाई चालकों द्वारा उठाया गया न्यूनतम मजदूरी का मुद्दा अब श्रमिक अधिकारों की बड़ी लड़ाई बनता जा रहा है। कंवाई चालक संगठन के अध्यक्ष ज्ञान सागर प्रसाद ने सरकार, जिला प्रशासन, श्रम विभाग और उद्योग प्रबंधन से हस्तक्षेप कर मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, पीएफ, ईएसआई, बीमा और अन्य कानूनी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना केवल कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक आवश्यक कदम है।

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