
INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय से बढ़ेगी समुद्री सुरक्षा; आत्मनिर्भर भारत को मिलेगा नया बल
कोलकाता, 19 जून 2026। भारत की समुद्री सुरक्षा और रक्षा क्षमताओं को नई मजबूती मिलने जा रही है। भारतीय नौसेना 21 जून को कोलकाता में आयोजित एक भव्य समारोह में तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों – आईएनएस दूनागिरी (INS Dunagiri), आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak) और आईएनएस अग्रय (INS Agray) – को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। इस महत्वपूर्ण समारोह की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करेंगे। इन तीनों युद्धपोतों का भारतीय नौसेना में शामिल होना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित ये युद्धपोत समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी-रोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता, समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा को नया बल मिलेगा।

INS दूनागिरी: आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट
प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित आईएनएस दूनागिरी भारतीय नौसेना की पांचवीं स्टील्थ फ्रिगेट है। यह युद्धपोत अत्याधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से लैस है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली शामिल है।
विशेषज्ञों के अनुसार दूनागिरी भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता को कई गुना बढ़ाएगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगी। इसकी स्टील्थ तकनीक दुश्मन के रडार से बचने में मदद करती है, जिससे यह युद्ध परिस्थितियों में अधिक प्रभावी साबित होगी।

INS संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण का आधुनिक प्लेटफॉर्म
आईएनएस संशोधक एक सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large) है, जिसे तटीय और गहरे समुद्री क्षेत्रों में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह रक्षा और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए समुद्र विज्ञान और भू-भौतिकीय आंकड़े एकत्र करने में सक्षम है।
इस पोत में आधुनिक सर्वेक्षण प्रणालियां, स्वायत्त जलमग्न वाहन (AUV) और रिमोट संचालित अंडरवाटर वाहन (ROV) लगाए गए हैं। इन तकनीकों की मदद से समुद्र की गहराइयों का सटीक अध्ययन किया जा सकेगा। यह पोत समुद्री मानचित्रण, बंदरगाह विकास और नौवहन सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

INS अग्रय: पनडुब्बी-रोधी अभियान का विशेषज्ञ
अरनाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट के तहत निर्मित आईएनएस अग्रय उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। यह हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक सोनार प्रणाली से लैस है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच अग्रय भारतीय तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह युद्धपोत दुश्मन की पनडुब्बियों की निगरानी और उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है।
आत्मनिर्भर भारत को मिली नई ताकत
इन तीनों युद्धपोतों की सबसे बड़ी विशेषता इनका स्वदेशी निर्माण है। इनमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इनके निर्माण में 200 से अधिक भारतीय एमएसएमई और विभिन्न उद्योगों की भागीदारी रही, जिससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित हुए।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन युद्धपोतों का नौसेना में शामिल होना केवल सैन्य शक्ति में वृद्धि नहीं बल्कि भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण है। यह भारत सरकार, भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्डों और निजी उद्योगों के सफल सहयोग का उदाहरण है।
21 जून को होने वाला यह कमीशनिंग समारोह भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाएगा।









































