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Parsudih पुलिस की बड़ी कार्रवाई डकैती की साजिश रचने वाले गिरोह के दो फरार आरोपी गिरफ्तार पहले हथियार के साथ पकड़े जा चुके थे पांच बदमाश

On: July 6, 2026 6:34 PM
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जमशेदपुर: Parsudih थाना क्षेत्र में डकैती की योजना बना रहे अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस ने उस मामले में दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें बीते 25 अक्टूबर 2024 को छोटा गोबिंदपुर स्थित एक नवनिर्मित फ्लैट में कुछ लोगों के अवैध हथियार के साथ एक बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की योजना बनाने की सूचना मिली थी। इस मामले में पहले ही पांच आरोपियों को पकड़ा जा चुका था, जिनमें से एक के पास से देशी कट्टा और जिंदा गोली बरामद हुई थी। अब गिरफ्तार आरोपियों के बयान और आगे की छानबीन के आधार पर फरार चल रहे दो अन्य आरोपियों को भी दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया गया है।

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पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई परसुडीह थाना कांड संख्या 144/24 से जुड़ी है, जो 25 अक्टूबर 2024 को दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 310(4), 310(5) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B)a, 26 और 35 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस का कहना है कि गिरोह एक बड़ी वारदात की तैयारी में था और समय रहते की गई छापेमारी से संभावित डकैती की साजिश को विफल कर दिया गया।

25 अक्टूबर 2024 की शाम मिली थी गुप्त सूचना

पुलिस को 25 अक्टूबर 2024 की शाम करीब 5 बजे वरीय पदाधिकारी के माध्यम से एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। सूचना में बताया गया था कि Parsudih थाना क्षेत्र के छोटा गोबिंदपुर में काली मंदिर के पास स्थित माँ कंसट्रक्सन के नवनिर्मित फ्लैट में कुछ अपराधी एकत्र हुए हैं। बताया गया कि ये लोग अवैध हथियार से लैस हैं और डकैती की योजना बनाकर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी कर रहे हैं।

सूचना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई का निर्णय लिया गया। इसके बाद परसुडीह थाना पुलिस ने एक छापामारी टीम का गठन किया और बताए गए स्थान पर विधिवत छापेमारी की। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने पूरे मामले की दिशा तय कर दी और मौके से कई संदिग्धों को दबोच लिया गया।

छापेमारी में पांच आरोपियों को पकड़ा गया, एक के पास मिला देशी कट्टा

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से पांच लोगों को पकड़ा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुजल घोष, दिनेश पात्रो उर्फ शुरू बाबू, राकेश पाल उर्फ सोना भगत, सनूप गोप और असिम दास के रूप में हुई। पुलिस ने सभी की विधिवत तलाशी ली। तलाशी के दौरान राकेश पाल उर्फ सोना भगत के पास से एक देशी कट्टा और एक जिंदा गोली बरामद की गई।

पुलिस के अनुसार, हथियार की बरामदगी ने इस आशंका को और मजबूत किया कि आरोपी किसी गंभीर आपराधिक घटना की तैयारी में थे। मौके से पकड़े गए सभी पांच आरोपियों को 25 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद 26 अक्टूबर 2024 को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। प्रारंभिक पूछताछ और आगे की जांच में पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

गिरफ्तार आरोपियों के बयान में सामने आए दो और नाम

पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने कथित रूप से इस आपराधिक योजना में शामिल अन्य व्यक्तियों के नाम बताए। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयान में लखीकांत गोप उर्फ बेगी और समीर गोप उर्फ पोल्टु गोप के नाम सामने आए। दोनों उस समय से फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी।

जांच में सामने आया कि ये दोनों भी उसी साजिश का हिस्सा थे, जिसके तहत छोटा गोबिंदपुर में एक बड़ी डकैती की योजना बनाई जा रही थी। बयान और अन्य सुरागों के आधार पर पुलिस ने इन दोनों की तलाश तेज की और लगातार छापेमारी अभियान चलाया। आखिरकार पुलिस को दोनों आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली।

फरार चल रहे लखीकांत गोप उर्फ बेगी और समीर गोप उर्फ पोल्टु गोप गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में फरार चल रहे दो आरोपियों—लखीकांत गोप उर्फ बेगी और समीर गोप उर्फ पोल्टु गोप—को गिरफ्तार कर लिया है। लखीकांत गोप उर्फ बेगी की उम्र करीब 35 वर्ष बताई गई है। वह छोटा गोबिंदपुर, काली मंदिर के पास का रहने वाला है और परसुडीह थाना क्षेत्र का निवासी है। वहीं, समीर गोप उर्फ पोल्टु गोप की उम्र करीब 34 वर्ष है। उसका वर्तमान पता छोटा गोबिंदपुर, सुभाषनगर, थाना परसुडीह बताया गया है, जबकि उसका स्थायी पता बंगालीबासा, थाना पोटका, जिला पूर्वी सिंहभूम है।

पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह की प्रस्तावित डकैती का लक्ष्य क्या था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे, और हथियारों की व्यवस्था कैसे की गई थी। पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

दर्ज कांड बीएनएस और आर्म्स एक्ट की धाराओं में कार्रवाई

इस पूरे मामले में परसुडीह थाना कांड संख्या 144/24, दिनांक 25/10/2024 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 310(4) और 310(5) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-B)a, 26 और 35 भी लगाई गई हैं। पुलिस के अनुसार, ये धाराएं अवैध हथियार रखने, उसके उपयोग की तैयारी तथा आपराधिक साजिश जैसे आरोपों से जुड़ी हैं।

मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या आरोपियों का संबंध किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से है। चूंकि प्रारंभिक छापेमारी में हथियार बरामद हुआ था और गिरोह के कई सदस्य अलग-अलग पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, इसलिए पुलिस अब इनके पुराने रिकॉर्ड, संपर्कों और संभावित आपराधिक गतिविधियों की भी जांच कर रही है।

गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही पुलिस

पुलिस की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार दोनों फरार आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। लखीकांत गोप उर्फ बेगी के खिलाफ परसुडीह थाना कांड संख्या 84/16, दिनांक 20 मार्च 2016 दर्ज है। इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 386, 387, 379, 427 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

वहीं, समीर गोप उर्फ पोल्टु गोप के खिलाफ भी कई मामले दर्ज बताए गए हैं। उसके खिलाफ परसुडीह थाना कांड संख्या 271/18, दिनांक 26 नवंबर 2018 में धारा 341, 323, 387, 504, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसके अलावा उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले भी दर्ज रहे हैं, जिनमें जीआर 2676/10 और बहरागोड़ा एसटी नंबर 38/11 का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)A, 26 और 35 के तहत कार्रवाई का उल्लेख है। पुलिस अब इस इतिहास को भी मौजूदा जांच से जोड़कर देख रही है।

गिरोह की मंशा और संभावित लक्ष्य की जांच जारी

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआती सूचना में यह स्पष्ट था कि अपराधी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। हालांकि प्रस्तावित डकैती का सटीक लक्ष्य क्या था, इसे लेकर पुलिस आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं कर रही है। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गिरोह किस स्थान को निशाना बनाने वाला था, क्या उसके पास कोई पूर्व रेकी या योजना थी, और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे।

यह भी जांच का विषय है कि आरोपियों ने जिस नवनिर्मित फ्लैट को जुटान के लिए चुना, उसका उपयोग केवल बैठक स्थल के रूप में किया जा रहा था या वहां से किसी बड़े नेटवर्क का संचालन हो रहा था। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में इस पूरे नेटवर्क, हथियारों के स्रोत और संभावित वारदात के तौर-तरीकों को लेकर और जानकारियां सामने आ सकती हैं।

छापेमारी टीम में शामिल रहे ये पुलिस पदाधिकारी और कर्मी

इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए परसुडीह थाना की ओर से गठित छापेमारी टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम में अविनाश कुमार, पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी, परसुडीह थाना; रितेश कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक; संदीप कुमार सिंह, सहायक अवर निरीक्षक; तथा संतोष कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। टीम ने सूचना मिलते ही तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और संदिग्धों को पकड़ने में सफलता हासिल की।

पुलिस की इस कार्रवाई को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यदि सूचना पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो एक बड़ी आपराधिक घटना हो सकती थी। छापेमारी टीम ने न केवल मौके से आरोपियों को पकड़ा, बल्कि हथियार बरामद कर मामले की गंभीरता को भी उजागर किया। बाद में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी ने जांच को और मजबूत आधार दिया।

समय रहते कार्रवाई से टली बड़ी वारदात की आशंका

Parsudih पुलिस की इस कार्रवाई को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस को मिली गुप्त सूचना पर त्वरित कार्रवाई, मौके पर छापेमारी, हथियार की बरामदगी, पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और बाद में फरार दो आरोपियों की धरपकड़—इन सभी पहलुओं ने यह संकेत दिया है कि पुलिस ने संभावित बड़ी वारदात को समय रहते रोकने में अहम भूमिका निभाई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस आगे भी जांच जारी रखे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और क्या इसके तार अन्य घटनाओं से भी जुड़े हुए हैं। फिलहाल पुलिस इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की जांच कर रही है।

Parsudih थाना क्षेत्र के छोटा गोबिंदपुर में डकैती की कथित योजना से जुड़े मामले में दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी ने पुलिस जांच को नई दिशा दी है। 25 अक्टूबर 2024 को मिली गुप्त सूचना से शुरू हुई यह कार्रवाई अब एक बड़े आपराधिक नेटवर्क की पड़ताल तक पहुंच सकती है। पहले पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी, फिर स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर दो अन्य आरोपियों की धरपकड़—इन सबने मामले को और गंभीर बना दिया है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस की आगे की जांच में क्या नए खुलासे होते हैं। फिलहाल इतना तय है कि समय पर की गई कार्रवाई से संभावित बड़ी वारदात टल गई और पुलिस ने एक सक्रिय गिरोह के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

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