
Against Fascism: झारखंड की राजधानी रांची के सोशल डेवलपमेंट सेंटर, रांची में जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित 17वां दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज से शुरू हो गया है।

12 और 13 जुलाई 2025 तक चलने वाला यह महत्वपूर्ण आयोजन फासीवाद की विभाजनकारी संस्कृति के खिलाफ जनता की एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देशभर से साहित्यकार, फिल्मकार, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद और बुद्धिजीवी एक मंच पर आकर अपने विचारों, अनुभवों और संघर्षों को साझा कर रहे हैं।
सम्मेलन का उद्देश्य और महत्व: Against Fascism
यह राष्ट्रीय सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब देश में सामाजिक विभाजन और असहिष्णुता की चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। जन संस्कृति मंच का यह प्रयास कला, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से लोगों को एकजुट करने और फासीवादी ताकतों द्वारा फैलाई जा रही नफरत और विभाजनकारी एजेंडे का मुकाबला करने पर केंद्रित है। सम्मेलन में यह बात प्रमुखता से उठाई जा रही है कि कैसे कला और साहित्य समाज में जागरूकता फैलाने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रमुख हस्तियों की भागीदारी: Against Fascism
इस प्रतिष्ठित मंच पर विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज उपस्थित थे, जिनमें प्रसिद्ध साहित्यकार, समीक्षक, पुरस्कृत फिल्म निर्माता और जमीनी स्तर पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, कई प्रमुख कॉलेजों के प्रोफेसर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जो शिक्षा और अकादमिक जगत से सामाजिक आंदोलनों को मिल रहे समर्थन को दर्शाता है। ये सभी दिग्गज अपने-अपने अनुभवों, कार्यों और संघर्षों को साझा करते हुए वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर गंभीर चिंतन कर रहे हैं।
चक्रधरपुर के साहित्यकारों की उपस्थिति: Against Fascism
इस महत्वपूर्ण आयोजन में झारखंड के चक्रधरपुर से भी दो प्रमुख साहित्यकार – श्री जवाहर लाल बाँकिरा और श्री रबिन्द्र गिलुवा – चाईबासा से रबिन्द्र अल्डा,रांची से श्रीमती सोनी कुमारी,श्रीमती नीलिमा सुरीन, श्रीमती सरिता मुण्डा शामिल हुए हैं। उनकी भागीदारी से स्थानीय साहित्य और संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिल रही है। दोनों साहित्यकार अपने क्षेत्र के अनुभवों और साहित्यिक योगदानों को साझा कर रहे हैं, जो सम्मेलन में विविधता और गहनता ला रहा है।
Against Fascism: चर्चा के प्रमुख बिंदु
सम्मेलन में सामाजिक एकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और फासीवादी विचारधारा के खतरों जैसे विषयों पर गहन चर्चा हो रही है। प्रतिभागियों का मानना है कि साहित्य और कला केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज को दिशा देने, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और लोगों को एक साथ लाने का सशक्त माध्यम हैं।
यह दो दिवसीय कार्यक्रम निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और फासीवाद के खिलाफ जनता की एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
- जय कुमार, चक्रधरपुर












































