मौसम मनोरंजन चुनाव टेक्नोलॉजी खेल क्राइम जॉब सोशल लाइफस्टाइल देश-विदेश व्यापार मोटिवेशनल मूवी धार्मिक त्योहार Inspirational गजब-दूनिया
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

“मंदिर में सिर्फ पर्चा बांटना अपराध नहीं”: कर्नाटक हाईकोर्ट ने मुस्लिम युवकों के खिलाफ FIR रद्द की

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427
On: July 25, 2025 10:58 PM
Follow Us:
Add A Heading 9 7
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

बेंगलुरु: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि मंदिर परिसर में इस्लाम धर्म से संबंधित पर्चे बांटना और मौखिक रूप से उसकी शिक्षाओं की जानकारी देना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। जस्टिस वेंकटेश नाइक टी की एकल पीठ ने तीन मुस्लिम युवकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

क्या था मामला?

शिकायतकर्ता के अनुसार, 4 मई 2025 को शाम 4:30 बजे, वह बागलकोट जिले के जामखंडी स्थित रामतीर्थ मंदिर गया था। वहाँ उसे कुछ युवक इस्लाम से संबंधित पर्चे बाँटते हुए और मौखिक रूप से धर्म के बारे में बताते नजर आए।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि युवकों ने हिंदू धर्म के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की और लोगों को इस्लाम अपनाने के लिए गाड़ी और दुबई में नौकरी जैसे प्रलोभन दिए।

किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ?

पुलिस ने युवकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की निम्नलिखित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था:

  • धारा 299 (उपद्रव)
  •  धारा 351(2) (धार्मिक भावना भड़काना)
  •  धारा 3(5)
  •  कर्नाटक धर्म स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2022 की धारा 5
THE NEWS FRAME

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि:

सिर्फ किसी धार्मिक स्थल पर प्रचार सामग्री बाँटना और अपनी मान्यता के बारे में बात करना अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक कि इसके साथ धर्मांतरण की कोई ठोस कोशिश या प्रमाण न हो। कोर्ट ने कहा कि FIR में धर्मांतरण के कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं, और इस आधार पर आरोप कानूनन टिकाऊ नहीं हैं।

वकील का तर्क:

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आरोपियों ने किसी को इस्लाम में परिवर्तित करने का प्रयास नहीं किया, बल्कि वे केवल अल्लाह और पैगंबर मुहम्मद साहब की शिक्षाओं का शांतिपूर्ण प्रचार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल मौखिक संवाद और साहित्य वितरण को धर्मांतरण की कोशिश नहीं माना जा सकता।

अदालत ने तीनों युवकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जब तक स्पष्ट और ठोस प्रमाण न हों, केवल प्रचार को आपराधिक गतिविधि नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार है, जिसे सीमित नहीं किया जा सकता जब तक कोई वास्तविक अवैध कृत्य न हो।

यह फैसला धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति के अधिकार और प्रचार की संवैधानिक सीमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।

Ce94618781f51ab2727e4c0bd2ddd427

Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

Leave a Comment