मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

पेसा के नाम पर आदिवासियों को धोखा दे रही है झारखंड सरकार चम्पाई सोरेन

C76c181512a7978bdd2551cb013ba211
On: January 27, 2026 9:22 AM
Follow Us:
WhatsApp Image 2026 01 26 At 4.32.13 PM 1
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

पटमदा/जमशेदपुर:-झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार द्वारा लागू की गई पेसा नियमावली को लेकर तीखा हमला बोला है। पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत बनातोड़िया (फातेबांद) में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने पेसा के नाम पर आदिवासियों के साथ धोखा किया है और ग्राम सभाओं से उनके संवैधानिक अधिकार छीन लिए हैं।

A 2

चम्पाई सोरेन ने कहा कि राज्य का आदिवासी समाज वर्षों से पेसा कानून के सही तरीके से लागू होने का इंतजार कर रहा था, लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा बनाई गई नियमावली को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि इसमें ग्राम सभा को सशक्त करने के बजाय कमजोर किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियमावली के जरिए ग्राम सभा के अधिकारों को लगभग समाप्त कर दिया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस समय तैयार की गई पेसा नियमावली में सीएनटी-एसपीटी एक्ट के उल्लंघन के मामलों में जमीन की वापसी का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया था। इसके साथ ही अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी भूमि हस्तांतरण से पहले उपायुक्त को ग्राम सभा से अनुमति लेने का प्रावधान था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इन सभी अधिकारों को खत्म कर दिया है।

राज्य सरकार पर सीधा हमला करते हुए चम्पाई सोरेन ने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोगों पर ही सीएनटी एक्ट उल्लंघन के आरोप हों, तो उनसे ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने दावा किया कि अपने मात्र पांच महीने के कार्यकाल में उन्होंने आदिवासी हित में जो कदम उठाए, मौजूदा सरकार उससे आगे बढ़ने में पूरी तरह विफल रही है।

उन्होंने कहा कि पेसा अधिनियम 1996 राज्यों को यह निर्देश देता है कि वे आदिवासी समाज की रूढ़िजन्य विधि, सामाजिक-धार्मिक परंपराओं और संसाधनों के पारंपरिक प्रबंधन के अनुरूप नियमावली बनाएं, लेकिन झारखंड सरकार की नियमावली में ये सभी मूल विषय गायब हैं।

चम्पाई सोरेन ने आरोप लगाया कि पेसा का मूल उद्देश्य आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण देना है, लेकिन सरकार उन लोगों को लाभ पहुंचाना चाहती है, जो आदिवासी परंपराओं से पहले ही कट चुके हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पहले ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (TAC) और अब पेसा से राज्यपाल को बाहर कर, सारे अधिकार उपायुक्त को सौंपे जा रहे हैं, ताकि सरकार पूरी व्यवस्था पर नियंत्रण रख सके। यह पेसा की मूल भावना के पूरी तरह खिलाफ है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले से ही बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण की दोहरी मार झेल रहा आदिवासी समाज गंभीर संकट में है और इस पेसा नियमावली के जरिए राज्य सरकार आदिवासियों को जड़ से खत्म करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने आदिवासी समाज से एकजुट होकर इसके खिलाफ संघर्ष करने का आह्वान किया।

इस जनसभा में बड़ी संख्या में पारंपरिक ग्राम प्रधान, मांझी बाबा, परगना बाबा सहित आदिवासी समाज के लोग उपस्थित

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

Leave a Comment

Link copied