
- चाकुलिया एयरबेस—जहां से जुड़ी है दुनिया के सबसे बड़े हमले की कहान
जमशेदपुर : Chakulia एयरबेस आज भी द्वितीय विश्व युद्ध की याद दिलाता है। यह वही जगह है जहां से उस समय बड़े सैन्य काम किए जाते थे और जिसने युद्ध में अहम भूमिका निभाई।

परमाणु हमले से जुड़ा संबंध
6 और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए थे। इन हमलों में इस्तेमाल हुए B-29 Superfortress विमान का शुरुआती काम और ट्रेनिंग चाकुलिया और धालभूमगढ़ एयरबेस से जुड़ा था।
हालांकि अंतिम हमला टिनियन द्वीप से किया गया था, लेकिन इन विमानों की तैयारी में चाकुलिया की बड़ी भूमिका रही।
क्यों खास था चाकुलिया एयरबेस?
यह एयरबेस 1942 में अंग्रेजों ने बनाया था और इसे गुप्त रखा गया था। यह घने जंगलों के बीच था, इसलिए दुश्मनों की नजर से बचा रहता था।
उस समय जापान ने समुद्र के रास्तों पर कब्जा कर लिया था, इसलिए अमेरिका के विमानों को हिमालय के ऊपर से उड़ान भरनी पड़ती थी, जिसे “द हम्प” कहा जाता था। चाकुलिया इसी रास्ते का मुख्य केंद्र था। यहां से विमान चीन तक सामान और ईंधन पहुंचाते थे।
बहरागोड़ा में मिले बम क्या बताते हैं?
हाल ही में बहरागोड़ा के पानीपड़ा गांव में कुछ पुराने बम मिले हैं। इससे पता चलता है कि यह इलाका युद्ध के समय बहुत महत्वपूर्ण था।
चाकुलिया और धालभूमगढ़ के बीच का इलाका चीन-बर्मा-भारत थिएटर का हिस्सा था, जहां से सैन्य गतिविधियां चलाई जाती थीं।
उस समय विमान पहले चीन जाते थे, वहां से ईंधन लेकर जापान पर हमला करते थे। बाद में जब अमेरिका ने दूसरे द्वीपों पर कब्जा कर लिया, तो वहीं से अंतिम परमाणु हमला किया गया।
चाकुलिया एयरबेस सिर्फ एक पुरानी हवाई पट्टी नहीं है, बल्कि इतिहास का एक अहम हिस्सा है। यहां से जुड़ी घटनाएं बताती हैं कि झारखंड का यह इलाका भी विश्व युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।














