
दुबई: पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव के बीच अमेरिका और Iran के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते का मसौदा सामने आया है। मसौदे के अनुसार ईरान ने भविष्य में परमाणु हथियार (न्यूक्लियर वेपन) विकसित या हासिल नहीं करने का वादा किया है। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे तेल निर्यात संबंधी प्रतिबंधों में राहत देने और लगभग 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने पर सहमत हुआ है। हालांकि यह अभी एक प्रस्तावित मसौदा (ड्राफ्ट एग्रीमेंट) है और अंतिम समझौते पर आगे बातचीत होनी बाकी है।

न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता
मसौदे के अनुसार Iran ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह परमाणु हथियारों का निर्माण नहीं करेगा और न ही उन्हें हासिल करने का प्रयास करेगा। इसके साथ ही ईरान ने अपनी मौजूदा परमाणु गतिविधियों को सीमित रखने और नए संवर्धन (यूरेनियम एनरिचमेंट) या नई परमाणु सुविधाओं के विस्तार से बचने पर भी सहमति जताई है। यह कदम लंबे समय से चल रहे अंतरराष्ट्रीय विवाद को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेल प्रतिबंधों में मिलेगी राहत
समझौते का सबसे बड़ा आर्थिक पहलू यह है कि अमेरिका ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए कई प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देगा। इससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से तेल बेच सकेगा और उसे विदेशी मुद्रा प्राप्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी और कच्चे तेल की कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
25 अरब डॉलर की जमी संपत्तियां होंगी जारी
ड्राफ्ट समझौते के अनुसार अमेरिका और सहयोगी देश ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमत हुए हैं। यह राशि नकद हस्तांतरण, वित्तीय क्रेडिट लाइन और क्षेत्रीय सहयोगी देशों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से प्रतिबंधों के कारण दबाव में रही है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर भी सहमति
समझौते में यह भी प्रस्ताव है कि ईरान वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, इसलिए इसका खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
60 दिनों तक होगी अंतिम समझौते पर बातचीत
सूत्रों के अनुसार यह केवल प्रारंभिक समझौता है। अंतिम व्यापक समझौते के लिए दोनों देशों के बीच अगले 60 दिनों तक तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रहेगी। इसी दौरान यूरेनियम भंडार, परमाणु निरीक्षण और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है सकारात्मक असर
यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, शेयर बाजार और वैश्विक व्यापार को राहत मिल सकती है। ईरान के तेल निर्यात में बढ़ोतरी से सप्लाई मजबूत होगी और ऊर्जा संकट कम होने की संभावना है। कई आर्थिक विशेषज्ञ इसे मध्य पूर्व में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं।
अभी अंतिम समझौता नहीं आगे की वार्ता महत्वपूर्ण
हालांकि दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से अंतिम समझौते की घोषणा अभी नहीं हुई है। कई तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है। इसलिए आने वाले सप्ताह इस वार्ता के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
Iran द्वारा परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता और इसके बदले तेल प्रतिबंधों में राहत तथा 25 अरब डॉलर की संपत्तियों की रिहाई का प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। यदि यह समझौता सफल होता है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होने, वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिलने और ईरान की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए अभी दोनों देशों के बीच विस्तृत वार्ता जारी रहेगी।








































