झारखंड: गिरिडीह जिले से सामने आया एक सनसनीखेज Murder पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। इंदौर के चर्चित सोनम रघुवंशी केस और पुणे के केतन अग्रवाल-सिया गोयल मामले के बाद अब गिरिडीह में भी शादी से ठीक तीन दिन पहले होने वाले दूल्हे की हत्या का मामला सामने आया है।
पुलिस जांच के अनुसार, इस हत्याकांड की मुख्य साजिशकर्ता मृतक की मंगेतर उर्मिला बताई जा रही है, जिसने अपने प्रेमी और रिश्ते में लगने वाले जीजा सुभाष पासवान के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला झारखंड के गिरिडीह जिले के जमुआ थाना क्षेत्र का है। जमुआ चौक निवासी शुभम हाजरा ने अपने इकलौते बेटे 20 वर्षीय नीरज हाजरा की शादी उर्मिला नाम की युवती से तय की थी। परिवार में शादी की तैयारियां जोरों पर थीं और 7 जुलाई को विवाह होना था।
नीरज राजस्थान में नौकरी करता था और शादी में शामिल होने के लिए 4 जुलाई को अपने घर लौट रहा था। ट्रेन से उतरने के बाद उसने अपने पिता को फोन कर बताया कि वह स्टेशन पहुंच चुका है। पिता उसे लेने निकले, लेकिन उससे पहले ही उसका होने वाला साढ़ू सुभाष पासवान उसे अपने साथ ले गया। इसके बाद नीरज अचानक लापता हो गया।
जब परिजनों ने सुभाष से पूछताछ की तो उसने दावा किया कि वह नीरज को रास्ते में छोड़ चुका है। हालांकि इसके बाद नीरज का कोई सुराग नहीं मिला।
शादी नहीं करना चाहती थी उर्मिला
पुलिस जांच में सामने आया कि उर्मिला का अपने ही जीजा सुभाष पासवान के साथ पिछले करीब ढाई साल से प्रेम संबंध था। दोनों एक-दूसरे के साथ रहना चाहते थे और उर्मिला किसी अन्य व्यक्ति से शादी नहीं करना चाहती थी।

जब परिवार ने उसकी शादी नीरज से तय कर दी, तब दोनों ने इस रिश्ते को खत्म करने के बजाय नीरज को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पहले से पूरी योजना बनाई थी ताकि हत्या के बाद किसी को उन पर शक न हो।
जंगल में बुलाकर की गई बेरहमी से हत्या
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन उर्मिला ने नीरज को फोन कर झारखंड-बिहार सीमा के पास स्थित बेला जंगल में मिलने के लिए बुलाया। नीरज बिना किसी शक के वहां पहुंच गया।
जैसे ही वह जंगल के सुनसान इलाके में पहुंचा, वहां पहले से मौजूद सुभाष पासवान ने उस पर चाकू से कई वार किए। हमले में नीरज की मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या के बाद आरोपियों ने शव को बिहार के जमुई जिले के बीचकोड़वा जंगल में फेंक दिया। पुलिस के मुताबिक उनका मकसद था कि जंगली जानवर शव को नष्ट कर दें और हत्या के सबूत मिट जाएं।
पांच दिन बाद मिला शव
नीरज के घर नहीं पहुंचने पर उसके पिता ने 5 जुलाई को जमुआ थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने शुरुआती जांच शुरू की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
करीब पांच दिन बाद बिहार के जमुई जिले के बीचकोड़वा जंगल से नीरज का शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पुलिस ने ऐसे सुलझाई मर्डर मिस्ट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने एसडीपीओ अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल के आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों की लोकेशन खंगाली। इसी दौरान पता चला कि हत्या के समय उर्मिला का मोबाइल भी बेला जंगल के आसपास सक्रिय था।
इस सुराग के आधार पर पुलिस ने उर्मिला से पूछताछ की। शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ के बाद उसने पूरी साजिश स्वीकार कर ली।
मुख्य आरोपी ने कबूला जुर्म
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मुख्य आरोपी सुभाष पासवान ने पूछताछ में नीरज की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली है।
उसकी निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए दो चाकू, एक स्कूटी, एक मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है और झारखंड व बिहार के कई इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है।

शुरुआती जांच में लापरवाही के आरोप
इस मामले में स्थानीय लोगों ने जमुआ थाना पुलिस पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि गुमशुदगी की शिकायत के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की होती तो शायद कुछ अहम सुराग पहले मिल सकते थे।
मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट मांगी गई है।
पुणे के चर्चित केस से क्यों हो रही तुलना?
गिरिडीह का यह मामला पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल-सिया गोयल हत्याकांड से काफी मिलता-जुलता बताया जा रहा है।
पुणे मामले में भी आरोप था कि मंगेतर ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर होने वाले पति की हत्या की साजिश रची थी। वहीं गिरिडीह मामले में भी पुलिस का दावा है कि उर्मिला ने अपने प्रेमी और जीजा सुभाष पासवान के साथ मिलकर नीरज को मौत के घाट उतरवाया।
हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं और दोनों की जांच अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की गई है।
पुलिस की जांच अभी जारी
फिलहाल गिरिडीह पुलिस इस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर भी है कि क्या हत्या की योजना में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी प्रमाणों की भी जांच कर रही है।
यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
गिरिडीह का नीरज हाजरा Murder रिश्तों में विश्वासघात और सुनियोजित अपराध का एक बेहद दर्दनाक उदाहरण बनकर सामने आया है। शादी से महज तीन दिन पहले जिस युवक के घर में खुशियां आने वाली थीं, वहीं उसके परिवार को अपनों की साजिश के कारण असहनीय दुख झेलना पड़ा।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपियों की अंतिम कानूनी जिम्मेदारी और दोष तय होगा।


















