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Ranchi में ‘आदि वार्ता’ का शानदार आगाज़: आदिवासी साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर मंथन

On: June 6, 2026 8:18 PM
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Ranchi (जय कुमार): रांची के मोराबादी स्थित प्रतिष्ठित ‘ऑड्रे हाउस’ (Audrey House) में आज से दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम “आदि वार्ता” का उत्साहपूर्ण आगाज़ हुआ। यह कार्यक्रम “लोकतंत्र 19” और “टीम धूमकुड़िया” के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इस ‘आदि वार्ता’ में देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से आए आदिवासी बुद्धिजीवी, साहित्यकार, और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं, जो आदिवासी समुदाय के मुद्दों, उनकी समृद्ध संस्कृति और साहित्य पर गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में चक्रधरपुर के उभरते युवा साहित्यकार रबिन्द्र गिलुवा ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई। उनके साथ उनकी रिसर्च असिस्टेंट अमीषा गागराई भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। रबिन्द्र गिलुवा की उपस्थिति इस मायने में खास है कि जहाँ आज का युवा अक्सर आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी संस्कृति और जड़ों से दूर होता जा रहा है, वहीं रबिन्द्र साहित्य के माध्यम से अपनी परंपराओं को बचाने और समाज को सही दिशा देने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।

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‘आदिवासी साहित्य और कविता’ सत्र में गंभीर चर्चा: कार्यक्रम के दौरान “आदिवासी साहित्य और कविता – मानवीय संवेदना और प्रतिरोध” विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में रबिन्द्र गिलुवा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। रबिन्द्र ने आदिवासी साहित्य में ‘किलि’ (गोत्र) परंपरा के महत्व पर अपने चल रहे शोध (रिसर्च) पर प्रकाश डाला। उन्होंने आदिवासी साहित्य को मानवीय संवेदनाओं का आईना बताया और इस बात पर जोर दिया कि कैसे साहित्य प्रतिरोध और अपनी पहचान को अक्षुण्ण रखने का एक सशक्त माध्यम है।

इस सत्र में रबिन्द्र के साथ देश के ख्यातिप्राप्त वरिष्ठ साहित्यकार और विचारक महादेव टोप्पो, प्रसिद्ध कवयित्री व साहित्यकार मोनिका भूमिज और प्रियंका उरांव भी मंच पर विराजमान रहे। सभी वक्ताओं ने आदिवासी साहित्य के वर्तमान परिदृश्य, उसकी चुनौतियों और युवाओं को साहित्य की दुनिया में कदम रखने की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने रेखांकित किया कि युवाओं को अपनी समृद्ध मौखिक परंपरा को लिखित साहित्य का हिस्सा बनाने के लिए आगे आना चाहिए।

‘आदि वार्ता’ का यह दो दिवसीय आयोजन न केवल आदिवासी साहित्य और संस्कृति पर मंथन का एक मंच है, बल्कि यह आदिवासी समाज के युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने का एक सार्थक प्रयास भी है।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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