
चक्रधरपुर: चक्रधरपुर प्रखंड के नलिता पंचायत अंतर्गत नलिता गांव में Rojo पर्व के शुभ अवसर पर पारंपरिक छऊ नृत्य एवं भव्य मेले का आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। इस अवसर पर पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल देखने को मिला। हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने कार्यक्रम में भाग लेकर लोक संस्कृति और परंपराओं का आनंद उठाया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. विजय सिंह गागराई शामिल हुए। उन्होंने आयोजन स्थल पहुंचकर छऊ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम देर रात तक सांस्कृतिक उल्लास और पारंपरिक रंगों के बीच संपन्न हुआ।
रामायण और महाभारत की झलकियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक छऊ नृत्य रहा, जिसमें कलाकारों ने रामायण, महाभारत और अन्य पौराणिक कथाओं पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। रंग-बिरंगे परिधानों, आकर्षक मुखौटों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर कलाकारों ने अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन किया।
भगवान राम, हनुमान, अर्जुन, भीम और अन्य पौराणिक पात्रों की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
मेले में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़, मनोरंजन के साधनों का लिया आनंद
छऊ नृत्य के साथ-साथ आयोजित मेले में भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, खिलौने, मिठाइयां, खान-पान के स्टॉल और मनोरंजन के कई साधन आकर्षण का केंद्र बने रहे।
बच्चों ने झूले और खेलों का आनंद लिया, जबकि महिलाओं ने खरीदारी में रुचि दिखाई। ग्रामीणों ने परिवार और मित्रों के साथ मेले का भरपूर आनंद उठाया, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।
छऊ नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर डॉ. विजय सिंह गागराई
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. विजय सिंह गागराई ने कहा कि छऊ नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। यह लोककला हमारी सभ्यता, परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित रखने का कार्य करती है।
उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य के माध्यम से पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति का संरक्षण होता है। यह कला समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है और नई पीढ़ी को अपने इतिहास एवं परंपराओं से परिचित कराती है।
युवाओं से संस्कृति संरक्षण का किया आह्वान
डॉ. विजय सिंह गागराई ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि आधुनिकता के इस दौर में अपनी संस्कृति, भाषा और लोक परंपराओं को बचाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि युवा अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ेंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी इन परंपराओं को आगे बढ़ा सकेंगी।
उन्होंने कहा कि छऊ जैसी लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना चाहिए। सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल कलाकारों की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को देते हैं मजबूती
अपने संबोधन में उन्होंने आयोजन समिति को सफल कार्यक्रम के लिए बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन समाज में भाईचारा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले ऐसे आयोजन लोगों को एक मंच पर लाने का कार्य करते हैं, जिससे सामाजिक एकता मजबूत होती है और पारंपरिक संस्कृति को नई ऊर्जा मिलती है। भविष्य में भी ऐसे आयोजनों का निरंतर आयोजन होना चाहिए ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सके।
आदे मुंडा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ कार्यक्रम
पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता आदे मुंडा ने की। उन्होंने सभी अतिथियों, कलाकारों एवं ग्रामीणों का स्वागत करते हुए कहा कि रोजो पर्व की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे आगे भी पूरे उत्साह के साथ जारी रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि छऊ नृत्य और मेला ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक पहचान हैं तथा इन आयोजनों से समाज में आपसी मेलजोल और भाईचारा बढ़ता है।
आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में सचिव गुलाब सिंह कुम्हार सहित महेश मुंडा, राजेश मुंडा, ओदार मुंडा, बसंत मुंडा, नीलमोहन मुंडा, रोहित मुंडा, नटवर मुंडा, श्रीचंद गोप, महेश प्रधान, रूइदास सामद, घासीराम प्रधान, कार्तिक डांगील एवं मानसिंह डांगील की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम की सभी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। ग्रामीणों ने भी आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की।
देर रात तक चला सांस्कृतिक उत्सव हजारों लोगों ने उठाया आनंद
Rojo पर्व के अवसर पर आयोजित छऊ नृत्य और मेले का आनंद लेने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। देर रात तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम में हजारों दर्शकों की उपस्थिति रही।
पूरा वातावरण पारंपरिक संगीत, ढोल-नगाड़ों और जयघोष से गूंजता रहा। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों और मेले की रौनक ने लोगों को देर रात तक बांधे रखा।
लोक संस्कृति के संरक्षण का बना प्रेरणादायी मंच
नलिता गांव में आयोजित यह भव्य आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रेरणादायी संदेश भी देता नजर आया। छऊ नृत्य के माध्यम से पौराणिक कथाओं का जीवंत मंचन और मेले के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति की झलक ने आयोजन को विशेष बना दिया।
ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।









































