
बांदा की दो घटनाओं ने झकझोरा समाज का अंतःकरण
उत्तर प्रदेश (बांदा): आधुनिकता और तकनीक के इस दौर में भी हमारा समाज अंधविश्वास के गहरे दलदल और सामंती कूपमंडूकता से बाहर नहीं निकल पाया है। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से हाल ही में सामने आईं दो वीभत्स घटनाओं ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सामाजिक चेतना को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहाँ ‘गड़े धन’ की चाहत में एक पिता ने खुद अपनी ही 14 वर्षीय मासूम बेटी को एक ढोंगी तांत्रिक की हवस की भट्टी में झोंक दिया, वहीं दूसरी तरफ न्याय के लिए डटी एक दलित महिला की अस्मत पर सिर्फ इसलिए हमला किया गया क्योंकि उसने दबंगों के आगे झुकने और अपनी गवाही बदलने से मना कर दिया।
ये दोनों घटनाएँ यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि एक समाज के तौर पर हम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं?

घटना 1: कजरी और तंत्र-मंत्र की आड़ में मासूम से दरिंदगी
बांदा जिले के बबेरू इलाके से मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक ढोंगी तांत्रिक ने खेत में गड़ा हुआ धन निकालने का लालच देकर एक 14 साल की किशोरी के साथ बार-बार दुष्कर्म किया, जिसके कारण वह चार महीने की गर्भवती हो गई।
अंधविश्वास का वो भयावह खेल
पीड़िता के पिता के अनुसार, फरवरी 2026 में निरंजन दास श्रीवास्तव उर्फ नीरज महराज नाम का एक ढोंगी तांत्रिक गांव के ही गणेश पंडित के डेरे में आकर रहने लगा। जब पिता उसके बहकावे में आया, तो तांत्रिक ने दावा किया कि गांव के एक खेत में भारी धन गड़ा है, जिसे वह अपनी विद्या से निकाल सकता है। लेकिन इसके लिए उसने एक शर्त रखी—’कजरी’ लगाने की प्रक्रिया, जिसके लिए उसने रात के वक्त 14 वर्षीय मासूम बेटी को डेरे पर बुलाने को कहा।
अंधविश्वास में अंधा हो चुका पिता खुद अपनी बेटी को उस कुटिया में छोड़ आया। तांत्रिक ने तंत्र-मंत्र का ढोंग रचते हुए बच्ची की आँखों में कजरी लगाई और बाकी सभी लोगों को कुटिया से बाहर निकाल दिया। बंद दरवाजे के पीछे उस दरिंदे ने मासूम की अस्मत को तार-तार किया।
सर्वनाश की धमकी और खौफ का साया
यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। धन के लालच में अंधा पिता बार-बार अपनी बेटी को उस दरिंदे की कुटिया में भेजता रहा और वह बाबा तंत्र-मंत्र की आड़ में मासूम को हवस का शिकार बनाता रहा। विरोध करने पर तांत्रिक ने मासूम को धमकी दी थी कि अगर उसने किसी को कुछ भी बताया, तो उसके पूरे परिवार का ‘सर्वनाश’ हो जाएगा। खौफजदा बच्ची चुप रही, लेकिन जब उसका पेट बढ़ने लगा, तब जाकर 12 जून को परिजनों के सामने इस खौफनाक सच का खुलासा हुआ कि उनकी बेटी चार महीने की गर्भवती हो चुकी है।
पुलिस की कार्रवाई: इस मामले में कोतवाली प्रभारी राजेंद्र सिंह राजावत ने बताया कि पीड़ित पिता की तहरीर पर आरोपी तांत्रिक निरंजन दास के खिलाफ दुष्कर्म और पाक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।
घटना 2: सत्य की आवाज दबाने की कोशिश, सरेराह महिला से बर्बरता
बांदा के ही गिरवां इलाके में हुई दूसरी घटना सीधे तौर पर सामाजिक ताने-बाने और कमजोर तबके की सुरक्षा पर प्रहार करती है। यहाँ न्याय के पक्ष में खड़ी एक दलित महिला को दबंगों के प्रतिशोध का शिकार होना पड़ा।
बयान बदलने से मना करने पर सरेराह हमला
पीड़ित महिला ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि 3 मई की शाम करीब 6 बजे जब वह अपने खेत से लौट रही थी, तभी गांव के चार दबंगों—केशव, गौरव, निखिल और सौरभ ने उसे घेर लिया। इन चारों आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है और महिला इनमें से ही किसी एक मामले में अदालत में गवाही दे रही थी।
आरोपियों ने महिला को रोककर गाली-गलौज की और कहा, “तू हमारे खिलाफ बहुत गवाही देती है। अगर तूने अपना बयान नहीं बदला, तो तुझे कहीं मुंह दिखाने के लायक नहीं छोड़ेंगे।” जब उस साहसी महिला ने गलत गवाही देने और झुकने से साफ मना कर दिया, तो चारों आरोपियों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। आरोपी गौरव ने सरेराह महिला के कपड़े फाड़ दिए और उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया।समय पर आए राहगीर ने बचाई अस्मत
महिला ने जब हिम्मत दिखाते हुए शोर मचाया, तो पास से गुजर रहे एक राहगीर (नीलू उर्फ प्रकाश मिश्रा) ने उसकी आवाज सुन ली और वह मौके की तरफ दौड़ा। राहगीर को आते देख चारों आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए वहाँ से भाग खड़े हुए।
अधिकारियों का बयान: क्षेत्राधिकारी (CO) प्रवीण कुमार ने बताया कि आरोपियों पर पहले से भी कई मुकदमे दर्ज हैं। महिला की गवाही से बौखलाकर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने चारों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।एक संदेशात्मक विश्लेषण: कहाँ सोई है हमारी चेतना?
बांदा की ये दोनों घटनाएँ महज दो अलग-अलग अपराध नहीं हैं, बल्कि ये हमारे समाज की दो सबसे बड़ी सड़न को उजागर करती हैं—अंधविश्वास और दबंगई (कमजोरों पर अत्याचार)।
1. लालच और अंधविश्वास का आत्मघाती गठजोड़
बबेरू की घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि जब इंसान के मन में बिना मेहनत के धन पाने का ‘लालच’ और ‘अंधविश्वास’ घर कर जाता है, तो उसकी सोचने-समझने की शक्ति पूरी तरह नष्ट हो जाती है। एक पिता अपने ही खून को एक अजनबी ढोंगी के हवाले कर देता है, इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है? समाज को यह समझना होगा कि कोई भी मंत्र या कजरी जमीन से धन नहीं निकाल सकती। ऐसे ढोंगी बाबा सिर्फ और सिर्फ अपनी हवस और जेब भरने के लिए लोगों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाते हैं।
2. गवाहों की सुरक्षा और न्याय प्रणाली के आगे चुनौती
गिरवां की घटना हमारे देश की न्याय व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। अगर सच का साथ देने वाले गवाहों को सरेआम पीटा जाएगा, उनके कपड़े फाड़े जाएंगे और उन पर जानलेवा हमले होंगे, तो कल को कोई भी मजलूम अदालत की सीढ़ियाँ चढ़ने की हिम्मत नहीं कर पाएगा। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं है।
समाज से अपील
इन घटनाओं से हमें सबक लेने की जरूरत है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
इसके साथ ही, समाज के तौर पर हमारी भी जिम्मेदारी है:
- जागरूक बनें: अपने आस-पास किसी भी प्रकार के अंधविश्वास, जादू-टोने या ढोंग का पुरजोर विरोध करें।
- बच्चों से संवाद रखें: अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल दें ताकि वे किसी भी प्रकार के शोषण या धमकी का शिकार होने पर तुरंत माता-पिता से बात कर सकें।
- मजलूमों का साथ दें: जब भी कोई महिला या कमजोर व्यक्ति न्याय की लड़ाई लड़ रहा हो, तो समाज को एकजुट होकर उसके पीछे खड़ा होना चाहिए, न कि मूकदर्शक बने रहना चाहिए।
बांदा की इन बेटियों और महिलाओं की सिसकियाँ तब तक शांत नहीं होंगी, जब तक हम अपनी मानसिक संकीर्णता को छोड़कर एक जागरूक और संवेदनशील समाज का निर्माण नहीं करेंगे।













































