
जमशेदपुर (झारखंड) 26 अगस्त 2025: माँ दुर्गा के आगमन और प्रस्थान को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं! क्या ये कोई बड़ा ख़तरा है या कोई शुभ समाचार? देवी पक्ष की शुरुआत बस कुछ ही दिन दूर है! लेकिन उससे पहले सबके मन में एक ही सवाल है: इस बार माँ दुर्गा किस वाहन पर आ रही हैं? और किस वाहन पर वापस लौट रही हैं? क्योंकि प्रचलित मान्यता के अनुसार, माँ दुर्गा के आगमन और प्रस्थान का वाहन आने वाले साल की शुभ-अशुभ ख़बरें बताता है।

ज्योतिषियों से लेकर आम लोगों तक, सभी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि 2025 में माँ दुर्गा के आगमन और प्रस्थान का वाहन क्या होगा? कुछ लोग इसे किसी बड़े ख़तरे का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे सौभाग्य और समृद्धि का आगमन मान रहे हैं। हकीकत क्या है, आइए पश्चिम बंगाल के एक बेहद प्रसिद्ध व्यक्ति देवव्रतो पहाड़ी ब्राह्मण महाराज जी से जानते हैं। आपको बता दें कि देवव्रतो पहाड़ी ब्राह्मण महाराज जी पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। वे पिछले 32 वर्षों से माँ दुर्गा की पूजा कर रहे हैं और अपने क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि…
प्रश्न… आप क्या सोचते हैं? क्या यह आगमन और प्रस्थान वास्तव में हमारे भविष्य का मार्गदर्शन करता है? या यह केवल एक सामान्य लोककथा है?
उत्तर… हिंदू शास्त्रों के अनुसार, देवी का पृथ्वी और कैलाश पर आगमन और प्रस्थान का एक विशेष महत्व है। देवी जिस वाहन से पृथ्वी पर आती और जाती हैं, उसी से यह निर्धारित होता है कि पूरा वर्ष कैसा बीतेगा। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, दुर्गा जिस वाहन से आती और जाती हैं, उसी से यह निर्धारित होता है कि संसार में पूरा वर्ष कैसा बीतेगा।
प्रश्न… माँ दुर्गा का आगमन और प्रस्थान क्या है?
उत्तर… शास्त्रों के अनुसार, देवी का आगमन पूजा के सातवें दिन और प्रस्थान दसवें दिन होता है। देवी का आगमन और प्रस्थान इस बात पर निर्भर करता है कि ये दोनों दिन सप्ताह के किस दिन पड़ते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि सप्तमी रविवार या सोमवार हो, तो देवी का वाहन घोड़ा या हाथी होगा। यदि सप्तमी शनिवार या मंगलवार हो, तो देवी का वाहन घोड़ा या घोड़ी होगा। यदि सप्तमी गुरुवार या शुक्रवार हो, तो देवी का वाहन डोला या पालकी होगा। यदि सप्तमी बुधवार हो, तो देवी का वाहन नाव होगी। इसी प्रकार, यदि दशमी रविवार या सोमवार हो, तो देवी का वाहन घोड़ा होगा। यदि दशमी शनिवार या मंगलवार हो, तो देवी घोड़े पर प्रस्थान करेंगी। यदि दशमी गुरुवार या शुक्रवार हो, तो देवी डोला या पालकी पर प्रस्थान करेंगी। और यदि दशमी बुधवार हो, तो देवी अपनी नाव पर सवार होकर कैलाश लौट जाएँगी।
प्रश्न.. माँ दुर्गा किस वाहन पर आ रही हैं, माँ कैसे प्रस्थान करेंगी?
उत्तर.. इस वर्ष सप्तमी रविवार, 28 सितंबर को पड़ रही है। अतः दुर्गा हाथी पर आ रही हैं। विजयादशमी गुरुवार, 2 अक्टूबर को है। माँ दुर्गा झूले पर सवार होकर कैलाश लौट जाएँगी।
प्रश्न.. माँ के प्रस्थान पर आपकी क्या राय है, यह शुभ है या अशुभ?
उत्तर.. इस वर्ष माँ हाथी पर सवार होकर पृथ्वी पर आ रही हैं। हाथी ज्ञान, शांति और समृद्धि का प्रतीक है, इस वर्ष माँ का वाहन हाथी है अर्थात वे हाथी पर सवार होकर आ रही हैं।
प्रश्न.. हाथी की सवारी क्यों खास है?
उत्तर.. मान्यता है कि नवरात्रि में जब माँ रानी हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो बारिश की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इससे चारों ओर हरियाली छा जाती है और प्रकृति की सुंदरता अपने चरम पर होती है। तब फसलें भी बहुत अच्छी होती हैं। जब माँ रानी हाथी पर सवार होकर आती हैं, तो वे अन्न और धन के भंडार भर देती हैं। माँ का हाथी या नाव पर सवार होकर आना भक्तों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
विशेष रिपोर्ट: सौरभ कुमार, संवाददाता, झारखंड












































