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दर्जनों Chaiti छठ व्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य

On: March 25, 2026 5:55 PM
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Chaiti छठ का त्योहार आते ही वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार हो जाता है। जमशेदपुर के केबुल टाउन स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में हाल ही में दर्जनों चैती छठव्रतियों ने सूर्यदेव को अर्घ्य देकर विश्व कल्याण की कामना की। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामुदायिक एकता और सेवा भाव का भी शानदार उदाहरण पेश किया। दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य – इस घटना ने स्थानीय लोगों के दिलों को छू लिया। आइए, इस पवित्र आयोजन की पूरी कहानी को विस्तार से जानें, जहां सूर्य की किरणें आस्था की लहर बनकर उमड़ीं।

Chaiti छठ का महत्व क्यों है यह त्योहार खास?

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Chaiti छठ, जिसे चैत्र छठ भी कहा जाता है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि पर मनाया जाता है। यह कार्तिक मास के छठ महापर्व का छोटा रूप है, लेकिन इसकी महिमा किसी से कम नहीं। प्राचीन काल से ही सूर्यदेव की आराधना करने वाली यह परंपरा स्वास्थ्य, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक है। दर्जनों चैती छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य – इस आयोजन ने Chaiti छठ की इस परंपरा को जीवंत कर दिया।

व्रत रखने वाली महिलाएं 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत करती हैं। पहले दिन नहाय-खाय, फिर खरना, उसके बाद कजरी छठ और अंत में पारण। सूर्य को अर्घ्य देते समय अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को ठाकुरबाड़ी या जलाशय में खड़ी होकर अर्घ्य चढ़ाया जाता है। यह व्रत न केवल शारीरिक शुद्धि का माध्यम है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में यह आयोजन प्रकृति और आस्था के संतुलन को दर्शाता है।

Chaiti छठ के वैज्ञानिक लाभ

आधुनिक विज्ञान भी छठ पूजा के फायदों को मानता है। सूर्य की किरणें विटामिन डी प्रदान करती हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाती हैं। ठेकुआ और फलाहार जैसे प्रसाद पौष्टिक होते हैं। व्रत से डिटॉक्सिफिकेशन होता है, जो शरीर को स्वस्थ रखता है। इस बार दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य, जिससे सैकड़ों लोगों को इसकी प्रेरणा मिली।

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श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर आयोजन का शानदार केंद्र

जमशेदपुर के केबुल टाउन में बसा श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर हमेशा से भक्तों का प्रमुख धार्मिक स्थल रहा है। यहां मंदिर परिसर में बना तालाब इस छठ आयोजन का मुख्य आकर्षण बना। दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य – तालाब में खड़ी होकर उन्होंने सूर्य को अर्घ्य चढ़ाया। मंदिर की शानदार सजावट ने पूरे परिसर को दिव्य रूप दे दिया। फूलों की मालाओं, दीपकों और रंगोली से सजा यह स्थान स्वर्ग जैसा लग रहा था।

दोनों दिनों छठ के पारंपरिक गीत बजते रहे – “उगहि सूरज देव अरघ्य देबि…” जैसे भक्ति भरे गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मंदिर प्रबंधन ने छठव्रतियों की हर छोटी-बड़ी सुविधा का ध्यान रखा। कोई असुविधा न हो, इसके लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। यह आयोजन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर जीर्णोद्धार समिति के संयोजक और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय की देखरेख में संपन्न हुआ।

मंदिर परिसर की सजावट और व्यवस्थाएं

मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों, गुब्बारों और लाइटिंग से सजाया गया। तालाब के किनारे साफ-सुथरे घाट बनाए गए। महिलाओं के लिए अलग-अलग घाट थे, ताकि भीड़भाड़ न हो। पार्किंग, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था भी चाक-चौबंद थी। दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य, और यह सब इतने सुचारू ढंग से हुआ कि सभी ने तारीफ की।

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विधायक सरयू राय की सक्रिय भूमिका

छठ के पहले अर्घ्य के दिन विधायक सरयू राय स्वयं मंदिर परिसर पहुंचे। उन्होंने छठव्रतियों से बातचीत की, उनका हौसला बढ़ाया। व्रत की कठिनाई को समझते हुए उन्होंने सेवा कार्य में लगे लोगों की प्रशंसा की। दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य – इस मौके पर श्री राय ने परिजनों से भी संवाद किया, जो सामुदायिक सेवा का सुंदर उदाहरण है।

उनकी उपस्थिति से आयोजन को नई ऊर्जा मिली। सरयू राय ने हमेशा से ही धार्मिक आयोजनों को प्रोत्साहन दिया है। उनकी देखरेख में जीर्णोद्धार समिति ने पूरे कार्यक्रम को सफल बनाया। यह न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक भी था।

सेवा भाव और विशेष व्यवस्थाएं सबकी सराहना

मंगलवार को छठव्रतियों और उनके परिजनों के लिए चाय-कॉफी की मुफ्त व्यवस्था की गई। बुधवार की सुबह अर्घ्य के बाद निःशुल्क चाय, कॉफी और पकौड़ियां बांटी गईं। दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य, और इस सेवा ने सभी के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी। छठव्रतियों ने इस प्रयास की खूब सराहना की।

साकेत गौतम, असीम पाठक, गोल्डन पांडेय, अशोक कुमार, राकेश उज्जैन, अभय सिंह आदि ने पूरे समर्पण से सेवा की। ये स्वयंसेवक सुबह से शाम तक लगे रहे – प्रसाद वितरण से लेकर सफाई तक। यह देखकर लगता है कि सच्ची भक्ति सेवा में निहित है।

स्वयंसेवकों की मेहनत

ये स्वयंसेवक न सिर्फ व्यवस्था संभालते रहे, बल्कि व्रतियों को प्रोत्साहित भी करते रहे। पकौड़ियों की चटोरी खुशबू ने थकान मिटा दी। मंदिर प्रबंधन की यह पहल भविष्य के आयोजनों के लिए मिसाल बनेगी।

Chaiti छठ की परंपरा और जमशेदपुर में इसकी लोकप्रियता

झारखंड-बिहार की सीमा पर बसा जमशेदपुर छठ पूजा का प्रमुख केंद्र है। चैती छठ यहां कम मनाया जाता है, लेकिन इस बार श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर ने इसे भव्य बनाया। दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य – यह खबर पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी। महिलाओं की आस्था ने सूर्य को प्रसन्न किया।

यह त्योहार परिवारों को जोड़ता है। बच्चे, बूढ़े सब इसमें भाग लेते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी यह शुभ है – प्लास्टिक मुक्त आयोजन। भविष्य में ऐसे और आयोजन हों, यही कामना है।

दर्जनों Chaiti छठव्रतियों ने श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में दिया अर्घ्य – यह आयोजन आस्था, सेवा और एकता का प्रतीक बन गया। विधायक सरयू राय और मंदिर समिति की मेहनत ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। Chaiti छठ हमें सिखाता है कि कठिन व्रत के साथ सेवा ही सच्ची भक्ति है। विश्व कल्याण की यह कामना साकार हो। ऐसे आयोजन होते रहें, ताकि हमारी परंपराएं जीवित रहें। जय सूर्यदेव! जय छठ माता!

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