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दिव्यांग खिलाड़ियों के अधिकारों के प्रति समर्पित, ग़ज़ल ख़ान ने दिव्यांग क्रिकेट में परिवर्तनकारी कार्य के 10 साल पूरे किये।

On: August 31, 2024 8:49 PM
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दिव्यांग खिलाड़ियों के अधिकारों के प्रति समर्पित, ग़ज़ल ख़ान ने दिव्यांग क्रिकेट में परिवर्तनकारी कार्य के 10 साल पूरे किये।

दिव्यांग क्रिकेट के माध्यम से जीवन को बदलने के 10 साल

नई दिल्ली : दिव्यांग खिलाड़ियों के अधिकारों के प्रति समर्पित, ग़ज़ल ख़ान ने दिव्यांग क्रिकेट में परिवर्तनकारी कार्य के 10 साल पूरे कर लिए हैं। पिछले 10 वर्षों में, उनके अडिग समर्पण ने न केवल भारत में दिव्यांग क्रिकेट की स्थिति को ऊंचा किया है बल्कि खेलों में समावेशिता के लिए वैश्विक मानदंड भी स्थापित किए हैं।

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ग़ज़ल का दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया (DCCBI) के साथ सफ़र 2014 में शुरू हुआ, जब दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए अवसर बहुत कम थे। इन खिलाड़ियों के लिए मंच प्रदान करने की उनकी प्रतिबद्धता ने दिव्यांग क्रिकेट के परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी निरंतर काबिलियत को देखते हुए, उन्हें 2021 में DCCBI का CEO नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने संगठन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों का आयोजन किया, जिसने दिव्यांग क्रिकेटरों की प्रतिभाओं को उजागर किया।

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उनका नेतृत्व एक गेम-चेंजर साबित हुआ, जिसमें दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया गया, जहां वे अपनी प्रतिभा भली भांति दिखा सकें। भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम की 2015 में पहले एशिया कप में जीत और 2019 में भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम की उपविजेता बनी ये घटनाएं उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को साबित करती हैं। ये मील के पत्थर न केवल दिव्यांग क्रिकेट की प्रोफ़ाइल को ऊंचा करने में सहायक रहे हैं, बल्कि खेलों में विकलांगता के बारे में समाज की धारणाओं को भी चुनौती दी है।

ग़ज़ल ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कुछ प्रेरणादायक कहानियाँ बताईं। उन्होंने कहा, “हमारे पास व्हीलचेयर क्रिकेटर ललित पाठक हैं, जो दृढ़ संकल्प की भावना को दर्शाते हैं। एक दुखद ट्रेन दुर्घटना के बाद, ललित ने अपने दोनों पैर खो दिए और गहरे अवसाद में चले गए। लेकिन व्हीलचेयर क्रिकेट से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी ने एक नया मोड़ लिया। उनके पास अब एक नया उद्देश्य था—भारत के लिए खेलने का सपना। इस सपने ने उनकी ज़िंदगी बदल दी, उनके निराशा को उम्मीद में बदल दिया और उनके संघर्ष को शक्ति में बदल दिया।”

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एक और प्रेरणादायक कहानी आमिर की है, जिनके दुर्भाग्यवश एक हादसे में दोनों हाथ खो गए। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी प्रतिभा से सभी को चौंका दिया, जब उन्होंने पैरों से गेंदबाजी करनी शुरू की। उनकी इस प्रतिभा ने सचिन तेंदुलकर का ध्यान आकर्षित किया। सचिन ने आमिर की प्रतिभा की सराहना की, जो न केवल आमिर के लिए बल्कि सभी दिव्यांग क्रिकेटरों के लिए एक बड़ा सम्मान है। आमिर की कहानी अब एक आशा का प्रतीक बन गई है, जो यह दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के साथ, पहचान और सफलता प्राप्त की जा सकती है।

ग़ज़ल ने आगे कहा, “ये कहानियाँ हजारों में से कुछ हैं। हमारे पास देशभर में 4,000 से अधिक दिव्यांग क्रिकेटर हैं, जिनमें से हर एक की अपनी एक अनूठी कहानी है। ये खिलाड़ी क्रिकेट खेलने के लिए जीते हैं, और क्रिकेट ने उन्हें जीने का एक कारण दिया है। हर दिन, मुझे इस बात का एहसास होता है कि दिव्यांग क्रिकेट इन खिलाड़ियों के जीवन पर कितना गहरा प्रभाव डालता है, और मैं उनके इस सफ़र का हिस्सा बनकर बेहद गर्वित महसूस करती हूँ।”

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DCCBI से परे, ग़ज़ल का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैला है, जहाँ वे अंतर्राष्ट्रीय विकलांग क्रिकेट परिषद में अंतर्राष्ट्रीय मामलों की सचिव और अंतर्राष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट परिषद की उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। उनके प्रयासों ने कई लोगों को प्रेरित किया है और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अपने सपनों को साकार करने के नए रास्ते बनाए हैं।

ग़ज़ल का दशक लंबा सफ़र यह दर्शाता है कि दृढ़ संकल्प, सहनशीलता और समावेशिता के प्रति प्रतिबद्धता कैसे स्थायी बदलाव ला सकती है। उनके प्रयासों ने एक नई पीढ़ी के दिव्यांग खिलाड़ियों को प्रेरित किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि खेलों में उनके योगदान को पहचाना और सराहा जाए।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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