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New कपाली घाट की सफाई से नवरात्रि विसर्जन सुगम

On: March 25, 2026 7:54 PM
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सोनारी क्षेत्र में स्थित शीतला माता मंदिर, मरार पारा के एमपी युवक संघ ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य किया। New कपाली घाट पर घने पेड़-पौधे, जंगली घास और जलकुंभी का बोलबाला हो गया था। इससे सोनारी की सभी सार्वजनिक नवरात्रि जवांरा पूजा समितियों को मूर्ति विसर्जन, ज्योति कलश रखने और जवांरा पूजा में भारी परेशानी हो रही थी। घाट तक पहुंचना मुश्किल, पानी में उतरना जोखिमपूर्ण—यह समस्या वर्षों से चली आ रही थी।

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एमपी युवक संघ ने तत्काल जूस्को (जमशेदपुर उपयोगिता एवं सेवाएं कंपनी) को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में New घाट की सफाई की मांग की गई, ताकि नवरात्रि के पावन पर्व पर कोई बाधा न आए। जूस्को ने सराहनीय संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत अपने मजदूरों की टीम भेजी। कुछ ही घंटों में घाट साफ हो गया—पेड़-पौधे हटाए, जलकुंभी साफ की, रास्ते चिकने किए। अब विसर्जन मार्ग पूरी तरह प्रशस्त है।

इस पहल से सोनारी की सभी नवरात्रि जवांरा पूजा समितियां लाभान्वित हुईं। शीतला माता की ज्योति अब निर्बाध रूप से प्रज्वलित होगी, मूर्तियां सम्मानपूर्वक विसर्जित होंगी। एमपी युवक संघ की सक्रियता और जूस्को की त्वरित प्रतिक्रिया ने स्थानीय लोगों का विश्वास बढ़ाया। विशेष रूप से जूस्को यूनियन अध्यक्ष श्री रघुनाथ पांडेय जी का योगदान उल्लेखनीय है, जिन्होंने मजदूरों को निर्देश देकर कार्य को गति दी।

हम सभी सोनारीवासी—सार्वजनिक नवरात्रि जवांरा पूजा समितियां, भक्तजन और निवासी—एमपी युवक संघ, जूस्को प्रबंधन एवं श्री रघुनाथ पांडेय जी का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। ऐसी पहलें जारी रहें, ताकि धार्मिक आयोजन निर्विघ्न हों। जय माता दी! जय सोनारी!

New कपाली घाट पर संकट पेड़-पौधे और जलकुंभी का बोलबाला

सोनारी, जमशेदपुर का एक जीवंत इलाका, जहां धार्मिक उत्साह हमेशा बरकरार रहता है। हर वर्ष नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां के निवासी शीतला माता, दुर्गा माता की आराधना में डूब जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से एक गंभीर समस्या घाट को घेर रही थी—New कपाली घाट। यह घाट सोनारी के लिए विसर्जन का प्रमुख केंद्र है, जहां सार्वजनिक जवांरा पूजा समितियां मूर्तियों का विसर्जन करती हैं।

समस्या क्या थी? घाट पर घने पेड़-पौधे उग आए थे, जंगली झाड़ियां फैल गईं, और सबसे बड़ी विपदा जलकुंभी का जाल। जलकुंभी, एक विदेशी आक्रामक जलपौधा, पानी की सतह को ढक लेता है, जिससे नावें अटक जाती हैं, पानी में उतरना असंभव हो जाता है। पेड़ों की जड़ें घाट को काट रही थीं, रास्ते संकुचित हो गए। नतीजा? पिछले नवरात्रि में कई समितियों को विसर्जन में घंटों संघर्ष करना पड़ा। मूर्तियां ले जाना, ज्योति कलश स्थापित करना—सब कुछ जोखिम भरा। बच्चे-बूढ़े खतरे में पड़ गए। स्थानीय निवासियों ने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिला।

इस संकट को भांपते हुए शीतला माता मंदिर, मरार पारा, सोनारी के एमपी युवक संघ ने कमर कस ली। यह संगठन स्थानीय स्तर पर सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है—चाहे पर्यावरण सफाई हो या धार्मिक आयोजन। संघ के युवा कार्यकर्ताओं ने घाट का दौरा किया, समस्या का जायजा लिया और तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई। उनका मानना था कि नवरात्रि जैसे पर्व पर कोई बाधा बर्दाश्त नहीं।

एमपी युवक संघ का ज्ञापन जूस्को को जागृत करना

एमपी युवक संघ ने औपचारिक ज्ञापन तैयार किया। इसमें न्यू कपाली घाट की विस्तृत स्थिति बताई गई—फोटो, वीडियो सब संलग्न। ज्ञापन जूस्को (जमशेदपुर उपयोगिता एवं सेवाएं कंपनी) के कार्यालय पहुंचाया गया। जूस्को, जो शहर की सफाई, जल निकासी और सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव का जिम्मा संभालती है, इस मांग पर तुरंत सक्रिय हुई। ज्ञापन सौंपते ही अधिकारियों ने आश्वासन दिया।

खास बात यह रही कि जूस्को ने वादा पूरा किया। अगले ही दिन मजदूरों की टीम घाट पर पहुंची। भारी मशीनरी, कटिंग टूल्स, नावें—सब कुछ लेकर। पहले पेड़-पौधों को साफ किया गया। जड़ें उखाड़ीं, शाखाएं काटीं। फिर जलकुंभी पर हमला—नेट से इकट्ठा कर नष्ट किया। घाट के किनारे साफ किए, रास्ते चौड़े किए। कुल मिलाकर, दो-तीन दिनों की मेहनत से घाट चमक उठा। अब पानी साफ दिख रहा है, पहुंच आसान, विसर्जन के लिए पूरी सुविधा।

इस कार्रवाई में जूस्को यूनियन अध्यक्ष श्री रघुनाथ पांडेय जी की भूमिका सराहनीय रही। उन्होंने मजदूरों को प्रेरित किया, संसाधन उपलब्ध कराए। पांडेय जी ने कहा, “सार्वजनिक सेवा हमारा कर्तव्य है। धार्मिक आयोजनों को सुगम बनाना प्राथमिकता।” उनकी अगुवाई में यूनियन ने अतिरिक्त श्रमिक लगाए, जिससे काम तेजी से पूरा हुआ।

सोनारी की सार्वजनिक जवांरा पूजा समितियों को राहत

सोनारी में दर्जनों सार्वजनिक जवांरा पूजा समितियां सक्रिय हैं। शीतला माता मंदिर समिति, दुर्गा पूजा समिति, अन्य स्थानीय पंडाल—सभी घाट पर निर्भर। सफाई के बाद समितियों के पदाधिकारियों ने खुशी जताई। एक समिति प्रमुख ने बताया, “पहले विसर्जन में डूबने का डर था, अब चिंता मुक्त। ज्योति कलश रखना आसान।” महिलाएं, बच्चे सुरक्षित रहेंगे। नवरात्रि का उत्साह दोगुना हो गया।

यह घटना साबित करती है कि सामुदायिक भागीदारी से बड़ी समस्याएं हल हो सकती हैं। एमपी युवक संघ जैसे संगठन जागरूकता फैला रहे हैं, जबकि जूस्को जैसी संस्थाएं क्रियाशील। भविष्य में जलकुंभी नियंत्रण के लिए नियमित अभियान चलाने की मांग उठी है। स्थानीय विधायक और प्रशासन को भी इसमें योगदान देना चाहिए।

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