मौसममनोरंजनचुनावटेक्नोलॉजीखेलक्राइमजॉबसोशललाइफस्टाइलदेश-विदेशव्यापारमोटिवेशनलमूवीधार्मिकत्योहारInspirationalगजब-दूनिया

बच्ची को बोरे में बंद कर फेंका, कन्नौज में सनसनी,मुठभेड़ में आरोपी घायल

C76c181512a7978bdd2551cb013ba211
On: April 5, 2026 2:31 PM
Follow Us:
73458cd8 E789 476a 829a 9823c9c9cd76
---Advertisement---

यहां आपका विज्ञापन लग सकता है!

अपने ब्रांड या सर्विस को हजारों विज़िटर्स तक पहुंचाने का बेहतरीन मौका। टार्गेटेड ऑडियंस और बेहतर विज़िबिलिटी के साथ, इस जगह पर लगाएं अपना ऐड!

Book Now

या कॉल करें: +91-7004699926

B 1

up:उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक बेहद भयावह और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं। मामला गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डुंडवाबुजुर्ग गांव का है, जहां महज तीन साल की एक मासूम बच्ची को घर के बाहर से अगवा कर लिया गया।

A 2

यह घटना उस समय हुई जब बच्ची अपने घर के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। परिवार को पहले तो लगा कि वह आस-पड़ोस में ही होगी, लेकिन जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो परिजनों के होश उड़ गए। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई और गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया। इसके बाद पुलिस ने बच्ची की तलाश में पूरे इलाके में सघन अभियान चलाया, गांव के हर कोने, खेत-खलिहानों और झाड़ियों तक में खोजबीन शुरू की गई।

करीब एक दिन की तलाश के बाद बुधवार सुबह बच्ची झाड़ियों में एक बोरे के अंदर बंद हालत में मिली। हालांकि राहत की बात यह रही कि बच्ची जीवित थी, लेकिन वह बेहद डरी-सहमी अवस्था में थी, जिससे यह साफ था कि उसके साथ कुछ बेहद डरावना घटित हुआ था। इस घटना ने पूरे गांव में दहशत का माहौल पैदा कर दिया।

लोग स्तब्ध थे कि आखिर कोई इतना गिर कैसे सकता है कि एक मासूम को इस तरह निशाना बनाए। पुलिस ने जब मामले की गंभीरता को समझा तो तुरंत जांच तेज कर दी और हर संभावित संदिग्ध पर नजर रखी जाने लगी। इसी दौरान गांव के ही एक युवक अकील पर पुलिस का शक गया, क्योंकि बच्ची के गायब होने के बाद से वह भी अचानक लापता था और किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।

जांच आगे बढ़ी तो जो तथ्य सामने आए, उन्होंने इस मामले को और भी भयावह बना दिया। पुलिस ने जब आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें ऐसे वीडियो और सर्च हिस्ट्री मिली, जिसमें बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने के तरीके देखे और सीखे जा रहे थे। यह जानकारी सामने आते ही पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए। इससे यह साफ हो गया कि आरोपी की मंशा बेहद खतरनाक थी और अगर समय रहते बच्ची को नहीं ढूंढा जाता तो उसके साथ कोई बड़ा अपराध हो सकता था। यह सिर्फ एक अपहरण नहीं बल्कि एक संभावित जघन्य अपराध की तैयारी थी, जिसे पुलिस की तत्परता ने टाल दिया।

पुलिस को गुरुवार सुबह मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी अकील बाईपास के पास मौजूद है और भागने की फिराक में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम, जिसमें एसओजी और स्थानीय थाना पुलिस शामिल थी, तुरंत मौके पर पहुंची और इलाके की घेराबंदी कर दी गई। पुलिस ने आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने सरेंडर करने के बजाय पुलिस टीम पर ही फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें एक गोली आरोपी के पैर में जा लगी और वह घायल हो गया। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो वह पूरी तरह टूट गया और हाथ जोड़कर अपना अपराध कबूल कर लिया। उसने अपनी जान की भीख मांगते हुए बताया कि उसने ही बच्ची का अपहरण किया था और पकड़े जाने के डर से उसे बोरे में बंद कर झाड़ियों में फेंक दिया था। पुलिस के अनुसार आरोपी शादीशुदा था, लेकिन करीब एक साल पहले उसकी पत्नी की मौत हो चुकी थी और उसके बाद से वह अकेला रह रहा था। हालांकि यह तथ्य उसके अपराध को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराता, बल्कि यह दिखाता है कि उसकी मानसिक स्थिति और सोच कितनी विकृत हो चुकी थी।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर समाज में ऐसी मानसिकता पैदा कैसे हो रही है। डिजिटल युग में जहां एक तरफ इंटरनेट ज्ञान का भंडार है, वहीं दूसरी तरफ इसका दुरुपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। आरोपी द्वारा मोबाइल में ऐसे वीडियो देखना और उनसे अपराध के तरीके सीखना इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी और जागरूकता कितनी जरूरी हो गई है। बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों में तकनीक का गलत इस्तेमाल एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि यदि पुलिस समय पर सक्रिय नहीं होती तो बच्ची के साथ बहुत बड़ी अनहोनी हो सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी के मोबाइल में मिले कंटेंट उसकी खतरनाक मानसिकता को दर्शाते हैं और इस मामले में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी किन-किन प्लेटफॉर्म्स से ऐसे वीडियो देखता था और क्या इसमें कोई संगठित नेटवर्क भी शामिल है या नहीं।

यह घटना समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अब और ज्यादा सतर्क होने की जरूरत है। माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने के साथ-साथ आसपास के माहौल पर भी ध्यान देना होगा। वहीं प्रशासन को भी ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करने के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाने होंगे, ताकि लोग सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दे सकें।

कन्नौज की यह घटना एक तरफ पुलिस की तत्परता और कार्रवाई की मिसाल है, जिसने एक मासूम की जिंदगी बचा ली, वहीं दूसरी तरफ यह हमारे समाज के उस काले चेहरे को भी उजागर करती है, जहां कुछ लोग इंसानियत की सारी हदें पार कर देते हैं। यह जरूरी है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और भविष्य में कोई भी इस तरह की घिनौनी हरकत करने से पहले हजार बार सोचे। अंततः यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि समाज के नैतिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है, जिस पर सभी को मिलकर काम करना होगा।

WhatsApp Image 2026 05 11 At 11.09.39 AM

Leave a Comment

Link copied