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नगड़ी में रिम्स-2 निर्माण के खिलाफ Champai सोरेन का बड़ा ऐलान दस दिनों में लाखों लोगों के आंदोलन में शामिल होने का दावा

On: June 7, 2026 6:31 PM
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रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री Champai सोरेन ने नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान-2) के निर्माण को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ बड़े जन आंदोलन की घोषणा की है। रविवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि नगड़ी की उपजाऊ कृषि भूमि पर अस्पताल निर्माण के नाम पर किसानों को उजाड़ने की कोशिश किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दस दिनों के भीतर लाखों आदिवासी और मूलवासी नगड़ी पहुंचकर किसानों के समर्थन में आंदोलन करेंगे।

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सरकार की मंशा किसानों को उजाड़ने की

Champai सोरेन ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि रांची जिले में कई स्थानों पर सैकड़ों एकड़ सरकारी और खाली जमीन उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद सरकार उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण कर किसानों को विस्थापित करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में जनहित में अस्पताल बनाना चाहती है तो उसके लिए पहले से उपलब्ध सरकारी जमीन का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि किसानों की जीविका छीनकर विकास के नाम पर उन्हें बेघर किया जाए।

एचईसी की जमीन का किया जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) से सैकड़ों एकड़ जमीन ले चुकी है और अब 500 एकड़ से अधिक अतिरिक्त जमीन लेने की तैयारी भी चल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन उपलब्ध है तो रिम्स-2 का निर्माण वहीं क्यों नहीं कराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की उपजाऊ भूमि अधिग्रहित करने के बजाय उपलब्ध वैकल्पिक जमीन पर परियोजना स्थापित करनी चाहिए।

गांव-गांव डुगडुगी बजाकर चलाया जाएगा अभियान

Champai सोरेन ने आंदोलन की रणनीति की जानकारी देते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र में गांव-गांव जाकर डुगडुगी बजाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन को जनभागीदारी का स्वरूप देने के लिए प्रत्येक समर्थक से एक मुट्ठी चावल और दस रुपये का सहयोग लिया जाएगा।

उनका कहना था कि यह आंदोलन केवल जमीन बचाने का नहीं बल्कि आदिवासी-मूलवासी समाज के अस्तित्व, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा का आंदोलन होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगड़ी के किसानों को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं दिया जाएगा।

रांची आदिवासियों की जमीन पर बसा शहर

प्रेस वार्ता के दौरान Champai सोरेन ने कहा कि रांची शहर आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन पर विकसित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी परिवारों की जमीनें अधिग्रहित की जाती रही हैं, लेकिन उन्हें आज तक समुचित पुनर्वास और न्याय नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि एचईसी के लिए लगभग 7,200 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई थी, जबकि प्लांट का निर्माण केवल लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में हुआ। इसके अलावा लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई अन्य परियोजनाओं के लिए भी बड़ी मात्रा में जमीन ली गई, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

रैयतों को वापस नहीं मिली उनकी जमीन

Champai सोरेन ने आरोप लगाया कि जब एचईसी ने कई जमीनें सरकार को वापस कीं, तब उन्हें मूल रैयतों को लौटाने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने या बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन किसानों की जमीनों पर बड़े-बड़े संस्थान और परियोजनाएं बनीं, उन्हें आखिर क्या मिला।

उन्होंने कहा कि विकास की कीमत हमेशा गरीब किसान और आदिवासी समाज ही क्यों चुकाए, जबकि उन्हें उसका उचित लाभ या पुनर्वास तक नहीं मिलता।

1957-58 के अधिग्रहण पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा वर्ष 1957-58 के भूमि अधिग्रहण का हवाला दिए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस समय अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई थी। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने इस प्रक्रिया को रोकने की बात कही थी, जिसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा।

उन्होंने दावा किया कि स्थानीय किसान वर्ष 2012 तक उस जमीन की मालगुजारी जमा करते रहे, खेती करते रहे और अधिकांश लोगों ने किसी प्रकार का मुआवजा भी स्वीकार नहीं किया। ऐसे में सरकार यह कैसे दावा कर सकती है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।

आंदोलन को मिलेगा व्यापक जनसमर्थन

Champai सोरेन ने विश्वास जताया कि नगड़ी आंदोलन को पूरे झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, किसान संगठन और सामाजिक समूहों का समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल नगड़ी की लड़ाई नहीं बल्कि पूरे राज्य के भूमि अधिकारों और किसानों के भविष्य की लड़ाई है।

उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की जाएगी।

पिछले आंदोलन का भी किया उल्लेख

पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष हुए नगड़ी आंदोलन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की थी और उन्हें हाउस अरेस्ट तक किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में सड़कों पर उतर आए थे, जिसके बाद सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।

उन्होंने कहा कि यदि इस बार भी सरकार किसानों की मांगों की अनदेखी करती है तो पहले से भी बड़ा आंदोलन खड़ा होगा।

सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

नगड़ी मामले पर कई राजनीतिक दलों और आदिवासी संगठनों की चुप्पी के बीच चम्पाई सोरेन का यह बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके आंदोलन के ऐलान के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ सकता है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है।

अब सभी की नजरें सरकार की अगली रणनीति और प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों पर टिकी हैं। यदि चम्पाई सोरेन के दावे के अनुसार बड़ी संख्या में लोग नगड़ी पहुंचते हैं, तो यह आंदोलन राज्य की राजनीति और भूमि अधिग्रहण नीति पर व्यापक असर डाल सकता है।

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