
Crime Patna: बिहार की राजधानी पटना में 17 जुलाई 2025 को हुई एक दिल दहला देने वाली हत्या का CCTV जिसने राज्य की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया। पारस अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई। यह घटना न केवल एक अपराधी के अंत की कहानी है, बल्कि बिहार में संगठित अपराध, गैंगवार और प्रशासनिक लापरवाही की गहराई को भी उजागर करती है।

CCTV में कैद हत्या की घटना
सुबह करीब 11 बजे, पारस अस्पताल के कमरा नंबर 209 के बाहर पांच हथियारबंद अपराधी पहुंचे। CCTV फुटेज में साफ दिखता है कि वे बिना किसी डर या हड़बड़ी के ICU की गैलरी में दाखिल होते हैं। जैसे ही वे दरवाजे के पास पहुंचे, सभी ने अपने हथियार निकाल लिए। एक ने दरवाजा खोला और बाकी ने दरवाजे के बाहर से ही चंदन मिश्रा पर गोलियों की बौछार कर दी। यह हमला मात्र 30 सेकेंड में हुआ, लेकिन उसकी गूंज पूरे राज्य में सुनाई दी।
चार हमलावर तेजी से भाग निकले, जबकि एक अपराधी आराम से टहलता हुआ अस्पताल से बाहर निकल गया। यह दृश्य CCTV में कैद हो गया, जो अब जांच का अहम हिस्सा है।

कौन था चंदन मिश्रा?
- निवास: बक्सर जिले का सोनबरसा गांव
- पहचान: एक दशक से अपराध की दुनिया में सक्रिय
- प्रमुख अपराध:
- 2011 में चूना व्यापारी राजेंद्र केसरी की हत्या
- भरत राय और शिवजी खरवार की हत्या
- जेल क्लर्क हैदर अली की हत्या
- सजा: राजेंद्र केसरी हत्याकांड में उम्रकैद
- गिरोह: पहले शेरू सिंह के साथ, बाद में अलग गिरोह चलाया
- पैरोल: पाइल्स के इलाज के लिए 21 दिन की पैरोल पर बाहर आया था
शेरू – चंदन की दोस्ती और दुश्मनी
चंदन और शेरू की दोस्ती क्रिकेट खेलते समय शुरू हुई थी। 2009 में दोनों ने मिलकर अनिल सिंह की हत्या की। लेकिन बाद में जातिगत मतभेद और रंगदारी के विवादों के चलते दोनों अलग हो गए। दोनों ने अपनेअपने गिरोह बना लिए और शाहाबाद क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन गए।
- हत्या की साजिश और गैंगवार
- हत्या पूरी तरह सुनियोजित थी
- पैरोल खत्म होने से ठीक पहले हमला हुआ
- पुलिस को जेल या अस्पताल से मुखबिरी की आशंका
- शक की सुई शेरू गिरोह की ओर घूम रही है
- हमलावरों की पहचान हो चुकी है, कुछ बक्सर की ओर फरार हुए
प्रशासनिक लापरवाही
- एक सजायाफ्ता अपराधी को VVIP अस्पताल में भेजा गया
- अस्पताल में हथियारों के साथ अपराधियों का प्रवेश
- सुरक्षा में कोई चूक नहीं, बल्कि संभावित मिलीभगत
बिहार की जेल प्रणाली और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल
चंदन मिश्रा की हत्या सिर्फ एक अपराधी के अंत की कहानी नहीं है, बल्कि यह बिहार में गैंगवार की वापसी, प्रशासनिक विफलता, और सुरक्षा तंत्र की कमजोरी का प्रतीक बन गई है। यह घटना बताती है कि अपराधी जेल में रहकर भी साजिश रच सकते हैं, और अस्पताल जैसी जगह भी अब सुरक्षित नहीं रही।
अब सवाल यह है कि क्या यह घटना बिहार की कानून व्यवस्था को झकझोरने के लिए काफी है? क्या पुलिस और प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और तेज़ कार्रवाई करेंगे? या फिर यह भी एक और केस बनकर फाइलों में दब जाएगा?










































