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केंद्रीय बजट 2026-27 में महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर, लैंगिक बजट 9.37% तक बढ़ा

On: February 18, 2026 1:53 PM
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नई दिल्ली, 18 फरवरी: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया गया है। इस वर्ष लैंगिक बजट (Gender Budget) का हिस्सा कुल बजट का 9.37 प्रतिशत कर दिया गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के 8.86 प्रतिशत से अधिक है।

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण हेतु कुल 5.01 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.49 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11.55 प्रतिशत अधिक है। बजट में इस बढ़ोतरी को महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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इस बार लैंगिक बजट के अंतर्गत कुल 53 मंत्रालयों/विभागों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों को धनराशि आवंटित की गई है, जबकि पिछले वर्ष 49 मंत्रालयों/विभागों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटन मिला था। लैंगिक बजट की शुरुआत के बाद से यह पहली बार है जब सबसे अधिक मंत्रालयों और विभागों को इसमें शामिल किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 में चार नए मंत्रालयों/विभागों को भी इस सूची में जोड़ा गया है।

लैंगिक बजट विवरण को तीन भागों—भाग क, भाग ख और भाग ग—में विभाजित किया गया है।

  • भाग क (100 प्रतिशत महिला-विशिष्ट योजनाएं): इसमें 9 मंत्रालयों/विभागों और एक केंद्र शासित प्रदेश को कुल 1,07,688.42 करोड़ रुपये (कुल आवंटन का 21.50%) दिए गए हैं।
  • भाग ख (महिलाओं के लिए 30–99 प्रतिशत आवंटन): इसमें 28 मंत्रालयों/विभागों और एक केंद्र शासित प्रदेश को 3,63,412.37 करोड़ रुपये (72.54%) आवंटित किए गए हैं।
  • भाग ग (महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत से कम आवंटन): इसमें 37 मंत्रालयों/विभागों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों को 29,777.94 करोड़ रुपये (5.95%) दिए गए हैं।

सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में जिन प्रमुख मंत्रालयों और विभागों को लैंगिक बजट में 30 प्रतिशत से अधिक आवंटन मिला है, उनमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सबसे आगे है, जिसे 81.73 प्रतिशत आवंटन मिला है। इसके अलावा ग्रामीण विकास विभाग (69.92%), पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (48.60%), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (48.04%), खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (46.34%), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (40.44%), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (39.05%), उच्च शिक्षा विभाग (32.25%), पंचायती राज मंत्रालय (30.93%), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (30.22%) और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (30.10%) भी प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि लैंगिक बजट में बढ़ोतरी से महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी। इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला उद्यमिता, कौशल विकास और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

सरकार का कहना है कि यह बजट महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत पहल है। आने वाले समय में इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से महिलाओं और बालिकाओं के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

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