
उत्तर प्रदेश: Bareilly शहर से एक ऐसी सनसनीखेज घटना की, जहां फर्जी आईएएस बनकर तीन बहनों ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का लालच देकर लाखों रुपये ठग लिए। यह मामला बरेली में फर्जी आईएएस का जाल फंसा होने का जीता-जागता उदाहरण है, जो हमें बेरोजगारी के दौर में सतर्क रहने की सीख देता है।

इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। बारादरी पुलिस ने 28 अप्रैल 2026 को इन तीनों महिलाओं को गिरफ्तार किया, जिनके पास से नकदी, लग्जरी कार और फर्जी दस्तावेज बरामद हुए। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
Bareilly में फर्जी आईएएस का जाल कैसे फंसा?
Bareilly शहर में यह गिरोह 2022 से सक्रिय था। मुख्य आरोपी विप्रा शर्मा खुद को आईएएस, आईपीएस या एडीएम बताती थी, जबकि वह यूपीएससी परीक्षा में कई बार फेल हो चुकी थी। उसकी सगी बहन शिखा पाठक (या शिखा शर्मा) और ममेरी बहन दीक्षा पाठक युवाओं को सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों से फंसातीं।
वे बेरोजगारों को यूपी ट्रिपल एससी (UPSSS) की कंप्यूटर ऑपरेटर जैसी नौकरियों का झांसा देतीं। विप्रा शर्मा को ऊंचे ओहदे पर पेश करके पीड़ितों से 20-20 हजार से लेकर लाखों रुपये वसूलतीं। एक पीड़ित प्रीति लायल ने बताया कि 2022 में शिखा से मुलाकात हुई, जिसने विप्रा को एसडीएम बताया और नौकरी का वादा किया।
पुलिस को मुखबिर से खबर मिली कि विप्रा एडीएम के रौब में घूम रही है। बारादरी थाने की टीम ने छापा मारा और तीनों को नकाब पहने हुए धर दबोचा। गिरफ्तारी के समय वे महिंद्रा एक्सयूवी700 कार से भागने की कोशिश कर रही थीं, जिस पर ‘एडीएम फाइनेंस एंड रेवेन्यू’ का स्टीकर लगा था।

ठगी का modus operandi चालाकी की हद
इस Bareilly में फर्जी आईएएस का जाल बेहद सोचा-समझा था। शिखा और दीक्षा पहले संपर्क करतीं, फिर विप्रा को सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करतीं। वे फर्जी जॉइनिंग लेटर, स्टाम्प, आईडी कार्ड और यहां तक कि सरकारी वर्दी जैसी चीजें इस्तेमाल करतीं।
पीड़ितों को लखनऊ के विभूति खंड में जॉइनिंग के लिए बुलाया जाता, लेकिन वहां सच्चाई खुल जाती। दर्जनों युवक, ज्यादातर ग्रामीण इलाकों के, शिकार बने। एक पीड़ित ने 50 हजार दिए, लेकिन कुछ नहीं मिला। ठगी की रकम साढ़े 11 लाख से ज्यादा बताई जा रही है, लेकिन कुल 55 लाख बैंक खातों में फ्रीज हुए।
लैपटॉप पर फर्जी दस्तावेज, 10 चेकबुक, 4 मोबाइल और 4.5 लाख नकद बरामद हुए। कार ठगी के पैसे से खरीदी गई थी, जिसमें फर्जी नंबर प्लेट लगी थी। विप्रा खुद को डॉक्टर बताती, लेकिन वह डबल एमए पास थी। पढ़ाई में मेधावी होने के बावजूद नौकरी न मिलने से अपराध का रास्ता चुना।
पुलिस कार्रवाई और बरामद सामान
बारादरी पुलिस ने IPC की धारा 419 (धोखाधड़ी), 420 (ठगी) और 467 (जालसाजी) के तहत मुकदमा दर्ज किया। एडिशनल एसपी पंकज श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि विप्रा मास्टरमाइंड थी। एसएसपी घुलेन मौहम्मद आसिफ ने सख्त जांच के आदेश दिए।
बरामदगी में शामिल:
- 4.5 लाख रुपये नकद
- महिंद्रा एक्सयूवी700 लग्जरी SUV
- 2 लैपटॉप
- 3 पासबुक, 10 चेकबुक
- फर्जी दस्तावेज और स्टाम्प
- 6 बैंक खाते फ्रीज (55 लाख रुपये)
तीनों को जेल भेज दिया गया। पुलिस और पीड़ितों की तलाश जारी है।
बेरोजगारी के दौर में बढ़ते ऐसे जाल
यह Bareilly में फर्जी आईएएस का जाल फंसा मामला अकेला नहीं है। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी के कई केस सामने आते रहते हैं। जैसे लखनऊ में फर्जी आईएएस विवेक मिश्रा ने 80 करोड़ की ठगी की। पीलीभीत में फर्जी जॉइनिंग लेटर से ठगी हुई।
बेरोजगारी की बेकरारी और जागरूकता की कमी ऐसे जाल को जन्म देती है। ग्रामीण युवा आसानी से फंस जाते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि आधिकारिक वेबसाइट जैसे upsssc.gov.in से ही भर्ती चेक करें।
युवाओं के लिए जरूरी सलाहें
- कभी फर्जी दस्तावेज या अनजान लोगों पर भरोसा न करें।
- सरकारी नौकरी की जानकारी सिर्फ आधिकारिक साइट्स से लें।
- पैसे मांगने वालों से सावधान रहें।
- शंका हो तो नजदीकी थाने में शिकायत करें।
ये सावधानियां बरेली में फर्जी आईएएस का जाल जैसे मामलों से बचाएंगी।
Bareilly में फर्जी आईएएस का जाल फंसा यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस की सतर्कता का प्रतीक है। यह घटना बेरोजगार युवाओं को आगाह करती है कि लालच में न फंसें। आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें, तभी असली सफलता मिलेगी। पुलिस का दावा है कि इससे ठगी का सिलसिला रुकेगा, लेकिन जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है।















