
चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) — Jharkhand में कोषागार घोटालों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। हजारीबाग और बोकारो के बाद अब पश्चिमी सिंहभूम जिले में भी बड़ा ट्रेजरी स्कैम सामने आया है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, पुलिस विभाग के खातों से करीब 45 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई है। यह गड़बड़ी तब सामने आई जब चाईबासा ट्रेजरी में नियमित ऑडिट के दौरान खाते का मिलान किया गया और आवंटन व निकासी में बड़ा अंतर पाया गया।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि फर्जी वाउचर और जाली हस्ताक्षरों के जरिए सरकारी खजाने से यह रकम निकाली गई। यह निकासी कई महीनों तक अलग-अलग फर्जी बिलिंग के माध्यम से की गई।
कार्रवाई: एक आरक्षी गिरफ्तार, दो हिरासत में
मामले में अब तक एक पुलिस आरक्षी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि लेखा विभाग से जुड़े दो अन्य पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच में जुटे बड़े अधिकारी
- जिले के उपायुक्त मनीष कुमार के नेतृत्व में जांच जारी
- पुलिस अधीक्षक अमित रेणु भी सीधे निगरानी कर रहे
- रांची मुख्यालय से वित्तीय टीम जांच के लिए पहुंची
प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है और यह नेटवर्क कितने बड़े स्तर तक फैला हुआ है।
Jharkhand में बढ़ते ट्रेजरी घोटाले
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल के दिनों में हजारीबाग और बोकारो में भी इसी तरह के कोषागार घोटाले सामने आ चुके हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकारी वित्तीय सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामियां मौजूद हैं।
यह घोटाला सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि यह एक सिस्टमेटिक फाइनेंशियल फ्रॉड की ओर इशारा करता है।
- लंबे समय तक फर्जी बिलिंग जारी रहना
- ऑडिट में देरी से खुलासा होना
- पुलिस विभाग के अंदर ही संलिप्तता
ये सभी संकेत बताते हैं कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
पश्चिमी सिंहभूम का यह ट्रेजरी स्कैम झारखंड प्रशासन के लिए एक बड़ा अलार्म है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई और सिस्टम सुधार नहीं किए गए, तो ऐसे घोटाले आगे और बड़े रूप में सामने आ सकते हैं।










































