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नेत्रहीन लड़के को लोगों ने भीख मांगने की सलाह दी लेकिन चुनौतियों को मात देकर ₹500 करोड़ वाली कंपनी खड़ी कर दी

On: January 9, 2026 9:52 PM
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  • संघर्ष से सफलता तक की कहानी और समाज के लिए एक बड़ा संदेश

Motivational Story : कुछ लोग हालात के आगे झुक जाते हैं, लेकिन कुछ लोग हालात को ही बदल देते हैं। श्रीकांत बोला उन्हीं चुनिंदा लोगों में से हैं, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी बाधा—जन्म से नेत्रहीन होना—को कमजोरी नहीं बनाया, बल्कि इसे अपनी ताकत में बदल दिया। गरीबी में जन्म, समाज की उपेक्षा, स्कूल में मज़ाक, शिक्षा में रोक-टोक… और फिर भी आगे बढ़ते जाना। आज वही श्रीकांत Bollant Industries के संस्थापक हैं—एक ऐसी कंपनी, जो पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाती है और सैकड़ों दिव्यांगों को रोजगार देकर समाज को नई दिशा देती है।

गरीबी, नेत्रहीनता और तानों के बीच शुरू हुआ सफर

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श्रीकांत बोला का जन्म 7 जुलाई 1991 को आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम जिले के सीतारामपुरम गांव में हुआ। गरीब किसान परिवार, सीमित साधन और सबसे बड़ी बात—देख न पाने की मजबूरी। कहते हैं कि कुछ रिश्तेदारों ने तो उनके माता-पिता को यह तक कह दिया कि “ऐसे बच्चे को पालकर क्या करेंगे?” लेकिन माता-पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने बेटे को स्कूल भेजा।

स्कूल पहुँचे तो वहां नई चुनौती खड़ी थी। सहपाठी चिढ़ाते थे, कुछ शिक्षक भी उन्हें “बेकार” समझते थे। लेकिन श्रीकांत का हौसला वहीं से तैयार हो रहा था—धीरे-धीरे, कदम-दर-कदम।

शिक्षा में रुकावटें, लेकिन हार नहीं मानी

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 10वीं में 98% अंक लाने के बाद भी उन्हें विज्ञान (Science) पढ़ने से रोक दिया गया। वजह सिर्फ एक—वे नेत्रहीन थे।
अब सोचिए, जब किसी बच्चे को यह कहा जाए कि “तुम इतना पढ़कर भी विज्ञान नहीं पढ़ सकते”, तब क्या होता होगा? लेकिन श्रीकांत ने रोने के बजाय कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

छह महीने तक कानूनी लड़ाई चली, और आखिरकार जीत उनकी हुई। उन्होंने साबित किया कि “योग्यता आँखों से नहीं, दिमाग और मेहनत से तय होती है।”

IIT ने रिजेक्ट किया, MIT ने गले लगाया

श्रीकांत ने IIT के लिए तैयारी करनी चाही, लेकिन कोचिंग संस्थानों ने भी उन्हें ठुकरा दिया। तब उन्होंने दिशा बदली और दुनिया के सबसे बड़े मंच की ओर बढ़े।
अमेरिका के MIT में उन्हें स्कॉलरशिप मिली और वे वहां पहले अंतरराष्ट्रीय नेत्रहीन छात्र बने। यह सिर्फ उनकी सफलता नहीं थी, यह भारत के हर दिव्यांग बच्चे के लिए एक उम्मीद थी।

Bollant Industries: कारोबार नहीं, समाज बदलने की शुरुआत

2012 में भारत लौटकर श्रीकांत ने 10 लाख रुपये की पूँजी से Bollant Industries की शुरुआत की। उनके साथ सह-संस्थापक रवि मंथा भी जुड़े। कंपनी बनाने का मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं था, बल्कि ऐसा मॉडल खड़ा करना था, जिसमें पर्यावरण भी बचे और समाज भी मजबूत हो।

आज Bollant Industries:
✅ पर्यावरण अनुकूल डिस्पोजेबल उत्पाद बनाती है
✅ रिसाइकल पेपर पैकेजिंग तैयार करती है
✅ ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल पर काम करती है
✅ और सबसे खास—500 से अधिक दिव्यांगों को रोजगार देती है

इसी कारण रतन टाटा जैसे बड़े निवेशकों का भी सहयोग मिला।

आज की स्थिति: करोड़ों की कंपनी और लाखों की प्रेरणा

Bollant Industries की वैल्यूएशन लगभग 500 करोड़ बताई जाती है और टर्नओवर 100 करोड़ से अधिक। श्रीकांत को Forbes Asia 30 Under 30, World Economic Forum Young Global Leader जैसे सम्मान भी मिले।

लेकिन उनकी असली उपलब्धि पुरस्कार नहीं—लोगों की सोच बदलना है।

संदेश: “दिव्यांग नहीं, सक्षम हैं!”

श्रीकांत बोला की कहानी हमें यह सिखाती है कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं होती, कमजोरी होती है समाज की सोच। आज भी हमारे आसपास कई बच्चे सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि लोग उन्हें “कमजोर” मान लेते हैं। कोई नौकरी नहीं देता, कोई अवसर नहीं देता, और ऊपर से ताने।

हमें समझना होगा—दिव्यांग नहीं, सक्षम हैं। अगर उन्हें सही शिक्षा, सही मंच और सम्मान मिले, तो वे भी उद्योगपति बन सकते हैं, वैज्ञानिक बन सकते हैं, डॉक्टर बन सकते हैं।

श्रीकांत बोला यह साबित करते हैं कि “दृष्टि आँखों में नहीं, मन में होती है।” और यही संदेश हर घर, हर स्कूल, हर समाज तक पहुँचना चाहिए।

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Anil Kumar Maurya

अनिल कुमार मौर्य एक अनुभवी पत्रकार, मीडिया रणनीतिकार और सामाजिक चिंतक हैं, जिन्हें पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 10 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वे वर्तमान में The News Frame के संस्थापक और मुख्य संपादक के रूप में कार्यरत हैं — एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म जो क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और सामाजिक सरोकारों को निष्पक्ष और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। अनिल जी राष्ट्रीय पत्रकार मीडिया संगठन (Rashtriya Patrakar Media Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जहां वे पत्रकारों के अधिकारों, मीडिया की स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

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