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निजी शिक्षकों के लिए अलग एक्ट और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग IPTA ने सरकार से की अपील

On: August 15, 2026 8:28 PM
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जमशेदपुर: भारतीय गैर सरकारी शिक्षक संघ सह समाजसेवी संस्था IPTA के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह संस्थापक डॉ. परमानंद मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर के निजी एवं गैर सरकारी शिक्षकों की समस्याओं और उनके अधिकारों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने देश के सभी शिक्षकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का आग्रह किया।

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डॉ. परमानंद मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आजादी का पर्व केवल राष्ट्रीय गौरव का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के अधिकारों, सम्मान और भविष्य पर विचार करने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में सरकारी शिक्षकों के साथ-साथ निजी और गैर सरकारी शिक्षक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

निजी शिक्षकों के अधिकारों के लिए उठी आवाज

IPTA के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने में निजी शिक्षकों और गैर सरकारी शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान है। बड़ी संख्या में शिक्षक निजी विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं के माध्यम से विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद निजी एवं गैर सरकारी शिक्षकों के लिए अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल आज भी मौजूद हैं। ऐसे में सरकार को इस वर्ग की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित कानूनी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।

स्वतंत्रता दिवस पर सरकार से विशेष आग्रह

डॉ. परमानंद मोदी ने देश के सभी मंत्रीगण और संबंधित मंत्रालयों से आग्रह किया कि निजी शिक्षकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उनके लिए एक विशेष एक्ट और स्पष्ट पहचान की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि निजी शिक्षक भी देश की शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें उनके कार्य और योगदान के अनुरूप सम्मान, पहचान तथा आवश्यक अधिकार मिलने चाहिए।

उनका कहना है कि निजी शिक्षकों के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनने से इस क्षेत्र में कार्य करने वाले शिक्षकों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी।

निजी शिक्षकों की अलग पहचान की मांग

IPTA की ओर से निजी शिक्षकों के लिए एक ऐसी व्यवस्था की मांग की गई है, जिससे उन्हें देश की शिक्षा व्यवस्था में स्पष्ट पहचान मिल सके। डॉ. परमानंद मोदी ने कहा कि शिक्षक चाहे सरकारी संस्थान में कार्यरत हो या निजी शिक्षण संस्थान में, उसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा प्रदान करना और राष्ट्र के भविष्य को तैयार करना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले सभी शिक्षकों के सम्मान और हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार की जानी चाहिए।

शिक्षक समाज को एकजुट होने की अपील

डॉ. परमानंद मोदी ने देशभर के शिक्षकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान के लिए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक समाज अपनी समस्याओं को संगठित तरीके से सरकार और संबंधित विभागों के सामने रखेगा, तो उनके समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने संगठन और संस्थाओं के माध्यम से अपनी समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाएं तथा शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाएं।

शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका

IPTA के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की जानकारी देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र की नई पीढ़ी को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शिक्षक विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ अनुशासन, नैतिकता, जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों का विकास करता है। ऐसे में शिक्षक समुदाय की समस्याओं और उनके अधिकारों पर ध्यान देना राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत करने के समान है।

उन्होंने कहा कि देश का भविष्य मजबूत बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों का सम्मान एवं उनका सुरक्षित भविष्य भी जरूरी है।

निजी शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार जरूरी

डॉ. परमानंद मोदी ने कहा कि निजी शिक्षकों को कई स्तरों पर अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रोजगार की स्थिरता, पारिश्रमिक, सामाजिक सुरक्षा, कार्य की परिस्थितियां और भविष्य की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उचित नीति और कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि निजी शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा कर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जाए और उसके आधार पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जो शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के हित में हो।

संविधान और अधिकारों को लेकर चर्चा की अपील

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर IPTA की ओर से संविधान में नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को समझने तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न वर्गों के अधिकारों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

हालांकि, किसी भी संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव या नए कानून की मांग को विशेषज्ञों, विधि विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के साथ व्यापक विमर्श के आधार पर आगे बढ़ाना आवश्यक है। IPTA ने इसी दिशा में सरकार और संबंधित मंत्रालयों का ध्यान निजी शिक्षकों की स्थिति की ओर आकर्षित करने की बात कही।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान का सम्मान जरूरी

शिक्षा और अधिकारों के संदर्भ में चर्चा करते हुए यह भी समझना जरूरी है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय संविधान के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले महान विधिवेत्ता और समाज सुधारक थे। संविधान ने नागरिकों के अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान किया।

निजी शिक्षकों के लिए नए अधिकार या अलग एक्ट की मांग को भी संवैधानिक मूल्यों, मौजूदा कानूनों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इस दिशा में विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के साथ संवाद महत्वपूर्ण होगा।

निजी शिक्षकों के लिए एक्ट बनाने की मांग

IPTA की प्रमुख मांगों में निजी शिक्षकों के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार करना और उनकी अलग पेशेवर पहचान सुनिश्चित करना शामिल है। संगठन का मानना है कि इससे निजी एवं गैर सरकारी शिक्षकों के हितों को बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सकेगा।

डॉ. परमानंद मोदी ने कहा कि निजी शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, इसलिए उनके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें उनके कार्य, अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट हों।

सरकार और मंत्रालयों से सहयोग की अपील

IPTA ने देश के विभिन्न मंत्रालयों और सरकार से इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल करने का आग्रह किया। संगठन की ओर से कहा गया कि निजी शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों, संस्थानों और सरकार के बीच संवाद स्थापित किया जाना चाहिए।

ऐसी चर्चा के माध्यम से एक व्यावहारिक और प्रभावी व्यवस्था तैयार की जा सकती है, जो निजी शिक्षकों के हितों की रक्षा करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाए।

करोड़ों शिक्षकों की ओर से आभार

डॉ. परमानंद मोदी ने कहा कि यदि सरकार निजी शिक्षकों के लिए उचित कानूनी व्यवस्था और पहचान सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाती है, तो देश के करोड़ों शिक्षक इसके लिए सरकार और संबंधित मंत्रालयों के आभारी रहेंगे।

उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान और अधिकार के साथ काम करेंगे तो वे विद्यार्थियों को और बेहतर तरीके से शिक्षा देने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान करने में सक्षम होंगे।

स्वतंत्रता दिवस पर लिया जाए शिक्षा को मजबूत बनाने का संकल्प

IPTA ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और शिक्षक समुदाय की समस्याओं के समाधान की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया।

डॉ. परमानंद मोदी ने कहा कि आजादी का वास्तविक महत्व तभी और अधिक सार्थक होगा, जब देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन और समान अवसर प्राप्त हों। शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले शिक्षकों को उचित सम्मान और अवसर देना भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भागीदारी महत्वपूर्ण

उन्होंने कहा कि भारत को विकसित और मजबूत राष्ट्र बनाने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। शिक्षक ही नई पीढ़ी को ज्ञान, कौशल और जिम्मेदारी की भावना से तैयार करते हैं।

इसलिए शिक्षक समुदाय की समस्याओं का समाधान करना और उन्हें बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना राष्ट्र के भविष्य में निवेश के समान है। उन्होंने देशभर के शिक्षकों से सकारात्मक सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में योगदान जारी रखने की अपील की।

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