जमशेदपुर: बागबेड़ा एवं आसपास के पंचायत क्षेत्रों में SIR की प्रारूप मतदाता सूची को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत SIR फॉर्म जमा करने और उसकी प्राप्ति रसीद हासिल करने के बावजूद कई लोगों के नाम प्रारूप मतदाता सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं। प्रभावित लोगों में मुखिया, उपमुखिया, पंचायत समिति सदस्य सहित बड़ी संख्या में आम मतदाता भी शामिल बताए जा रहे हैं।
नाम गायब होने की जानकारी सामने आने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों के बीच असंतोष और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पंचायत प्रतिनिधियों ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने डीसी के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र
इस मामले को लेकर पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के नेतृत्व में पंचायत प्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला उपायुक्त राजीव रंजन से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम मांग पत्र सौंपा।
मांग पत्र के माध्यम से प्रतिनिधियों ने SIR प्रक्रिया में सामने आई कथित गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। साथ ही यह भी कहा गया कि जिन लोगों ने निर्धारित समय पर अपने फॉर्म जमा किए और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए, उनके नाम सूची में क्यों नहीं आए, इसकी स्पष्ट जांच होनी चाहिए।
समय पर जमा किया गया था SIR फॉर्म
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को बताया कि संबंधित मतदाताओं ने निर्धारित समय सीमा के भीतर BLO के पास SIR फॉर्म जमा किया था। फॉर्म के साथ आवश्यक दस्तावेज भी दिए गए थे।
प्रतिनिधियों के अनुसार, फॉर्म जमा करने के बाद संबंधित लोगों को उसकी प्राप्ति रसीद भी दी गई। इसके बावजूद जब प्रारूप सूची सामने आई तो कई ऐसे लोगों के नाम उसमें नहीं मिले, जिन्होंने दावा किया है कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया के तहत अपना फॉर्म जमा किया था।
यही वजह है कि प्रभावित मतदाताओं और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि आवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा हुआ और उसकी रसीद भी उपलब्ध है, तो फिर नाम प्रारूप सूची से बाहर कैसे रह गया।
मुखिया और उपमुखिया के नाम भी गायब होने का आरोप
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यह समस्या केवल सामान्य मतदाताओं तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, कुछ मुखिया, उपमुखिया और पंचायत समिति सदस्यों के नाम भी प्रारूप सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों के नाम सूची में नहीं होने की बात सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने वाले निर्वाचकों के नाम सूची में नहीं आए हैं, तो इसकी वजह स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सैकड़ों मतदाताओं के प्रभावित होने का दावा
प्रतिनिधिमंडल की ओर से दावा किया गया कि बागबेड़ा और आसपास के पंचायत क्षेत्रों में सैकड़ों मतदाताओं के नाम प्रारूप SIR सूची में नहीं आए हैं।
हालांकि, प्रभावित मतदाताओं की वास्तविक संख्या और नामों का आधिकारिक सत्यापन जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे क्षेत्र में सूची और जमा किए गए फॉर्म का मिलान कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
रसीद होने के बावजूद नाम नहीं आने पर उठे सवाल
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन मतदाताओं को लेकर है, जिनके पास फॉर्म जमा करने की रसीद होने का दावा किया जा रहा है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने समय पर फॉर्म जमा किया और उसे प्राप्ति रसीद भी मिली, तो उसके नाम का प्रारूप सूची में नहीं होना जांच का विषय है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की कि प्रत्येक ऐसे मामले की जांच कर यह पता लगाया जाए कि आवेदन प्रक्रिया के किस स्तर पर समस्या हुई।
प्रभावित लोगों को कारण बताने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन मुखिया, उपमुखिया, पंचायत समिति सदस्यों और आम मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में नहीं हैं, उन्हें नाम नहीं आने का कारण बताया जाए।
प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रभावित लोगों को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनका आवेदन किस वजह से सूची में शामिल नहीं हुआ। इससे लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा होगी।
पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की मांग
पंचायत प्रतिनिधियों ने सभी पात्र मतदाताओं के नाम नियमानुसार दोबारा जोड़ने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि जिन लोगों के दस्तावेज और पात्रता सही पाए जाएं, उनके नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई जल्द की जानी चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित किसी भी समस्या का समाधान समय रहते होना जरूरी है, ताकि पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
लापरवाही करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई की मांग
मामले में पंचायत प्रतिनिधियों ने संबंधित प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि SIR जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में दस्तावेजों और आवेदनों की सही तरीके से जांच और रिकॉर्डिंग बेहद जरूरी है। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही के कारण पात्र लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं हुए हैं, तो जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की। प्रतिनिधियों का कहना है कि फॉर्म जमा करने से लेकर प्रारूप सूची में नाम दर्ज होने तक पूरी प्रक्रिया की प्रभावी निगरानी आवश्यक है।
इसके लिए आवेदन, दस्तावेज और प्राप्ति रसीद का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने तथा जरूरत पड़ने पर उसका सत्यापन करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
उपायुक्त ने दिया जांच का आश्वासन
पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा मामला उठाए जाने के बाद जिला उपायुक्त राजीव रंजन ने प्रतिनिधिमंडल को आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, उपायुक्त ने मामले की जांच कराने, यदि किसी स्तर पर दोष या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पात्र लोगों के नाम नियमानुसार दोबारा जोड़ने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की बात कही।
इस आश्वासन के बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और प्रभावित मतदाताओं की समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा।
पंचायत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में उठाया गया मुद्दा
मांग पत्र सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता, ग्राम प्रधान चुनका माडी, उपमुखिया विनीता देवी, कुमोद यादव, आलम ताज, पंचायत समिति सदस्य किशोर सिंह, सतवीर सिंह बग्गा, रवि कुलरी, संदीप शर्मा, वार्ड सदस्य नीतीश समेत कई पंचायत प्रतिनिधि शामिल थे।
सभी ने SIR सूची में सामने आई कथित गड़बड़ी की जांच और पात्र लोगों के नाम सूची में शामिल कराने की मांग का समर्थन किया।
अब जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
SIR की प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं होने का मामला सामने आने के बाद अब प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है। जांच के दौरान जमा किए गए फॉर्म, प्राप्ति रसीद, संबंधित दस्तावेज और प्रारूप सूची के रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।

इससे यह स्पष्ट होने में मदद मिलेगी कि नाम किन कारणों से सूची में शामिल नहीं हुए और किन लोगों के आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर लंबित या प्रभावित हुए।
मतदाताओं में बनी असमंजस की स्थिति
नाम नहीं आने की खबर के बाद प्रभावित मतदाताओं में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लोगों की चिंता है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म और दस्तावेज जमा किए, फिर भी उनका नाम प्रारूप सूची में दिखाई नहीं दे रहा है।
ऐसे में प्रशासन की ओर से जांच और स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद ही प्रभावित लोगों की स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी।
बागबेड़ा एवं आसपास के पंचायत क्षेत्रों में SIR की प्रारूप मतदाता सूची से नाम गायब होने का मामला अब प्रशासन के सामने पहुंच चुका है। पंचायत प्रतिनिधियों का दावा है कि कई लोगों ने समय पर SIR फॉर्म आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा किया और प्राप्ति रसीद भी प्राप्त की, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम प्रारूप सूची में नहीं दिखाई दिए।
इसमें मुखिया, उपमुखिया, पंचायत समिति सदस्य और आम मतदाता भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रतिनिधियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच, प्रभावित लोगों को कारण बताने, पात्र मतदाताओं के नाम नियमानुसार दोबारा जोड़ने और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिला उपायुक्त राजीव रंजन की ओर से जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच के परिणाम पर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि SIR की प्रारूप सूची में नाम नहीं आने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा और कितने पात्र मतदाताओं के नाम नियमानुसार सूची में शामिल किए जाएंगे।


















