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Mauganj टीआई पर पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और धमकी के आरोप एसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज

On: August 14, 2026 5:54 PM
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मऊगंज: Mauganj जिले में खटखरी बाजार में हुए सड़क हादसे की कवरेज को लेकर थाना प्रभारी राम सिंह और पत्रकारों के बीच विवाद का मामला सामने आया है। पत्रकारों का आरोप है कि हादसे की रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकारों के साथ थाना प्रभारी ने अभद्र व्यवहार किया और वीडियो बनाने पर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी दी।

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पत्रकारों ने इस मामले को लेकर 10 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, मऊगंज में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसका शिकायत क्रमांक 291/26 बताया गया है। शिकायत में थाना प्रभारी के कथित व्यवहार की जांच कर उचित वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।

9 अगस्त की रात हुआ था सड़क हादसा

बताया गया कि 9 अगस्त 2026 की रात खटखरी बाजार में एक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक महिला की मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया और हाईवे जाम किए जाने की स्थिति उत्पन्न हुई।

घटना की जानकारी मिलने के बाद पत्रकार मौके पर पहुंचे और घटना की कवरेज करने लगे। पत्रकारों का कहना है कि हादसा गंभीर और संवेदनशील था, इसलिए मौके की स्थिति, स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी जुटाना जरूरी था।

कवरेज के दौरान विवाद का आरोप

पत्रकारों के अनुसार, मौके पर कवरेज के दौरान मऊगंज थाना प्रभारी राम सिंह ने पत्रकारों के प्रति नाराजगी जाहिर की। आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों के साथ कथित तौर पर अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

मामले में पत्रकार प्रद्युम्न शुक्ला, दीपक (लवकुश) सिंह, विनोद सिंह, अमर मिश्रा सहित अन्य पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के आधार पर नहीं की जा सकी है। मामले में पुलिस पक्ष और शिकायत पर होने वाली जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

वीडियो बनाने पर मुकदमे की धमकी का आरोप

शिकायत में पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि कवरेज के दौरान वीडियो बनाए जाने पर थाना प्रभारी की ओर से मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की धमकी दी गई। पत्रकारों के मुताबिक, थाना प्रभारी ने कथित तौर पर यह भी कहा कि “मेरी नजरों में जो एक बार चढ़ गया तो उतरता नहीं।”

पत्रकारों ने इस कथित बयान को गंभीर बताते हुए कहा है कि यदि किसी पत्रकार को उसकी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के दौरान इस तरह की धमकी दी जाती है, तो इससे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित हो सकती है।

पत्रकारों ने उठाया पत्रकारिता की स्वतंत्रता का सवाल

मामले के बाद स्थानीय पत्रकारों ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और मौके पर रिपोर्टिंग के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। पत्रकारों का कहना है कि सड़क हादसे, जन-आक्रोश और प्रशासनिक कार्रवाई जैसी घटनाओं की रिपोर्टिंग करना पत्रकारों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी सार्वजनिक घटना की कवरेज के लिए पत्रकारों को पुलिस से अनुमति लेनी होगी? क्या हादसे और जन-आक्रोश से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग को प्रतिबंधित किया जा सकता है?

पत्रकारों का कहना है कि पुलिस और मीडिया दोनों की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां हैं और दोनों के बीच संवाद तथा समन्वय लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।

एसपी कार्यालय में दर्ज कराई शिकायत

पत्रकारों ने पूरे मामले को लेकर 10 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय, मऊगंज में लिखित शिकायत प्रस्तुत की। शिकायत का क्रमांक 291/26 बताया गया है।

शिकायत में पत्रकारों ने थाना प्रभारी के कथित व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। पत्रकारों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए और किसी भी विवाद की स्थिति में कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

तीन दिन में कार्रवाई की मांग

शिकायत के बाद पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों के अनुसार, यदि तीन दिवस के भीतर थाना प्रभारी के खिलाफ उचित वैधानिक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का निर्णय लेंगे।

पत्रकारों ने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

स्वतंत्रता दिवस पर काली पट्टी बांधने की चेतावनी

पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मऊगंज के पत्रकार काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा सकते हैं।

पत्रकारों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या अधिकारी का विरोध करना नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि विवाद को संवाद और निष्पक्ष जांच के माध्यम से सुलझाया जाए।

टीपा बदौर मामले का भी उल्लेख

पत्रकारों की शिकायत और बयान में ‘टीपा बदौर’ में शव मिलने के मामले से जुड़ी कथित पूर्व घटना का भी उल्लेख किया गया है। पत्रकारों का आरोप है कि उस मामले में भी पीड़ित पक्ष को बुलाकर परेशान किए जाने जैसी शिकायतें सामने आई थीं।

हालांकि, इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और संबंधित मामले के आधिकारिक रिकॉर्ड अथवा जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इनके संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

प्रशासन के सामने निष्पक्ष जांच की चुनौती

पूरे मामले के सामने आने के बाद अब पुलिस प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती निष्पक्ष जांच की है। यदि पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, थाना प्रभारी का पक्ष भी जांच में सामने आना जरूरी है, ताकि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुना जा सके।

ऐसे मामलों में शिकायत, मौके पर मौजूद लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पत्रकार और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत

पत्रकारिता और पुलिस प्रशासन दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस और पत्रकारों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

सड़क हादसे जैसी संवेदनशील घटनाओं में पुलिस का प्राथमिक दायित्व कानून-व्यवस्था बनाए रखना और पीड़ितों की सहायता करना होता है, जबकि पत्रकारों की जिम्मेदारी तथ्य जुटाकर जनता तक सही जानकारी पहुंचाना है। दोनों पक्षों के बीच संवाद और संयम से कई विवादों को टाला जा सकता है।

मामले में पुलिस के आधिकारिक पक्ष का इंतजार

पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। शिकायत संख्या 291/26 के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सत्य मानना उचित नहीं होगा। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

Mauganj में खटखरी सड़क हादसे की कवरेज को लेकर थाना प्रभारी और पत्रकारों के बीच सामने आया विवाद अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। पत्रकारों ने कथित अभद्रता और धमकी को लेकर शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

पत्रकारों ने तीन दिन में कार्रवाई नहीं होने पर 15 अगस्त को काली पट्टी बांधकर विरोध करने की चेतावनी दी है। अब निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। मामले में निष्पक्ष जांच, दोनों पक्षों को सुनना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना ही विवाद का उचित समाधान हो सकता है।

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