जमशेदपुर: Karim सिटी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं के अलावा कॉलेज के अन्य विषयों के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। इस दौरान विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, चिंता, अवसाद और बेहतर जीवनशैली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और उन्हें दैनिक जीवन में तनाव तथा अन्य मानसिक परेशानियों से बेहतर तरीके से निपटने के उपायों से परिचित कराना था।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विद्यार्थियों में जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में पढ़ाई, करियर, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक परिस्थितियों और बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
विद्यार्थियों को बताया गया कि जिस तरह स्वस्थ शरीर के लिए नियमित देखभाल जरूरी है, उसी तरह स्वस्थ मन के लिए भी सकारात्मक सोच, संतुलित दिनचर्या और उचित जीवनशैली आवश्यक है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को समझने के साथ विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
डॉ. फैजल हसन रहे रिसोर्स पर्सन
कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. फैजल हसन, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ एलाइड हेल्थ साइंस, मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर ने हिस्सा लिया।

उन्होंने विद्यार्थियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को समझने तथा समय रहते उनके प्रति जागरूक होने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने और मानसिक परेशानियों को गंभीरता से लेने की सलाह दी।
श्री शाहरुख खान ने भी रखे विचार
कार्यक्रम में श्री शाहरुख खान ने भी वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को अपनी दिनचर्या और जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए। लगातार तनावपूर्ण परिस्थितियों में रहने से व्यक्ति के व्यवहार, सोच और दैनिक जीवन पर प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी परेशानियों को समझने और जरूरत पड़ने पर परिवार, मित्रों, शिक्षकों या विशेषज्ञों से बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने की अध्यक्षता
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने की। उन्होंने अपने संबोधन में वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। यदि इन समस्याओं को समय रहते समझा और संबोधित नहीं किया जाए तो इनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों से अपनी दिनचर्या को संतुलित रखने और मानसिक तनाव को कम करने के लिए स्वस्थ आदतों को अपनाने की अपील की।
डॉ. जकी अख्तर ने किया स्वागत भाषण
कार्यक्रम का स्वागत भाषण मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. जकी अख्तर ने किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों, प्राचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। युवा वर्ग शिक्षा और करियर की दौड़ में कई बार अपनी मानसिक स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाता। ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपनी मानसिक सेहत के प्रति सजग बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी जरूरी
विषय पर प्रकाश डालते हुए डॉ. फिरोज इब्राहीमी ने कहा कि जिस प्रकार व्यक्ति के लिए शारीरिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य भी बेहद अहम है।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता है तो उसके जीवन का संतुलन प्रभावित हो सकता है। स्वस्थ जीवन के लिए शरीर और मन दोनों का स्वस्थ रहना आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं और मानसिक स्थिति को समझने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने के लिए जागरूक किया।
तनाव और चिंता से बचाव पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में तनाव और चिंता को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पढ़ाई, परीक्षा, नौकरी, करियर और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी परिस्थितियां कई बार विद्यार्थियों में तनाव का कारण बन सकती हैं।
ऐसी परिस्थितियों में समस्या से भागने के बजाय उसे समझने और उसके समाधान की दिशा में कदम उठाना जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं पर भरोसेमंद लोगों से बातचीत करने और आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ की मदद लेने की सलाह दी गई।
अवसाद को लेकर भी विद्यार्थियों को किया जागरूक
कार्यक्रम में अवसाद जैसी मानसिक समस्या पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि लंबे समय तक उदासी, निराशा, रुचि में कमी या लगातार मानसिक परेशानी को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि मानसिक परेशानी होने पर सहायता मांगना कमजोरी नहीं है। समय पर उचित मार्गदर्शन और सहायता मिलने से व्यक्ति अपनी स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल सकता है।
बेहतर भोजन और जीवनशैली पर दिया जोर
वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए उचित भोजन और संतुलित जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों को पर्याप्त आराम, नियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि और सकारात्मक सामाजिक संपर्क बनाए रखने की सलाह दी। इसके साथ ही अनावश्यक तनाव पैदा करने वाली परिस्थितियों और नकारात्मक गतिविधियों से दूरी बनाए रखने की बात कही गई।
मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल पर प्राचार्य ने जताई चिंता
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी सावधान किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, लेकिन इसका अत्यधिक इस्तेमाल पढ़ाई, नींद, एकाग्रता और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को जहां तक संभव हो, मोबाइल के अनावश्यक इस्तेमाल से दूरी बनाए रखने की सलाह दी।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों से मोबाइल के उपयोग को सीमित और उद्देश्यपूर्ण रखने का आग्रह किया।
डिजिटल जीवन में संतुलन जरूरी
कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी सामने आया कि तकनीक और मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, बल्कि उसके उपयोग में संतुलन बनाना महत्वपूर्ण है।
विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे पढ़ाई और जरूरी कार्यों के लिए तकनीक का उपयोग करें, लेकिन लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से बचें। व्यक्तिगत बातचीत, खेल, अध्ययन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी समय निकालना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया हिस्सा
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग के साथ-साथ अन्य विषयों के छात्र-छात्राओं ने भी भाग लिया। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल किसी बीमारी से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के दैनिक जीवन, सोच, भावनाओं, व्यवहार और सामाजिक संबंधों से भी जुड़ा हुआ है।
मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद को बढ़ावा देने की पहल
Karim सिटी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की यह पहल विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बातचीत को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रही। ऐसे कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने और समस्याओं को समझने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि मानसिक परेशानी को छिपाने के बजाय उसके बारे में बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेना बेहतर रास्ता है।
Karim सिटी कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में तनाव, चिंता, अवसाद, स्वस्थ जीवनशैली और मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
डॉ. फैजल हसन और श्री शाहरुख खान ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। डॉ. फिरोज इब्राहीमी ने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन के महत्व पर जोर दिया, जबकि प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज ने युवाओं को चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं के प्रति जागरूक रहने तथा मोबाइल के अनावश्यक इस्तेमाल को सीमित करने की सलाह दी।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि स्वस्थ जीवन के लिए स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन भी जरूरी है। विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या, खान-पान, तकनीक के इस्तेमाल और मानसिक स्थिति पर ध्यान देते हुए संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।
नोट: आपकी प्रेस विज्ञप्ति में “World Mental Health Day” लिखा है, जबकि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस सामान्यतः 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसलिए 10 अगस्त 2026 की इस खबर में ऊपर मैंने इसे “मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम” के रूप में लिखा है, ताकि तारीख और तथ्य में विरोधाभास न रहे।
























